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चंदौली मे खाक छानती रही NDRF की टीम, युवाओं ने चार महिलाओं के शव किए बरामद


🗒 सोमवार, मार्च 02 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
चंदौली मे खाक छानती रही NDRF की टीम, युवाओं ने चार महिलाओं के शव किए बरामद

धीना थानाक्षेत्र के महुजी गांव के समीप हुए नाव हादसे के तीसरे दिन सोमवार को ग्रामीण युवाओं ने चार शवों को बरामद कर लिया। जबकि एनडीआरएफ की टीम खाक छानती रही। पुलिस ने शवों को कब्जे में ले लिया। शनिवार की शाम गाजीपुर से मजदूरी कर वापस लौट रहे 40 मजदूरों से भरी नाव गंगा में डूब गई। इससे अफरातफरी मच गयी थी। पुरुषों ने तो किसी तरह तैरकर अपनी जांच बचाई लेकिन पांच महिलाएं लापता थीं। मौके पर गोताखोरों और एनडीआरएफ की टीम को शव ढूंढने में लगाया गया था।रविवार को एक बालिका का शव बरामद किया गया। जबकि चार महिलाओं का पता नहीं चला। सोमवार को साहस का परिचय देते हुए महुजी गांव के कुछ युवक गंगा में कूदे। युवकों ने जहां नाव डूबी थी वहीं से बीरा सराय गांव निवासी ज्योति (10), फूलमती (60), कविता (15) और महुजी निवासी उर्मिला (30) का शव काफी मशक्कत के बाद बरामद कर लिया। शव पानी से बाहर आते ही कोहराम मच गया। परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया है।उत्तर प्रदेश सरकार ने नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए बीते वर्ष एक ठोस कदम उठाया। सरकार ने राज्य में सभी जिलों को निर्देश दिया कि नावों को हल्के पीले रंग से रंगे जाने और उन्हें एक संख्या आवंटित किया जाए। नाव और नाविकों के बारे में जानकारी पंचायत और जिला स्तर पर पंजीकृत हो। पंचायत के पास नावों का औचक निरीक्षण करने तथा क्षमता से अधिक भार ले जाने से रोकने का भी अधिकार दिया। लेकिन ये महज कागजों तक ही सिमट कर रह गया। प्रदेश सरकार ने तीन महीने तक जागरूकता अभियान कार्यक्रम शुरू करने की योजना चलाने को कहा था लेकिन ये योजनाएं यहां तक पहुंची ही नहीं या फिर कागजी खानापूर्ति कर दी गई, यह बड़ा सवाल है। आए दिन हो रहे नाव हादसों के बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे। उधर किराए के लालच में नाविक भी अपनी नाव की स्थिति जानते हुए भी दोगुना सवारियां भर लेते हैं। हादसे के बाद जिनके सदस्य साथ छोड़ देते वे ङ्क्षजदगी भर किस्मत को दोष देते हैं। शनिवार की देर शाम नाविक की लापरवाही गरीब मजदूरों पर भारी पड़ी। गंगा में डूबे चार लोगों का शव दूसरे दिन भी बरामद नहीं हो सका है। गाजीपुर जिले के मल्लरपुर के मल्लाह की नाव दस वर्ष पुरानी थी। नाव की मरम्मत जरूर की गई थी लेकिन कई स्थानों पर नाव जर्जर थी। उसकी क्षमता 25 सवारियों की थी लेकिन 40 लोग बैठाए गए थे।

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