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बांदा-लाकडाउन की बंदिशें तोड़ घर से निकल रहे लोग


🗒 बुधवार, मई 05 2021
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
बांदा-लाकडाउन की बंदिशें तोड़ घर से निकल रहे लोग


क्रासरःचैराहों पर नजर नहीं आ रही है खाकी, बिल्कुल भी सख्ती नहीं

बांदा। पिछली बार कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने लाकडाउन का बहुत ही शिद्दत से पालन किया। अब जबकि कोरोना महामारी की दूसरी लहर बहुत ही घातक साबित हो रही है, ऐसे में लोग बिल्कुल भी परवाह नहीं कर रहे हैं। आखिर करें भी तो क्या। लोगों का कहना है कि पिछली बार लाकडाउन के दौरान किसी तरह से जीवन गुजारा था, अभी तक संभल ही नहीं पाए थे कि दोबारा कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ गया और चंद दिनों में ही पेट भरने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लाकडाउन के तीसरे दिन सोमवार को भी लोग हमेशा की तरह अपने घरों से बाहर निकले और अपने काम को अंजाम देने के बाद घर वापस लौटे। यह बात दीगर रही कि घर से निकलने वालों की संख्या काफी कम नही। कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए लाकडाउन ही शासन और प्रशासन के बाद एक मात्र ब्रम्हास्त्र बचता है। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात तो यह है कि पिछली बार की तरह इस बार पुलिस चैराहों पर नजर नहीं आ रही है। आवागमन करने वालों को न रोका जा रहा है और न ही टोका जा रहा है। पूरा दिन सड़कों पर चार पहिया और दोपहिया वाहन दौड़ रहे हैं। यह बात दीगर है कि प्रतिष्ठानों में ताले लगे हुए हैं लेकिन लोग जुगत भिड़ाकर जरूरत का हर सामान खरीद रहे हैं। लोगों का कहना है कि लाकडाउन पता नहीं कब तक चलेगा, कोरोना महामारी का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कहा कि कोरोना महामारी के दौरान अगर घरों में ही बैठे रह गए तो पेट भरना मुश्किल हो जाएगा। इधर शासन और प्रशासन की ओर से भी लाकडाउन के दौरान फिलहाल नरमी बरती जा रही है। शायद इसीलिए न तो प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लाकडाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए कोई कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं।

 

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