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दारोगा भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार


🗒 शुक्रवार, नवंबर 26 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
दारोगा भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन  गिरफ्तार

अलीगढ़ : उत्तर प्रदेश पुलिस उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वाले गिरोह का शुक्रवार को मेरठ की एसटीएफ ने बन्नादेवी थाना पुलिस की मदद से पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें परीक्षा कराने वाली कंपनी का सेंटर हेड उत्तराखंड के हरिद्वार का रहने वाला हिमांशु भी शामिल है। गिरोह ने परीक्षा केंद्र में केबिल डालकर सिस्टम को हैक कर लिया था। बाकायदा एक मकान में पूरा सेट-अप बना रखा था।उत्तर प्रदेश पुलिस उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा में साल्वर बिठाकर परीक्षा कराने की शिकायत मिल रही थीं। इस पर मेरठ फील्ड यूनिट के सीओ बृजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गईं। जांच में पता चला कि अलीगढ़ के कुछ परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर हैक करके अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल कर परीक्षा हल करवाई जा रही है। इस पर मेरठ की टीम शुक्रवार को अलीगढ़ गई। पता चला कि बन्नादेवी थाना क्षेत्र के महर्षि इंटर कालेज में इसी तरीके से परीक्षा करवाई जाती है। पुलिस ने कालेज में पास एक मकान में चल रहे इस सेंटर का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को दबोच लिया। इनके नाम सुरक्षा विहार निवासी दीपक उर्फ जीतू, मोहल्ला गायत्री नगर निवासी राजवीर सिंह व उत्तराखंड के हरिद्वार के थाना भगवानपुर के गांव कोटा मुरादनगर निवासी हिमांशु हैं। इनके पास से एक कंप्यूटर, मानीटर, दो सीपीयू, वाइ-फाइ, इंटरनेट डिवाइस, 11 केबिल, तीन एडप्टर, चार पावर कोड, पावर केबिल, की-बोर्ड, माउस, मल्टी प्लग एक्सटेंशन बोर्ड, दो पावर प्लग, सात हार्ड डिस्क, एख लेन केबिल बरामद की गई है। सीओ मोहसिन खान ने बताया कि गिरोह में कुछ और लोग शामिल हो सकते हैं। इनकी तलाश में टीमें लगा दी गईं हैं।पुलिस ने सबसे पहले दीपक को गिरफ्तार किया, जो इंटरनेट ठीक करके घर लौट रहा था। दीपक ने पूछताछ में बताया कि वह इंटरनेट का कनेक्शन उपलब्ध कराता है। दीपक ने बताया कि योगेंद्र नाम के व्यक्ति ने उसे गाजियाबाद के लक्ष्मीगार्डन लोनी निवासी जितेंद्र ने आइडी दी थी। इस पर 21 नवंबर 2021 को महर्षि इंटर कालेज के पीछे गायत्री नगर में राजवीर के मकान में इंटरनेट लगा दिया गया। यहां छह-सात लोगों ने लैब में लगे कंप्यूटर की आइडी को बदलकर एनी डेस्क के माध्यम से अपने फोन पर सभी कंप्यूटर का एक्सेस ले लिया। वहीं, 25 नवंबर को सुबह 08:10 बजे दीपक को फिर बुलाया गया। कहा कि इंटरनेट नहीं चल रहा है। इसके बाद एक अनजान व्यक्ति से फोन पर बात कराई। उसने तकनीकी जानकारी बताई, जिसकी मदद से इंटरनेट चल गया और कुछ ही देर में दोनों कंप्यूटर का एक्सेस फिर से आ गया। इस काम में योगेंद्र के अलावा कुलदीप, योगी चौधरी, उमेश, प्रदीप, मोहन, भूरा, बिट्टू व राजवीर सिंह शामिल हैं। इसके लिए एक लाख रुपये देने की बात कही गई थी। कहा कि इंटरनेट की समस्या आने पर ठीक करना होगा। दीपक के मुताबिक, गिरोह के लोगों ने एनएसआइटी के सेंटर के हेड हिमांशु का नाम लिया। कहा था कि उनसे भी बात हो गई हैं। वह हमारे साथ हैं।दीपक के साथ पुलिस राजवीर के मकान में पहुंची। जहां से मकान मालिक राजवीर को गिरफ्तार किया गया। राजवीर ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने उसे 20 हजार रुपये रोज देने व इंटरनेट फ्री देने का लालच दिया था। आरोपितों के खिलाफ थाना बन्नादेवी में धोखाधड़ी, 66 डी आइटी एक्ट, सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।इसके बाद पुलिस कालेज पहुंची, जहां हिमांशु को पकड़ा। हिमांशु ने बताया कि लैब की चाबी योगेंद्र के पास है। हिमांशु ने बताया मकान में एक मुख्य सिस्टम इंस्टाल किया, जिसको कालेज की लैब से कनेक्ट करने के लिए एक फिजिकल लैन केबल डाली, जो उस मकान से होते हुए कालेज की उस लैब के सिस्टम के साथ कनेक्ट हो गई। इसके बाद गिरोह के लोगों ने ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया, जिससे कालेज के कंप्यूटर चालू होते ही उनका एक्सेस मकान में लगे कंप्यूटर में आ जाता था। इसके बाद मकान में बैठे योगेंद्र व उसके साथी परीक्षा को हल कर देते थे। इसके लिए हिमांशु को प्रतिदिन एक लाख रुपये देने का आश्वासन दिया गया था।एसटीएफ की जानकारी के आधार पर गिरोह के तीन लोग पकड़े गए हैं, जो दारोगा भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने की तैयारी में थे। गुणवत्तापरक विवेचना के लिए साइबर क्राइम व सर्विलांस की टीमों को भी लगाया गया है। जांच की जा रही है। दूसरी तरफ सभी परीक्षा केंद्रों पर सतर्क ⊃2;ष्टि रखी गई है। एसपी सिटी इसके नोडल प्रभारी हैं।कलानिधि नैथानी, एसएसपी