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वाराणसी मे डा. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा तारीख मिले तो 10 दिन में जीत जाएंगे राम मंदिर का मुकदमा


🗒 शनिवार, नवंबर 17 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

राज्यसभा सांसद एवं अरुधंती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के अध्यक्ष डा. सुब्रमण्यम स्वामी ने शनिवार को बीएचूय के छात्र-छात्राओं को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। वहीं जवाहर लाल नेहरु और नाथूराम गोडसे को लेकर भी उन्‍हाेंने सवाल उठाए। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में अशोक सिंघल स्मृति व्याख्यान के तहत 'श्रीराम जन्मभूमि मंदिर : स्थिति एवं संभावनाएं' विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने बतौर वक्ता कहा कि बीएचयू क्रांतिकारी भूमि है। डा. स्वामी ने यहां के विद्यार्थियों से कहा कि सुन्नी बोर्ड को छोड़कर देश के मुसलमान व मुस्लिम महिलाएं भी श्रीराम मंदिर के पक्ष में है। बस सभी हिंदुओं को एकजुट होकर मंदिर निर्माण में अपनी भूमिका निभानी होगी। यह भी कहा कि मंदिर निर्माण शुरु होने के बाद ही वह फिर बीएचयू आएंगे। यह भी कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट में डेट मिले तो 10 दिन में ही हमारी जीत हो जाएगी। श्रीराम मंदिर बनाने से कोई भी ताकत नहीं रोक पाएगी। इस दौरान भारत माता, वंदेमातरम, जय श्रीराम, हर-हर महादेव के नारे से महामना की बगिया गूंजायमान हो गई। 

वाराणसी मे डा. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा तारीख मिले तो 10 दिन में जीत जाएंगे राम मंदिर का मुकदमा

उन्होंने कहा कि मुगलों ने 600 साल व अंग्रेजों ने 200 साल तक हिंदुस्तान में जमकर आतंक मचाया और राज किया। 1528 में बाबर नाम के अक्रांता ने श्रीराम मंदिर को तोड़ दिया। आयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाना देश की अस्मिता व अस्तित्व का सवाल है। मस्जिद तो कही बन सकता है, लेकिन किसी की जन्मभूमि नहीं बदली जा सकती। नरसिम्हा राव सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दिया था कि अगर यह सिद्ध हो जाए कि वहां पर मंदिर था तो हम पूरी जमीन छोड़ देंगे। डा. स्वामी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदुओं को जमीन नहीं बस मथुरा, आयोध्या व काशी का मूल मंदिर चाहिए। इस लिए मंदिर निर्माण के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हूं।  डा. स्वामी ने कहा कि नेहरू ने अगर पटेल जी की बात मान ली होती तो आज कश्मीर में समस्या नहीं रहती। उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू व नाथूराम गोडसे के कनेक्शन की भी जांच होनी चाहिए। यह जांच का विषय है कि गांधी जी के मरने से किसको लाभ हुआ या होने वाला था। स्वामी ने श्रीराम को राष्ट्रीय भगवान बताते हुए कहा कि कांग्रेस और डीएमके पर रामसेतू तोडऩे का कुचक्र रचा, लेकिन उन्हीं का नुकसान हुआ। हालैंड से 30 करोड़ रुपये में ड्रेजर मंगा करन रामसेतू को तोडऩे का प्रयास किया था, लेकिन ड्रेजर खुद ही टूट गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कह दिया है कि रामसेतू को अब नहीं छेड़ा जाएगा। स्वामी ने दावा किया कि रामसेतू को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कराएंगे। डा. स्वामी ने कहा कि 2010 से 2017 तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने जल्दी-जल्दी सुनवाई की अपील की। हम कोर्ट से संपत्ति नहीं बल्कि हिंदुओं को मूलभूत अधिकार मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू हमेशा ही दयालु होते हैं, इसी लिए मंदिर को लेकर कभी हिंसक नहीं हुए। इजरायल भी वर्षों पहले कह चुका है कि भारत दुनिया में एकमात्र देश है जहां यहुदियों का शोषण नहीं हुआ। 

 डा. स्वामी ने कांग्रेस पर हमला बोलते कहा कि कांग्रेसी मोदी को चाय बेचने वाला कह रहे हैं। क्या कभी बताया कि सोनिया गांधी क्या करती थी। कहा कि सोनिया की डिग्री का सच देश के सामने खुलासा हो चुका है। ऐसे में सोनिया और राहुल दोनों को अपनी डिग्री देशवासियों को बतानी चाहिए। उन्होंने मोदी को स्वदेशी और सोनिया को विदेशी करार दिया। डा. स्वामी ने कहा कि विरोधी कहते हैं कि छह दिसंबर 1992 को मस्जिद तोड़ा गया, लेकिन जब मस्जिद है नहीं तो तोड़ा कैसे जाएगा। आयोध्या में तो श्रीराम जन्मूभूमि है। उन्होंने विरोधी यह भी कह रहे हैं कि चुनाव नजदीक आता है तो बीजेपी वाले मंदिर का मुद्दा गरमाते हैं, लेकिन कांग्रेस ने ही तो इस वक्त सुप्रीमकोर्ट में डेट टलवा दिया। वरना समय पर सुनवाई हुई होती तो अब तक मंदिर निर्माण भी शुरू हो गया होता। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय ने मंदिर के लिए एक केंद्र व तीन राज्य सरकारें जा चुकी हैं। श्रीराम मंदिर का निर्माण हिंदुस्तान की मूंछ राष्ट्र के सम्मान का सवाल है। जन्मभूमि अपरिवर्तनीय होती है। श्रीराम मंदिर निर्माण के विषय में डा. स्वामी के इस कार्यक्रम के खिलाफ लंका गेट पर विभिन्न संगठनों के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि 2019 चुनाव के मद्देनजर मंदिर का मुद्दा गरमाया जा रहा है। इसको लेकर लंका से रविदास गेट तक प्रतिरोध मार्च भी निकला गया। कहा कि सरकार मूलभूत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मंदिर का मुद्दा सामने ला रही है। डा. जागृति राही, डा. अनूप श्रमिक, सरिता पटेल, विकास सिंह, रामायण पटेल, अनुपम, अवंतिका आदि मौजूद थे।

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