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किराना कारोबारी ने फांसी लगाकर जान दी


🗒 रविवार, दिसंबर 26 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
किराना कारोबारी ने फांसी लगाकर जान दी

देवरिया , । देवरिया शहर में जलकल रोड पर रहने वाले किराना व्यवसायी धनेश जायसवाल उर्फ मिंटू उम्र 36 वर्ष पुत्र गंगा सागर जायसवाल ने 26 दिसंबर की रात सब्जी मंडी स्थित दुकान में फांसी लगाकर जान दे दी। उन्होंने तीन पेज का सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें कर्ज में डूबे होने के कारण आत्महत्या करने की बात कही है। कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है।किराना व्यवसायी धनेश जायसवाल रोज की तरह 25 दिसंबर को सुबह दुकान खोली थी। उसके बाद घर नहीं गए। रात में करीब नौ बजे पत्नी को फोनकर कहा कि मैं खाना खाकर घर आऊंगा। उसके बाद स्वजन उनके आने की प्रतीक्षा करने लगे लेकिन रात करीब 11 बजे तक घर नहीं आने पर स्वजन परेशान हो गए। उनको खोजने लगे। रात में करीब डेढ़ बजे किसी ने सब्जी स्थित किराना दुकान का शटर थोड़ा सा खुला होने की जानकारी दी। साथ ही बिजली जलने की बात बताई।उसके बाद स्वजन दुकान पर पहुंचे। शटर उठाने पर देखा कि वह फांसी के फंदे पर झूल रहे हैं। उसके बाद उन्हें नीचे उतारा गया व जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस जांच में जुट गई। मृतक तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह ने बताया कि किराना व्यवसायी ने फांसी लगाकर जान दी है। तीन पेज का सुसाइड नोट मिला है।व्यवसायी ने पत्नी प्रियंका को संबोधित डायरी के तीन पन्ने पर सुसाइड नोट लिखा है। उन्होंने कहा है कि मैं जो यह कदम उठाने जा रहा हूं वो मुझे नहीं करना चाहिए। लेकिन क्या करूं। मेरी मजबूरी बहुत है। ना आगे का रास्ता सूझ रहा है और न पीछे का। पिछले दो सालों से लगातार नुकसान होता जा रहा है। महीने का कम से कम 60 हजार खर्च है तो 30 से 35 हजार रुपये आमदनी। जिसके कारण दो से चार लाख रुपये कर्ज भी हो चुका है। दुकान नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। भविष्य भी अंधकारमय दिख रहा है। हम जानते हैं कि मेरे जाने के बाद तुम्हारा और बच्चों की जिंदगी खराब हो जाएगी। पर क्या करूं। मेरी मजबूरी है।भैया का एहसान मुझ पर बहुत रहा है। आखिरी एहसान यह करिएगा कि मेरी पत्नी और बच्चों का आखिरी सांस तक ख्याल रखिएगा। यह जिम्मेदारी आपको सौंपकर जा रहा हूं। जिंदगी में पैसे का होना बहुत जरूरी है। उसके बिना इंसान तक एक कदम नहीं चल सकता। रही बात दुकान का तो चार लाख रुपये कर्ज है। डेढ़ लाख बाकी का पाना है। करीब ढाई लाख की पूंजी होगी। इससे आदान प्रदान हो जाएगा। सारा डिटेल रजिस्टर में है। माता-पिता से माफी भी मांगी है।

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