भदोही में पांच बच्चों को गंगा में डुबाने वाली आरोपित मां को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा

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भदोही में पांच बच्चों को गंगा में डुबाने वाली आरोपित मां को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा


🗒 सोमवार, अप्रैल 13 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
भदोही में पांच बच्चों को गंगा में डुबाने वाली आरोपित मां को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा

जहांगीराबाद गांव में ममता को कलुषित कर पांच बच्चों को गंगा में डुबाने की घटना ने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। सोमवार को दो बच्चों का शव गंगा में उतराया मिला जबकि एक की तलाश जारी है। रविवार को दो शव मिल चुका थ। पोस्टमार्टम के बाद एक साथ चार बच्चों का शव गांव में पहुंचते ही हर आंखे नम हो गई। गांव में मातमी सन्नाटा छाया रहा तो घरों में चूल्हे नहीं जले। वहीं आरोपित मां मंजू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।गोपीगंज थाना क्षेत्र के जहांगीराबाद में मृदुल उर्फ मुन्ना यादव की पत्नी मंजू यादव अपने पांच बच्चों को गंगा में डूबा दिया था। घटना को लेकर एक बारगी लोगों को एक साथ बच्चों को गंगा में डुबाने पर विश्वास नहीं हो रहा था। गांव के हर किसी के जेहन पर सवाल कौंध रहा था लेकिन देर शाम सबसे बड़ी पुत्री वंदना और रंजना का शव मिलने से घटना की पुष्टि हो गई। पुलिस ने आरोपित महिला मंजू को हिरासत में ले लिया और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। सोमवार को दूसरे दिन शिवशंकर और पूजा का क्षत-विक्षत शव गंगा में उतराया मिला। इसके साथ ही अभी सबसे छोटे पुत्र संदीप के शव की तलाश जारी है। देर शाम एक साथ गांव में चार बच्चों का शव पहुंचते ही कोहराम मच गया। दादी मालती का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बच्चों का शव देख गांव की महिलाएं भी अपने को नहीं रोक सकीं। पिता मृदुल भी शव से चिपक गया। उसे किसी तरह से परिवार के अन्य सदस्यों ने शांत कराया।कोतवाली गोपीगंज में बेसुध मां अपने किए पर पछतावा कर रही है। सोमवार को उसका पति मृदुल भी चाय लेकर कोतवाली में गया था। घटना के कारणों के संबंध में कई बार सवाल किया लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। वह बार-बार यही कह रही थी कि वह खुद मरना चाहती है। जब उसके बच्चे नहीं हैं तो उसका जीवन भी बेकार है।जहांगीराबाद गांव में एक साथ पांच बच्चों को गंगा में डुबाने की घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पांच बच्चों को एक साथ रात में गंगा घाट पर कैसे ले गई। यदि बच्चों की पिटाई भी की होती हो वह रोते-बिलखते घाट पर पहुंचते। गंगा घाट पर रात में धीरे से निकली आवाज भी बहुत तेज सुनाई देता है। घाट पर ही बस्ती है। कोई सुनता या न सुनता घाट पर पहले ही मछली मार रहे मछुआरे तो बच्चों को रोने की आवाज सुनते। बहरहाल पुलिस गृह कलह को मानकर मामले को रफा-दफा भले ही कर दी लेकिन पूरी कहानी किसी को पच नहीं रही है। जितने मुंह उतने सवाल उठ रहे हैं। 

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