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समीक्षा बैठक में राहुल गांधी ने कहा नहीं छोड़ूंगा अमेठी, आता रहूंगा


🗒 बुधवार, जुलाई 10 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

लोकसभा चुनाव में हार के बाद बुधवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अपने पहले दौरे पर अमेठी पहुंचे। लखनऊ एयरपोर्ट से होते हुए सड़क के रास्ते गौरीगंज के चौक स्थित कांग्रेसी नेता स्व. डॉ गंगा प्रसाद गुप्ता के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने उनके आवास पहुंचे। यहां उन्होंने परिवारीजनों से मुलाकात की। इसके बाद राहुल का काफिला निर्मला शैक्षिक संस्थान में पहुंचा है। यहां राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में शामिल कार्यकर्ताओं के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि वह अमेठी नहीं छोड़ेंगे। वह लगातार यहां आते रहेंगे। इसके साथ ही प्रियंका वाड्रा भी यहां आएंगी। कार्यकर्ताओं से कहा कि वह हार से निराशा न हो। क्षेत्र में जाकर पार्टी को मजबूत करें।राहुल गांधी ने आगे कहा कि अब वह वायनाड से सांसद है, इसलिए ज्यादा समय उनको वहां देना होगा। फिर भी यहां के कार्यकर्तओं को जब उनकी जरूरत होगी तो वह हर समय खड़े रहेंगे। राहुल गांधी की कार्यकर्ता बैठक समाप्त हुई। उधर, बैठक में प्रवेश न मिलने पर नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गेट के बाहर जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्र के खिलाफ नारेबाजी की। बता दें, अाज का दिन अमेठी की सियासत में काफी अहम रहा। बदले हुए हालात में राहुल गांधी अमेठी में जनता के सामने आए तो बहुत कुछ तस्वीर साफ हुई। अमेठी की सियासत किस करवट बैठेगी। अमेठी को लेकर पिछले पांच सालों से राहुल व स्मृति के बीच जारी सियासी लड़ाई का रुख क्या होगा इसके बारे में अभी कहना थोड़ा मुश्किल होगा।वैसे तो अमेठी से गांधी-नेहरू परिवार का बहुत पुराना नाता है।

समीक्षा बैठक में राहुल गांधी ने कहा नहीं छोड़ूंगा अमेठी, आता रहूंगा

वहीं, राहुल के अमेठी दौरे से ठीक पहले अमेठी में पोस्टर वॉर शुरू हो गया है। अमेठी में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें संजय गांधी अस्पताल को लेकर राहुल गांधी से जवाब मांगा गया है। पोस्टर में लिखा है- 'न्याय दो न्याय दो, मेरे परिवार को न्याय दो. दोषियों को सजा दो...इस अस्पताल में जिंदगी बचाई नही गंवाई जाती है।' सुबह से ही यह पोस्टर अमेठी में चर्चाओं का विषय बन गए हैं।बता दें, राहुल गांधी अमेठी में सोनिया गांधी के सांसद रहते हुए 2002 में राजनीति में सक्रिय हुए। 2004, 2009 व 2014 के आम चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी की जनता ने अपना रहनुमा चुना पर दूसरे चुनावों में कांग्रेस को करारी शिकस्त भी मिली। लेकिन, कांग्रेस ने कभी भी सियासी जख्मों से सबक लेकर आगे बढऩे की कोशिश नहीं की। 2017 के विधान सभा चुनाव में एक भी सीट पर पार्टी के प्रत्याशी नहीं जीते।पंचायत चुनाव के साथ नगरीय निकाय के चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा पर कांग्रेस ने कभी इसकी ईमानदारी से समीक्षा नहीं की। तीन जिलों (अमेठी, रायबरेली व सुलतानपुर) में फैले संसदीय क्षेत्र की अपनी-अपनी समस्याएं हैं और सियायत के रंग। जिन्हें भरने के लिए कांग्रेस के लोगों की माने तो राहुल गांधी बीते डेढ़ दशक में 191 बार अमेठी आये हैं। लंबे अंतराल के बाद पहली बार राहुल 2002 में अपनी बहन प्रियंका के साथ यहां आये थे। उसके बाद तो सांसद के रूप में उनका आना-जाना बना ही रहता था।अमेठी में राहुल गांधी को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के पहले किसी योद्धा ने कोई खास चुनौती नहीं दी। राहुल ने दो चुनावों में रिकार्ड मतों के अंतर से जीत दर्ज की। आम चुनाव 2014 के पहले के तीन चुनाव में तो बस कहने को ही अमेठी में चुनावी मैदान सजता था। लेकिन, स्मृति पहले राहुल को कड़ी चुनौती दी और फिर पांच साल मेहनत कर अमेठी की सरताज बन गईं। 

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