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बांदा-मां-शिशु की उचित देखभाल के लिए 48 घंटे अस्पताल में रुकना जरूरीः डा. पांडे


🗒 शनिवार, नवंबर 21 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
बांदा-मां-शिशु की उचित देखभाल के लिए 48 घंटे अस्पताल में रुकना जरूरीः डा. पांडे

मां-शिशु की उचित देखभाल के लिए 48 घंटे अस्पताल में रुकना जरूरीः डा. पांडे
- छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराएं
- नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत आयोजन

बांदा। प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं। प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना जरूरी है और छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराया जाए। जन्म के बाद नवजात का संपूर्ण टीकाकरण उसके सेहत के लिये बहुत जरूरी है। इसे नियमित रूप से पालन करना चाहिए। यह बातें शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. पीके पांडे ने नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत जिला महिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती व प्रसूताओं से कहीं।
उन्होंने कहा कि नवजात की नाभि सूखी एवं साफ रखें, संक्रमण से बचाएं और मां व शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ख्याल रखें। कम वजन और समय से पहले जन्में बच्चों पर विशेष ध्यान की जरूरत होती है। शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर की विधि उपयुक्त होती है। शिशु को स्तनपान कराते रहें क्योंकि कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए केवल मां का दूध सर्वोत्तम होता है। क्वालिटी मैनेजर डा. प्रमोद सिंह ने कहा कि एक नवजात शिशु को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए, अर्थात 24 घंटों में उसे 8-12 बार स्तनपान कराने की आवश्यकता होती है। शिशु को कम से कम 10 मिनट के लिए स्तनपान कराएं।
उन्होंने कहा कि नवजात का बार-बार डायपर बदलना एक महत्वपूर्ण पहलू है। शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिलने पर वह नियमित रूप से मल त्याग करेगा, नियमित समय बाद उसका डायपर बदलना जरूरी है। नवजात शिशु को शुरुआत के महीनों में प्रतिदिन लगभग 16 घंटे नींद की आवश्यकता होती है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है तो नींद की अवधि कम होती जाती है। शिशु के साथ खेलते समय उसे जोर से न हिलाएं व हवा में उछाले नहीं क्योंकि उसके आंतरिक अंग नाजुक होते हैं और तेज झटकों से उसे नुकसान हो सकता है। इस दौरान परामर्शदाता ममता कुशवाहा, एएनएम करुना रत्नाकर, अर्चना गुप्ता, रमेशचंद्र सहित स्टाफ मौजूद रहा।