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UP के बरेली, देवीपाटन व लखनऊ मंडल में रहस्यमय बुखार से अब तक 703 की मौत


🗒 गुरुवार, सितंबर 20 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 रहस्यमय बुखार से लोग तेजी से मर रहे हैं लेकिन, पूरी ताकत झोंकने के बाद भी प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग इसकी असल वजह तक नहीं पहुंच पाया है। बरेली मंडल के दो जिलों बरेली व बदायूं से चला यह बुखार अब पीलीभीत और शाहजहांपुर के साथ बरेली मंडल के चारों जिलों को अपनी चपेट में ले चुका है। बुखार की दहशत देवीपाटन मंडल के बाद अब लखनऊ मंडल तक भी पहुंच गई है।तीन हफ्तों में तीनों मंडलों में करीब डेढ़ लाख लोग इस बुखार की चपेट में आए हैं।

UP के बरेली, देवीपाटन व लखनऊ मंडल में रहस्यमय बुखार से अब तक 703 की मौत

इसमें से अब तक 703 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि सरकारी आंकड़ा अभी बुखार से 79 मौतों का ही है। बुखार और मौतों के लिए मलेरिया, टाइफाइड और वायरल फीवर को जिम्मेदार ठहरा रहे स्वास्थ्य अधिकारी बदायूं में डेंगू का एक मरीज और देवीपाटन मंडल के बहराइच जिले में इंसेफ्लाइटिस के पांच मरीज मिलने और उनमें से तीन की मौत होने से हैरत में हैं, जबकि लखनऊ मंडल के हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर खीरी में भी मौत के मुंह में ले जाने वाले इस बुखार के पहुंचने से लोग जबरदस्त दहशत में घिर गए हैं।स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जब पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का स्तर कमोबेश एक सा है, बारिश के बाद गंदगी, जलभराव व मच्छरों के हालात समान हैैं और अस्पतालों की दशा भी एक जैसी है तो केवल बरेली के 147 और बदायूं के 164 गांवों में ही जानलेवा बुखार का प्रकोप क्यों हुआ।

अधिकारी यह भी बताने की स्थिति में नहीं हैं कि मामूली इलाज से ठीक हो जाने वाला मलेरिया या टाइफाइड अचानक इतने बड़े पैमाने पर जानलेवा कैसे बन गया। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.पद्माकर सिंह से लेकर राज्य मुख्यालय की संचारी रोग निदेशक डॉ.मिथिलेश चतुर्वेदी तक यह जवाब पाने की कोशिश में हैैं लेकिन, अभी उनके हाथ खाली हैैं और लोग जान गंवा रहे हैं।स्वास्थ्य अधिकारी भले ही अचानक बड़े पैमाने पर जानलेवा बुखार फैलने का कारण न समझ पा रहे हों लेकिन, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी का मानना है कि यह समस्या मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) की लापरवाही से खड़ी हुई है। त्रिवेदी का कहना है कि जिन जिलों में सीएमओ सक्रिय हैैं, वहां बुखार नियंत्रित है लेकिन, जहां सीएमओ न ध्यान नहीं दिया, वहां बुखार बढ़ गया।

जहां मलेरिया नहीं, वहां भी बुखार से हो रहीं मौतें
बुखार से बुधवार को हुई 20 मौतों के साथ बरेली मंडल में मौतों की संख्या जहां 465 हो गई, वहीं देवीपाटन मंडल में 70 और लखनऊ मंडल में 168 मौतों के साथ प्रदेश में इस जानलेवा बुखार से मौत का आंकड़ा 703 तक पहुंच गया। बरेली मंडल के बदायूं में 218, बरेली में 175, शाहजहांपुर में 57 और पीलीभीत में 15 मौतें हुई हैं, जबकि देवीपाटन मंडल के बहराइच जिले में 70 और लखनऊ मंडल के हरदोई में 107, सीतापुर में 39 और लखीमपुर खीरी में अब तक 22 लोग बुखार जान गंवा चुके हैं।स्वास्थ्य विभाग इन मौतों के लिए खास तौर पर जानलेवा फाल्सीपेरम मलेरिया को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि सीतापुर के सरकारी आंकड़े ही इस दावे को गलत ठहरा रहे हैैं। विभाग के मुताबिक सीतापुर में अब तक बुखार के 8075 मरीज देखे गए, जिसमें से 1752 की जांच की गई। इनमें से किसी में मलेरिया तो नहीं मिला लेकिन, फिर भी इसमें आठ लोगों की बुखार से मौत हो गई। केवल दावे ही एक-दूसरे से विपरीत नहीं हैं, अस्पतालों में भी बुखार को लेकर खासी लापरवाही बरती गई है।राज्य स्तरीय टीम जब पिछले दिनों बरेली के सरकारी अस्पताल में पहुंची तो पता चला कि बुखार से अस्पताल में हुई मौतों तक के अभिलेख मौजूद नहीं थे। मौत के कारण भी इसी वजह से पता नहीं चल सके। इसके बाद से अभिलेख रखे जाने लगे। ब्लड स्लाइड्स भी बनाई गईं, लेकिन मलेरिया और टाइफाइड से ज्यादा अब तक कुछ पता नहीं चला। इसी तरह जब लोग मर रहे थे, तब सरकारी अस्पतालों में मलेरिया तक की दवा नहीं थी। पिछले दिनों बरेली पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को लोकल पर्चेस से दवा खरीद करानी पड़ी थी।बहराइच में जहां निजी चिकित्सक मौत के आंकड़े छिपा रहे हैं, वहीं मलेरिया और वायरल फीवर के मरीज लंबे समय तक बुखार रहने से डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से जान गंवा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तब ही पहुंचती हैैं, जब मौतों का सिलसिला शुरू हो जाता है।

सरकारी आंकड़ों की तस्वीर 
जिला- बुखार से मौत- अन्य कारणों से मौत
बरेली- 24- 21
बदायूं- 23- 115
शाहजहांपुर- 2- 22
पीलीभीत- 4- 19
बहराइच- 6- 63
हरदोई- 12- 17
सीतापुर- 8- 26

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। विभाग के मुताबिक जिलों में टीमें सक्रिय हैैं और संक्रामक रोगों का एक्टिव सर्विलांस किया जा रहा है। बुधवार को जारी सूचना के मुताबिक बदायूं में 10 अगस्त और बरेली में 20 अगस्त से जिलास्तरीय टीमें सक्रिय हैं। बरेली में 63,329 और बदायूं में 30,361 बुखार पीडि़त मरीजों का इलाज किया गया, जिसमें बरेली में 8984 और बदायूं में 1927 मलेरिया के मरीज पाए गए। इसी तरह हरदोई में 86, पीलीभीत में 47 और शाहजहांपुर में 89 मरीजों में मलेरिया पाया गया। हालांकि सीतापुर में भी बुखार से आठ मौतें हुई हैैं लेकिन, इनमें मलेरिया नहीं पाया गया।प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रहस्यमयी बुखार के कारण मौतों का क्रम जारी रहने पर विपक्षी दलों ने सरकार को जिम्मेदार बताया और मृतकों के परिवारीजन को दस -दस लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।कांग्रेस प्रवक्ता ओंकार नाथ सिंह ने आरोप लगाया कि पांच सौ से अधिक मौत होने के बावजूद सरकार आंख व कान बंद किए है। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं चौपट हो चुकी है सरकार द्वारा किए गए सभी दावे हवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रहस्यमयी बुखार कहर बना है और सरकार जातिवादी सम्मेलन आयोजित कराने में जुटी है। समाज को बांटकर सत्ता हथियाने का ख्वाब देख रही भाजपा का संवेदनहीन चेहरा उजागर हो गया। कांग्रेस प्रवक्ता ने पीडि़तों को मुफ्त इलाज और इससे मरे लोगों के परिवारीजन को मुआवजा देने की मांग की।रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डा. मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकों की जीवनरक्षा करने में नाकाम रही। बुखार का उचित इलाज न मिलने से मौतों का सिलसिला जारी है और स्वास्थ्य मंत्री का उपेक्षापूर्ण रवैया बेहद निदंनीय है। बरेली मंडल व सीतापुर, बहराइच, लखीमपुर व पीलीभीत समेत विभिन्न जिलों में हाहाकार जैसे हालात बने है। अफसोस है कि इस बुखार के कारण और उपचार करने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम रहा है। सीतापुर के गोंदलामऊ क्षेत्र मेंं एक हजार से अधिक लोग इस बुखार से ग्रसित हैं। उन्होंने बुखार से मरने वालों के परिवारीजन को दस-दस लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।

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