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पुलिस की गिरफ्त में अनामिका शुक्ला के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले नीतू का फर्जी शिक्षक भाई


🗒 गुरुवार, जून 11 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मचाने वाले अनामिका शुक्ला प्रकरण में दर्जनों केस दर्ज होने के बाद अब फर्जीवाड़ा करने वाले का फर्जी शिक्षक भाई पुलिस की गिरफ्त में आया है। 25 जिलों के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के शैक्षणिक दस्तावेजों की मदद से फर्जी अनामिका शुक्ला की नियुक्ति कराने वाला मास्टर माइंड मैनपुरी के भौगांव का पुष्पेंद्र है। मास्टरमाइंड के भाई जसवंत को मैनपुरी में गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को पुलिस उसे सोरों कोतवाली लेकर आई। उससे पूछताछ में जानकारी मिली कि वह भी वैभव के फर्जी नाम व दस्तावेजों के सहारे कन्नौज के एक स्कूल में नौकरी कर रहा है। उसने यह भी खुलासा किया कि गिरफ्तार की गई सुप्रिया जिस मास्टरमाइंड का नाम राज बता रही थी उसका असली नाम पुष्पेंद्र है और गुरूजी के नाम से जाना जाता है। जब उससे पूछताछ हुई तो उसने मैनपुरी निवासी राज और अमरकांत के नाम बताए। यह भी बताया कि राज ने उसको अनामिका के दस्तावेज डेढ़ लाख रुपये में बेचे थे। पूछताछ में यह भी पता चला है कि पुष्पेंद्र, फर्जी डिग्रियों से लोगों को शिक्षक की नौकरी दिलाने का गिरोह चलाता है।कासगंज पुलिस ने गुरुवार को उसके भाई जसवंत को पकड़ा है। वह भी फर्जी शिक्षक है। जसवंत खुद विभव कुमार के फर्जी नाम से कन्नौज के हरसेन ब्लॉक के रामपुर बरौली के माध्यमिक स्कूल में शिक्षक है। उसके भाई पुष्पेंद्र को कोई राज के नाम से जानता है तो कोई नीतू के नाम से। उसको तो कुछ लड़कियां गुरुजी के नाम से जानती है। वह बीते सात वर्ष से फर्जी नौकरी दिलाने का धंधा कर रहा है। फर्जी शिक्षक जसवंत ने पुलिस के सामने अपने भाई के कई राज उगले हैं, जिनसे ये साफ हो गया है कि कॉकस के तार सिर्फ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से ही नहीं बल्कि बेसिक शिक्षा विभाग से भी जुड़े थे। फिलहाल पुलिस जसवंत से उसके भाई के बारे में और राज उगलवाने में लगी है। उसका भाई पुष्पेंद्र उर्फ राज उर्फ नीतू अभी फरार है। पुष्पेंद्र फर्जी डिग्री रैकेट का बड़ा संचालक है। पुष्पेंद्र ने ही राज बनकर सुप्रिया को अनामिका के डाक्यूमेंट्स पर नौकरी दिलाई थी।एसपी कासगंज सुशील धुले ने बताया कि 25 जिलों में अनामिका के नाम से फर्जी नियुक्ति कराने वाला मैनपुरी के भौगांव का रहने वाला पुष्पेंद्र ही है। उसके भाई जसवंत नेबताया कि वह कन्नौज के हरसेन ब्लॉक के रामपुर बरौली मेेंं पूर्व माध्यमिक विद्यालय मेंं इंचार्ज प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत है। दोनों भाई सात वर्ष से फर्जी शिक्षक नौकरी का धंधा कर रहे हैं। इससे साफ हो गया है कि कॉकस के तार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के साथ ही साथ बेसिक शिक्षा विभाग से भी जुड़े है। तभी जसवंत नाम का व्यक्ति विभव के नाम से नौकरी कर रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि नाम के इस खेल का पूरा खुलासा अब जल्द हो जाएगा। पुलिस अधीक्षक सुशील घुले का कहना है कि पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। एसओजी के साथ सर्विलांस टीम लगी है। सोरो थाना पुलिस भी तहकीकात कर रही है। आरोपितों को जल्द पकड़ कर फर्जीवाड़े का खुलासा किया जाएगा। माना जा रहा है कि बेसिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति में बड़े फर्जीवाड़े की जांच को अनामिका शुक्ला के नाम पर पर ही उलाझाना मास्टरमाइंड का मकसद है। इसी कारण इस प्रकरण में जहां भी अनामिका शुक्ला का नाम सामने आया, वहां पर इस्तीफा दिलाया गया। जिससे पुलिस एवं शिक्षा विभाग समझे कि नौकरी करने वाली अनामिका ही थी। मास्टरमाइंड ने कायमगंज की सुप्रिया को इस्तीफा देने के लिए कार से भेजा। यह कार भी कथित राज ने ही किराया पर ली थीं। उसने अपने एक साथी को भी कार में सुप्रिया के साथ भेजा था, जिसका नाम अमरजीत बताया जा रहा है, लेकिन वह बीएसए दफ्तर के कर्मचारियों को देख कर ही फरार हो गया था। मास्टरमाइंड की मंशा थी कि इसका भी इस्तीफा विभाग में पहुंच जाएगा तो सूबे के अन्य जिलों की तरह यह जांच भी उस अनामिका शुक्ला तक सिमट जाएगी, जिसे कायमगंज में कोई नहीं पहचानता।25 जिलों में एक ही दस्तावेज पर एक ही नाम से जुदा-जुदा चेहरों को नौकरी कराने वाला कॉकस शिक्षा विभाग की नियमावली से अच्छी तरह वाकिफ था। आशंका है कि किसी न किसी जिले में केजीबी से जुड़ा ही कोई शख्स भी इस कॉकस का हिस्सा हो, जिसने यहां पर नियुक्ति में मिलने वाली ढील को ही फर्जी शिक्षकों की आड़ बना लिया। केजीबी में नियुक्ति करने वाले कई शिक्षक भी नहीं जानते हैं कि उनके दस्तावेजों की बेसिक की तरह जांच होती है या नहीं। बेसिक की तरह साक्षात्कार होता है, लेकिन बेसिक में मूल अभिलेख जमा हो जाते हैं तो यहां पर वापस हो जाते हैं। आधार कार्ड एवं पते का सत्यापन न करने का नियम भी शिक्षा विभाग से जुड़े लोग जानते हैं। इन सभी ढील का ही कॉकस ने फायदा उठाया। अलग-अलग युवतियों के अनामिका शुक्ला के नाम से आधार कार्ड बनवाकर खेल कर डाला।

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