कुलपति ने की पराली न जलाने की अपील

यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

कुलपति ने की पराली न जलाने की अपील


🗒 शुक्रवार, अक्टूबर 30 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
कुलपति ने की पराली न जलाने की अपील


क्रासरः जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर वैज्ञानिकों ने दिये किसानों को बेहतर सुझाव

बांदाः देश में साठ प्रतिशत लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है। वैज्ञानिकों द्वारा नित नये प्रयोग एवं तकनीकी प्रसार के माध्यम से कृषि को और सुदृण बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी को अपनाने तथा उससे संबंधित जागरूकता लाने का भी प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई द्वारा गोद लिए गांव मवई बुजुर्ग में वैज्ञानिकों द्वारा रबी फसल की बुआई से पहले पराली न जलाने की अपील की गयी।
राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एक के कार्यक्रम अधिकारी व सहायक प्राध्यापक डा ओम प्रकाश ने राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत गोद लिए गांव मवई बुजुर्ग में इसके लिए कृषकों से संवाद स्थापित कर उचित कारगर उपाय तथा प्रबंधन कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया। वैज्ञानिकों का मुख्य उद्देश्य, उससे होने वाले मृदा, वातावरण तथा जीव जंतुओं के स्वास्थ्य पर होने वाले हानिकारक प्रभाव के बारे में बताना तथा जागरूक करना था। विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा किसानों से पराली न जलाने के लिए एक नारा पराली नहीं जलायेंगे, हरियाली को बचायेंगे का संकल्प दिलाया। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा यूएस गौतम ने कृषकों से अपील की कि अपने खेत में पराली का प्रबंधन कंपोस्ट व केंचुआ खाद बनाने के रूप में करें। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन हेतु वेस्ट डिकम्पोजर अच्छा कार्य करता है। कृषकों को इसे अपनाना चाहिए। राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के नेतृत्व में चलाये जा रहे कोविड 19 एवं पराली न जलाने की अपील जागरूकता कार्यक्रम के सफलता पूर्वक कार्य करने पर वैज्ञानिकों को बधाई भी दी। राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा मवई बुजुर्ग गांव में कोविड 19 शिविर का भी आयोजन किया गया। वर्तमान वैश्विक कोरोना महामारी के दृष्टिगत जागरूकता एवं जानकारी ही बचाव का सर्वाेत्तम तरीका है। शहरी क्षेत्र या ग्रामीण क्षेत्र हो इसकी भयावहता बराबर है। जनमानस में इस बीमारी के प्रति जागरूकता ही बचाव का प्रमुख साधन हो सकता है। टीम द्वारा ग्राम चहितारा में जागरूकता के साथ साथ मास्क का भी वितरण किया गया। कार्यक्रम समन्वयक डा एके चैबे, अधिष्ठाता छात्र कल्याण केएस तोमर, कार्यक्रम अधिकारी डा ओमप्रकाश, ग्राम प्रधान गिरिजा देवी एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामकिशोर सिंह के नेतृत्व में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं, बुजुर्गाें एवं बच्चों को मास्क लगाने हेतु प्र्रेरित करते हुए मास्क की महत्ता एवं कोविड 19 महामारी से आत्मसुरक्षा की जानकारी दी। इस दौरान ग्रामीणों को बीमारी से बचाव हेतु किये जाने वाले कार्याें के विषय में जानकारी दी।

 

बांदा से अन्य समाचार व लेख

» बांदा में रेलवे पटरी किनारे मिला शिक्षामित्र का शव

» शादी का झांसा देकर छात्रा के साथ दुष्कर्म

» घरेलु कलह के चलते किराना व्यापारी ने गटका सल्फास, मौत

» सीएमओ के आश्वासन के बाद किसान यूनियन का धरना समाप्त

» चोरी मोबाईल व अवैध तमंचे सहित अभियुक्त गिरफ्तार