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चित्रकूट के डकैत जिलालाल को सात साल की कैद


🗒 शनिवार, सितंबर 04 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
चित्रकूट के डकैत जिलालाल को सात साल की कैद

चित्रकूट, । जेल में बंद डकैत जियालाल कोल को विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट ने सात साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की  सजा सुनाई है। वह मारे गए डकैत शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ गैंग का सदस्य है। जिलालाल के जुर्म कुबूल करने और सजा के बाद ददुआ के पुत्र सपा के पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल और भाई पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वह भी इस मामले में आरोपित हैं। गैंग के सदस्य बताए गए हैं।सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सनत कुमार मिश्रा ने बताया कि निरीक्षक अभय प्रताप मल्ल ने 15 सितंबर 2007 में रैपुरा थाना में लिखित सूचना दी कि उनके द्वारा अपहरण व हत्या के मामले की विवेचना की जा रही है। विवेचना में शंकर कोल, जिलालाल कोल, गुड्डा कोल, वीर सिंह, बाल कुमार पटेलस, मुन्ना सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह रमाशंकर पटेल उर्फ नेता, महेश कुमार पटेल, सोनू पटेल, कुलदीप, रामनारायण उर्फ सेठ, सरवन पटेल, सुलखान सिंह, रामलाल पटेल उर्फ आचार्य, राजूकोल, गिरजाशंकर मुंशी, सूरजभान पटेल, सुबेदार सिंह उर्फ राधे, रधुनंदन पाठक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हुए हैं। सभी घटना में शामिल पाए गए हैं। कुछ लोग शिवकुमार ददुआ गैंग पंजीकृत है। ददुआ के मारे जाने के बाद गैंग की कमान उनका पुत्र वीर सिंह ने संभाल ली है। इस घटना में शामिल सभी संगठित गिरोह के सदस्य हैं। जिनके क्रिया कलाप समाज विरोधी व अनैतिक है। इसलिए गैंग धारा के अभियोग पंजीकृत किया जाए। उन्होंने बताया कि दो अक्टूबर 2008 को विवेचक ने सभी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय ने 22 नवंबर 2008 को संज्ञान में लिया। वीर ङ्क्षसह, अरुण कुमार, कुलदीप, गिरजाशंकर, सूरजभान, रमाशंकर सिंह, रामलाल पटेल, सरवन, रामनारायण, सोनू पटेल, सुलखान सिंह, रघुनंदन व महेश की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने 12 दिसंबर 2019 को आदेश पारित किया और जिलालाल कोल, गुड्डा कोल और शंकर कोल से पृथक कर दिया।सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिलालाल कोल जेल में बंद ने जुल्म स्वीकार का प्रार्थना पत्र कोर्ट में दो सितंबर को दाखिल किया। जिस के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने रगौली जिला जेल में बंद डकैत जियालाल कोल को गिरोहबंद व समाज विरोधी कार्यों में दोषी मानते हुए सात वर्ष के कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न अदा करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास आरोपित को भुगतना होगा।