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तक्का तंत्रः बालू की लूट में माफिया मस्त, अधिकारी बेबस


🗒 बुधवार, अक्टूबर 28 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
तक्का तंत्रः बालू की लूट में माफिया मस्त, अधिकारी बेबस


क्रासरः हर अधिकारी की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखते है तक्के
क्रासरः तक्कों की सूचना पररोजाना करोडों के राजस्व की होती है चोरी
क्रासरः कार्यवाही की जानकारी होने पर नहीं गुजरते ट्रक, खनन होता है बंद

बांदाः जनपद में बालू खदानों में लूट शुरू हो चुकी है। वर्तमान में आधा दर्जन से अधिक बालू खदानें संचालित की जा रही है। जिनसे हजारों की संख्या में बालू से भरे ओवरलोड ट्रक अन्य जनपदों को बालू पहंुचाते है। मगर इस पूरे खेल में रोजाना करोडों के राजस्व की चोरी की जाती है। राजस्व की चोरी का पूरा खेल तक्कों के माध्यम से खेला जाता है। अधिकारियों के घरों, दफ्तरों में कडी नजर रखने वाले तक्के उनके पूरे रूट की जानकारी खदान संचालकों व गाडी मालिकों को देते है। जिसके बाद रोजाना बिना रवन्ना के हजारों ट्रक बालू निकाली जाती है। वहीं जनपदस्तरीय अधिकारी हाथ मलते रह जाते है। कार्यवाही ने नाम पर पांच-दस गाडियां पकडकर उनके जुर्माना तक ही कार्यवाही कर अधिकारी अपने दायित्वों की इतिश्री कर लेते है।
ज्नपद की बालू खदानें सोना उगलती है। जिसकी लूट में व्यवसायी, माफिया, नेता तथा पुलिस सभी उपर से नीचे तक शामिल रहते है। सोना उगलने वाली बालू खदानों में भारी भरकम मशीनरी के जरिये दिनरात नदियों का दोहन किया जाता है। लगभग चार महीने बाद आधा दर्जन से अधिक बालू खदानों को संचालित कराने का आदेश खनिज विभाग द्वारा जारी किया गया है। जिसके बाद एक बार फिर से बालू को लेकर हर तबके में मारामारी मच गयी है। भारी भरकम मशीनरी के द्वारा नदियों से बालू निकाल कर उसे बाहरी जनपदों में भेजा जाता है। उपरी तौर पर देखा जाये तो यह व्यवसाय का हिस्सा नजर आता है। मगर इसकी काली सच्चाई कुछ और ही है। अवैध रूप से संचालित की जाने वाली खदानों तथा दिनरात गुजरने वाले बिना रवन्ने के ओवरलोड ट्रकों पर कार्यवाही का न होना इस काली कारनामें को उजागर करता है। बालू के काले खेल में सबसे ज्यादा अहम रोल निभाने वाले लोकेशन बाज है। जिन्हें तक्का के रूप में भी संबोधित किया जाता है। यह तक्के ही है जो पूरे जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में फैलकर बालू माफियाओं को पल पल की सूचनाएं मुहैया कराते है। तक्कों का तंत्र जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, खनिज अधिकारी तथा अन्य जनपदस्तरीय अधिकारी की हर पल की जानकारी माफियाओं तथा गाडी मालिकों को उपलब्ध कराते है। तक्कों के इशारों पर ही नदियों में अवैध खनन कराया जाता है तथा इन्हीं के इशारों पर गाडियों को लोड कराकर बाहरी जनपदों के लिए निकाला जाता है। सूत्रों की मानें तो तक्कों का गैंग हर जिम्मेदार अधिकारी की पल पल की जानकारी मैसेज या मोबाइल फोन के माध्यम से बालू माफियाओं को उपलब्ध कराते है। जिसके बाद यदि अधिकारी छापा भी मारें तो उन्हें केवल हाथ मलने के अलावा कोई चारा न बचे। बिना रवन्ना बालू निकासी के कारण रोजाना करोडों रूपयों का राजस्व को नुकसान होता है। लेकिन अधिकारियों के पास इसका कोई हल नहीं है। वहीं लखनऊ में बैठे आलाधिकारियों की भी जानकारी तक्कों द्वारा हर समय उपलब्ध करायी जाती है। जिससे तक्कों का यह नेटवर्क पूरे राज्य की बानगी बयां करता है।


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बालू माफियाओं द्वारा की जाती है करोडों के राजस्व की चोरी
बांदाः बालू खदानों से बिना रवन्ने के प्रतिदिन हजारों ओवरलोड ट्रक गुजारे जाते है। जिससे सीधे तौर पर रोजना करोडों रूपयों की राजस्व चोरी होती है। मानक के अनुसार बालू निकालने पर रवन्ना जारी किया जाता है। मगर तक्कों के माध्यम से मिलने वाली सूचनाओं पर बालू माफियाओं द्वारा बिना रवन्ने के हजारों गाडियां निकाली जाती है। जिससे सरकार को प्रतिदिन करोडों के राजस्व का नुकसान होता है। वहीं बालू संचालक खदान में अवैध खनन कराकर अपनी काली कमाई को दिन दूना रात चैगनी बढा रहे है।

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गाडी निकासी पर वसूलते है 1 से 5 हजार रूपये
बांदाः नदियों में अवैध खनन या अवैध परिवहन, सभी तक्कों के इशारों पर ही होता है। अधिकारियों के पल पल की जानकारी बालू माफियाओं तथा गाडियों के मालिकों को उपलब्ध कराने के एवज में तक्कों के द्वारा प्रति गाडी एक हजार से पांच हजार रूपयों तक की वसूली की जाती है। रकम में विभिन्नता की वजह है यह है कि एक हजार में बालू खदान से मेन रोड तक कार्यवाही न होने की जिम्मेदारी ली जाती है। इसी प्रकार पांच हजार रूपयों में जनपद से गाडियों के गंतव्य तक की जिम्मेदारी तक्कों के द्वारा ली जाती है। पैसों का हिसाब किताब तक्कों द्वारा ज्यादातर नगद किया जाता है। क्योंकि यदि राह में कोई दिक्कत हुयी तो दूसरी बार में उसकों चुकता किया जा सके।

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अधिकारियों पर हमले से भी नहीं चूकते तक्के
बांदाः तक्कों की ताकत का अंदाजा इस बात पर लगाया जा सकता है कि वह आलाधिकारियों पर जानलेवा हमला करने पर भी गुरेज नहीं करते। बीते दिनों तक्कों के द्वारा ऐसी ही घटनाएं की गयी है। मुख्यालय के समीप स्थित गंछा बालू खदान पर अवैध खनन की जानकारी मिलने पर खनिज अधिकारी सुभाष सिंह द्वारा वहां पर रात के समय छापा मारा गया। अधिकारी द्वारा छापें की जानकारी होते ही आधा सैकडा से ज्यादा तक्के तथा बालू माफियाओं के गुर्गाें ने खनिज अधिकारी पर जानलेवा हमला कर दिया। जिसमें खनिज अधिकारी किसी प्रकार अपनी जान बचा पाये। इसी प्रकार अवैध खनन का विरोध करने पर नरैनी विधायक राजकरण कबीर पर भी तक्कों की शह पर बालू माफियाओं के गुर्गाें ने हमला किया। जिसमें वह बाल बाल बचें।
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तक्के बने करोडों के मालिक
बांदाः बालू खदानों में तक्कों की भर्ती का खेल बहुत पुराना नहीं है। बावजूद इसके ज्यादातर तक्कों ने कम ही समय में करोडों की संपत्ति बना ली है। सूत्रों की मानें तो अधिकारियों के लोकेशन के एवज में रोजाना करोडों का वारा-न्यारा होता है। जिसकों तक्कों द्वारा आपस में बांट लिया जाता है। बताया कि तक्कों की पूरी इंट्री दिनवार की जाती है। जनपद के प्रत्येक बालू खदान तथा यहां से निकलने वाले बालू भरे ट्रकों की जानकारी नोट होती है। जिससे हिसाब में किसी प्रकार की कोई गडबडी न पाये। एक-एक तक्के की एक रात की कमाई बीस से पच्चीस हजार रूपयें की होती है। जिससे कम समय में ही यह करोडों की संपत्ति के मालिक बन बैठे है।