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गोवर्धन पूजा का महत्व क्यो मनाते है गोवर्धन पूजा


🗒 गुरुवार, नवंबर 08 2018
🖋 चित्रभान केशव अग्निहोत्री, ब्यूरो प्रमुख कानपुर

कानपुर - इस दिन भगवान श्री कृष्‍ण ने देव राज इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी.
दीपावली के अगले दिन गोवर्द्धन पूजा की जाती है। इस दिन भगवान कृष्‍ण ने गोवर्द्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है. यही नहीं इस दिन 56 या 108 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्‍ण को उनका भोग लगाया जाता है. इन पकवानों को 'अन्‍नकूट' कहा जाता है. मान्‍यता है कि इसी दिन भगवान कृष्‍ण ने देव राज इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की।

गोवर्धन पूजा का महत्व क्यो मनाते  है गोवर्धन पूजा

*कहानी इस प्रकार हैं:-*
नंद गांव के किसान अपनी फसल क़ा काफी हिस्सा इन्द्र देव को खुश करने के लियें इन्द्र देव की पूजा पर व्यर्थ कर देते थें । एक बार श्री कृष्ण ने ये सब देख किसानों को इन्द्र की पूजा में अनाज व्यर्थ करने से रोक दिया नंद गाँव के लोगों ने कृष्ण की बात मानते हुए उस साल इन्द्र की पूजा नही की जिससे इन्द्र देव काफी क्रोधित हुए और अगले वर्ष फसल के समय घनघोर वर्षा शुरू कर दी सभी गांव के लोग कृष्ण के पास भागे भागे गये और इन्द्र के क्रोध क़ा व्रतांत सुनाया तब श्री कृष्ण ने गांव के सभी जीवों की रक्षा के लियें गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली से उठाकर गाँव के सभी लोगों सहित सभी जानवरों की रक्षा की यह देख इन्द्र को लज्जा आई और उन्होंने वर्षा समाप्त कर दी और अपनी गलती स्वीकार की तभी श्री कृष्ण ने सभी किसानों से कहा की यदि पूजा करनी ही हैं तो इस गोवर्धन पर्वत की पूजा करो जिसने तुम सबकी रक्षा की हैं। तभी से गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई ।

गोवर्द्धन पूजा के दिन गाय-बैलों की पूजा की जाती है. इस पर्व को 'अन्‍नकूट' के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सभी मौसमी सब्‍जियों को मिलाकर अन्‍नकूट तैयार किया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है. फिर पूरे कुटुंब के लोग साथ में बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं. मान्‍यता है कि अन्‍नकूट पर्व मनाने से मनुष्‍य को लंबी उम्र और आरोग्‍य की प्राप्‍ति होती है. यही नहीं ऐसा भी कहा जाता है कि इस पर्व के प्रभाव से दरिद्रता का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्‍ति होती है. ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो साल भर दुख उसे घेरे रहते हैं. इसलिए सभी को चाहिए कि वे भगवान श्रीकृष्‍ण के प्रिय अन्नकूट उत्सव को प्रसन्‍न मन से मनाएं. इस दिन भगवान कृष्‍ण को नाना प्रकार के पकवान और पके हुए चावल पर्वताकार में अर्पित किए जाते हैं. इसे छप्पन भोग की संज्ञा भी दी गई है।

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