यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

बरेली में निर्भया कांड जैसी वारदात करने वाले दो आरोपियों को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा


🗒 शुक्रवार, जनवरी 10 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

करीब चार साल पहले बरेली में हुई निर्भया कांड जैसी वारदात के दोनों आरोपितों को स्थानीय कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी है। कोर्ट ने मामले में फैसला आठ जनवरी को ही सुरक्षित कर लिया था, जिसे शुक्रवार दोपहर को कोर्ट ने सुनाया। इस मामले में पीड़ित परिवार और गवाह लगातार चार साल से न्याय पाने के लिए डटे हुए थे।करीब चार साल तक चले इस मामले को निर्णय तक लाने में एक नहीं कई अड़चनें आईं। कभी परिजनों तो कभी गवाह को धमकी, लेकिन न गवाह डिगे न परिजन। विवेचक, पुलिस और वकील सभी अपनी अपनी भूमिका रही। इंसाफ की चाह ही थी जो इसे फैसले तक ले आई। अब सबको इंतजार है तो दोषियों को ऐसी सजा मिलने का जो दरिंदगी करने वालों में खौफ पैदा करे।29 जनवरी 2016 की वह शाम जब अंधेरा हो गया था और बिटिया घर नहीं पहुंची थी। परिजन तलाशने निकले तो खेत में उसका शव मिला। शव देखने वालों ने उसी वक्त अंदाजा लगा लिया था कि हुआ क्या है। पुलिस आई शव पोस्टमार्टम को गया। रिपोर्ट आई तो सबके होश उड़ गए। बच्ची के साथ दरिंदगी की गई थी। उसके प्राइवेट पार्ट में लकड़ी मिली थी, कई चोट के निशान थे। पुलिस ने आरोपितों की तलाश की तो काफी प्रयास के बाद भी नहीं मिले। इसी दौरान गांव के रामचंद्र ने पुलिस को बताया कि मुरारीलाल व उमाकांत उससे मदद मांगने आए थे। वह पुलिस से बचाने की बात कह रहे थे। यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। पूछताछ में घटना कुबूल कर ली। दोनों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।तत्कालीन सीओ नरेश कुमार ने मामले की जांच की। इसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट अपराध को जघन्य बता रही थी। इसमें पीड़िता की दादी, मां के अलावा रामचंद्र गवाह बने। इस मामले में 2017 में चार्जशीट लगा दी गई थी। लेकिन अदालत में यह मामला अब तक चलता रहा।इसमें कई बार गवाही का ही पेंच फंसा। तत्कालीन इंस्पेक्टर आर्यन सिंह और सीओ नरेश कुमार को भी तबादला हो चुका था। वहीं दादी व एक अन्य गवाह को डराने की कोशिश हुई। एक अन्य गवाह तो अदालत में अपने बयानों से पलट भी गया था। दूसरे गवाह यानी रामचंद्र को पुलिस ने सुरक्षित रखने का भरोसा दिया तो वह गवाही देने को तैयार हुए।डीजीपी ओपी सिंह ने इस मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने वर्तमान इंस्पेक्टर गौरव सिंह और डीआइजी राजेश पांडेय को लखनऊ बुलाया था। अभियोजन अधिकारी के साथ बैठकर इस पर चर्चा हुई। तत्कालीन सीओ और इंस्पेक्टर को बयान दर्ज कराने बुलाया गया। गवाह रामचंद्र को सुरक्षा देने का भरोसा दिया गया। उसकी ओर से धमकी देने का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद पीड़िता की मां और रामचंद्र की गवाही के आधार पर दोनों आरोपितों को दोषी पाया गया।

बरेली में निर्भया कांड जैसी वारदात करने वाले दो आरोपियों को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

बरेली से अन्य समाचार व लेख

» देश को आजाद होने के बावजूद 2014 में मिली वैचारिक आजादी - ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा

» बरेली में अस्पताल से क्वारंटाइन किए गए 16 मरीज भागे, 11 पकड़े गए, पांच के खिलाफ मुकदमा

» बरेली पुलिस पर हमला करने के बाद भागे उपद्रवियों का इलाज, पुलिस ने जमकर तोड़ा

» कमलेश तिवारी की हत्या कांड मे हत्यारोपितों की मदद करने के मामले में एक और गिरफ्तार

» चिन्मयानंद प्रकरण मे छात्रा के पिता बोले, यूपी में पकड़ी गई होती मेरी बेटी तो उसे मार डालते

 

नवीन समाचार व लेख

» 27 जून को एक साथ घोषित होगा हाईस्कूल व इंटर परीक्षा का परिणाम

» अब लोहिया-PGI में कोरोना जांच के लिए देना होगा शुल्क

» उत्तर प्रदेश पुलिस की आपात सेवा 112 के गाजियाबाद उपकेंद्र में भी 11 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव

» तकनीकी क्षेत्र में भारतीय युवाओं ने इतिहास रचा - केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक

» सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा- कहां पर किसको रोजगार मिला, सरकार के पास नहीं है आंकड़ा