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आरएसएस राष्ट्रवादी संगठन, वैचारिक ताकत से करता है काम : राम नाईक


🗒 सोमवार, फरवरी 12 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 राज्यपाल राम नाईक का मानना है कि भारत जल्द ही विश्व गुरु बन सकता है। बलिया में राज्यपाल राम नाईक ने आज पंडित दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया।

आरएसएस राष्ट्रवादी संगठन, वैचारिक ताकत से करता है काम : राम नाईक

राज्यपाल राम नाईक ने आज बलिया ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात करने से जब वैचारिक ताकत को बल मिलेगा तब भारत विश्व गुरु बन सकता है। उनके विचारों की शक्ति का नतीजा था कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत के बाद भी जनसंघ आगे बढ़ता रहा।

राज्यपाल ने कहा कि आज की स्थिति में उनकी अवधारण बेहद महत्वपूर्ण है। राज्यपाल रामनाईक ने आज यहां चितबड़ागांव के महरेंव गांव स्थित रामजानकी मंदिर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण किया। स्वदेशी जागरण मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पधारे महामहिम राज्यपाल ने कहा कि प्रतिमा का अनावरण करने के बाद गर्व महसूस हो रहा है।

उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को उल्लेख करते हुए कहा कि उनका कहना था हर हाथ को काम और हर खेत को पानी मिलना चाहिए। साथ ही हमारा लक्ष्य अंत्योदय पर बल देकर उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास की बात हमेशा कही। उनके विचार शक्तिशाली थे। उन्हीं के सहारे हमें भारत की विशेषता को आगे बढ़ाना हो।

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के सबसे बड़ राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके विचारों को आत्मसात कर देश व प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा रह हैं।

आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन

राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि जो भाव आरएसएस के स्वयंसेवकों ने निर्माण किया है, उससे अगर राष्ट्र पर कितनी भी कठिनाई आ जाये वो एकजुट होकर उससे लडऩे व बलिदान होने के लिये तैयार रहते हैं। इसके स्वयंसेवक अपने ढंग से काम करते रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कई वर्षो से कार्य कर रहा है और वो अपने ढंग से काम करते रहे हैं। जो भाव आरएसएस के स्वयंसेवकों ने निर्माण किया हुआ है, उससे अगर राष्ट्र पर कितनी भी कठिनाई आ जाये वो एकजुट होकर उससे लडऩे व बलिदान होने के लिये तैयार रहते हैं।

राम मन्दिर के मुद्दे पर राज्यपाल ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट मे विचाराधीन है। दोनों पक्ष मिलकर अगर कुछ समझौता करते हैं तो ठीक है, नहीं तो जो सुप्रीम कोर्ट निर्णय करेगी, उसे सबको मान्य होना चाहिये। प्रदेश में यूपी बोर्ड की परीक्षा को लेकर राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में नकल के साथ बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। यहां पर नकल की बीमारी लंबे समय से और बड़े पैमाने पर है। समय-समय पर झूठे सर्टिफिकेट भी दिये गये हैं, लेकिन अब नकल बन्द हुई है, यह सरकार का बेहद सराहनीय कार्य है।

राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि महरेंव में जो कार्य हुआ है इससे बलिया एक नया इतिहास रचेगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा लोगों को एकात्म मानव दर्शन का संदेश देगी। यह कार्य भूषण की तरह है। प्रतिमा अनावरण के बाद आयोजित सभा में उपस्थित हजारों की भीड़ को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि 25 जनवरी 1916 को जन्मे पंडित जी की 11 फरवरी 1968 को मौत हो गई। 52 वर्ष की उम्र में ही वे दुनिया से चले गए। मुगलसराय में रेलवे ट्रैक पर उनका शव मिला था। तब वह जनसंघ के अध्यक्ष थे। उनकी मौत के बाद भी उनके विचार मिटे नहीं। आज भी उनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। राज्यपाल ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कश्मीर में संदेहास्पद मौत हो गई थी। रेल व जेल में हुई मौत का तत्कालीन सरकारें खुलासा नहीं कर सकीं, जो असफलता रही। उनकी मौत के बाद राजनीतिक विशेषज्ञों ने लिखा कि अब जनसंघ का विघटन हो जाएगा, लेकिन हुआ इसके उलट।

अपनी किताब चरैवती, चरैवती का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इसके पीछे भी पंडित जी के विचार हैं, जिनसे प्रेरित होकर इसकी रचना की गई। चरैवती-चरैवती संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है चलते रहो। चलते रहो। राज्यपाल ने कहा कि जो बैठा उसका भाग्य बैठ गया, जो सो गया उसका भाग्य सो गया, जो खड़ा हुआ उसका भाग्य खड़ा हो गया और जो चलता रहा उसका भाग्य भी चलता रहा। इसलिए चलते रहो, चलते रहो, चलते रहो। उन्होंने दूसरा उदाहरण देते हुए कहा कि मधुमक्खियां एक फूल से दूसरे फूल पर जाती हैं, पक्षी एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाते हैं, सूर्य सुबह से शाम तक चलता रहता है उसी तरह मनुष्य को चलते रहना चाहिए। परिश्रम करते रहना चाहिए।

राज्यपाल ने पंडित जी के विचारों की शक्ति का अहसास कराने के लिए स्वयं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मुंबई में अधिकांश सांसद दोबारा चुनाव नहीं जीत पाए। वहीं उनके विचारों के बल पर वे तीन बार विधायक और पांच बार सांसद चुने गए। इसके बाद राज्यपाल की कुर्सी तक पहुंचे।

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