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पिछली सरकार के कार्यो की तुलना पर पिछले70 साल की दुहाई आखिर कब तक


🗒 शनिवार, सितंबर 28 2019
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड

देश की गिरती अर्थव्यवस्था इस बात पर सोचने को निर्भर करती है कि आखिर हम कहां कमजोर पड़ रहे हैं हमारी जीडीपी क्यों कम हो रही है इस पर चिंतन आवश्यक होना चाहिए वर्तमान सरकार का लेकिन हमें लगता है कि सरकार का ध्यान इस ओर ना जाकर के विपक्षी राजनीतिक सियासी दाव पेच पर टिका हुआ है। सियाशत के दांव पर टिका हुआ है। देश जानता है कि पिछले 70 सालों में  कई पार्टिया मिलकर कभी अकेले के बहुमत पर और समय से साथ कभी मिलकर देश की सियासत   में सत्तारूढ़ हुई शासन किया देश की बागडोर उनके हाथों में रही और देश काल परिस्थिति के अनुसार कार्य भी किया गया, या किया होगा,उनकी भी अपनी कोई नीति रही होगी या होती है भारत की जनता ने चुना था अपने विकाश के लिए राष्ट्र की रक्षा के लिए ,एक आशा और उम्मीद के साथ है की ये सत्ताधारी शाशक मजबूत राष्ट्र निर्माण, व राष्ट्र के विकाश में राष्ट्र हित मे शासन करेगे ,  परन्तु उनकी नीतियों शाशन प्रणाली में  कमियां रही जिससे विकाश को गति न मिली भ्रष्ट्राचार देश मे व्याप्त हुआ,

पिछली सरकार के कार्यो की तुलना  पर पिछले70 साल की दुहाई आखिर कब तक

  सत्य है कि वह  शासन प्रणाली राष्ट्रवादीता भारत मां के अभूतपूर्व सम्मान भारत की प्रगति अखंडता एकता के प्रति समपूर्ण रूप से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन न किया हो या वर्तमान नीतियों और परिस्थिति के चलते  कम जिम्मेदारी का निर्वहन किया हो,या कर पाई हो,, हम मानते हैं,,,,,,, लेकिन पहले80 के दसक  में  कहीं ना कहीं प्रत्यक्ष या अप्रक्ष्य रूप में कुछ न कुछ हिस्सेदारी के साथ आपका संगठन था, आपके बिद्धजीवियो की पक्ष या विपक्ष में  सहभागिता रही हो या ना रही हो खैर वो सब छोड़िये ,,,,, 

 और इधर 6 वर्षों से आप ही हैं आज आप सत्तारुढ़ हैं आप राष्ट्रवाद के कट्टर समर्थक हैं भारत के राजधर्म के लिए  राष्ट्र निर्माण के लिएभारत भूमि के आन बान शान के लिए आप की नीतियां कर्तव्य पथ पर अडिग हैं यह सत्य है और पूरा देश मानता है पर क्या इतने पर भी आप पिछले 70 वर्षों की सियासत का जोर देते रहेंगे इन्हीं मुद्दों पर आप सियासत के पहिये से देश के तमाम विकसित या विकासशील मुद्दों को घूमाते  रहेंगे, नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए आज आप महत्वपूर्ण हैं आपका संगठन महत्वपूर्ण है इस राष्ट्र ने ,राष्ट्र की जनता ने आपको जिम्मेदारी दी है जिम्मेदारी का निर्वहन आपको ही करना होगा जनता सवाल आपसे ही पूछेगी अर्थव्यवस्था घाटे पर है जी डी पी घटेगी तो ,देश   आपसे से पूछेगा क्योकि आप आज सत्ता में है और आपको जवाब भी देना होगा लेकिन क्या  पिछले 70 सालों की दुहाई देकर के आप विकास के महत्वपूर्ण तथ्यों के सवालों के जवाब रास्ते से भटका सकते हैं या पद भटकाने की कोशिश की दिशा में काम कर सकते हैं  हो सकता है या नही भी ,,,,,लेकिन नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए  अब आप चिंतन कीजिए हो सकता है उस समय देश काल परिस्थिति क्या थी क्या नहीं थी एक ही परिवार की सत्ता थी हम मानते हैं उन्होंने कैसे देश को चलाया यह भी देश को पता है उन्होंने या उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत थी यह भी राष्ट्र को पता है राष्ट्र की जनता को पता है इसी कारण राष्ट्र ने शासन और शासक के परी क्षेत्र से इन संघठनो को दूर किया है क्योंकि आप से उम्मीद है आप से आशा है आप पर जनता ने विश्वास कर रखा है और आप पर जनता विश्वास कर रही है पिछली बार भी जनता ने आपको विश्वास करके सत्ता में काबिज किया और इस बार और भी महत्वपूर्ण तरीके से ज्यादा बहुमत से और ज्यादा विश्वास पर आपके संगठन को ,आप को, सत्ता में खड़ा कर दिया है ,,,,, देश की जनता आपसे ही पूछेगी  सवाल करेगी कि भाई अर्थव्यवस्था और विकास की तमाम मुद्दे जिनसे आपका ध्यान भटक रहा है क्यों कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं आर्थिक मंदी कहां से चल रही है और क्यों,,,आदि,,,,,,,,, इस बात पर चिंतन करना सरकार का महतवपूर्ण निरयण होना चाहिए, है  भी क्योंकि अर्थव्यवस्था ही देश को चलाने की रीढ़ की हड्डी होती है  बिना मजबूत अर्थ व्यवस्था के देश नहीं चलाया जा सकता,  कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते देश में तमाम प्रकार से रोष व्याप्त होते हैं विकास की धारा की गति रूकती है  आदि अनेको अनेक तमाम कारण  हो जाते हैं जिनसे राष्ट्र नुकसान की ओर आर्थिक अवनति की ओर अग्रसर हो जाता है या होता है,,,, सत्य तो यह है कि अब सत्ता रूढ़ पार्टियों और  माननीय शासको  यह बात ध्यान में रखना होगा कि अब हम हैं , हम अर्थव्यवस्था को गति देंगे ,अगर कहीं  हम कमजोर है या होंगे तो स्वयं के ऊपर भी जिम्मेदारी लेने का प्रयास बनता है स्वयं की भी जिम्मेदारी बनती है कि आप अपने पर भी थोड़ा सा गौर करें अपने आप पर भी कहे कि नहीं कहीं ना कहीं हम पीछे हैं कमजोर हैं लेकिन ऐसा बहुत कम  हो रहा हैं राष्ट्र देख रहा है जनता देख रही है ,,,,,,,,कि मात्र 70 साल की दुहाई ही क्यो,,,आखिर क्यों,,,, क्या कारण हो सकता है,,,,,,,, एक राष्ट्र चिंतक  व समाज चिंतक होने के नाते राष्ट्रभक्त होने के नाते राष्ट्र का नागरिक होने के नाते हम यह कह सकते हैं,,,,, पूरे देश के साथ कह सकते हैं """"कि अब हम हैं हम करेंगे हम बढ़ेंगे हम अर्थव्यवस्था को बढ़ाएंगे ना की 70 साल की विचारधारा की दुहाई विपक्ष की राजनीति तो जायज है लेकिन अनेकों अनेक बार पिछली सरकारों की अनदेखी नाकामियों और कमजोरियो को गिनाना कहीं ना कहीं आप की कमजोरियों को प्रदर्शित करता है हम मानते हैं राष्ट्र स्वीकार करता है कि पिछले 70 वर्षों में विकास की गति धीमी रही या तमाम ऐसे  कारण रहे होंगे या  हुए,,, जिसके कारण भारत की अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाई जितनी तेजी से बढ़नी चाहिए थी,,,, भ्रष्टाचार चरम सीमा पर छाया रहा होगा यह भी समय के साथ सबको विदित है देश को पता है अंत में हम कहना चाहेंगे  केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे कि  केंद्र सरकार या   सरकार में माननीय जिम्मेदार  लोगों को पिछले 70 साल की दुहाई को ना दे करके अपनी जिम्मेदारी को आगे बढ़ाना चाहिए और बढ़ाना ही होगा तभी आप अपनी मजबूत नीतियों और  अपने सुशासन के साथ देश की गतिशील अर्थव्यवस्था को बढ़ा सकेंगे,, अपने देश की इकोनॉमी अर्थ व्यवस्था,,,, को आगे मजबूत कर सकेंगे इसके लिए पीछे की सोच ना हो करके आगे की सोच होनी चाहिए क्योंकि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन से कहा है कि जो बीत गया सो बीत गया उसमें शोक क्यों उसमें चिंता क्यों  ,,,,अगर अब आज से आप चेत रहे हैं तो आगे सोचिए वर्तमान की सोचिये भविष्य की की सोचिये वर्तमान में सुधार कीजिए भविष्य अपने आप सुधर जाएगा,,,, ना कि वह सोचिए जो बीत चुका है,,,,,  इसलिए अगर आप आज से ही अपना दृढ़ निश्चय और मानसिक चिंतन मजबूत कर रहे हैं तो आज और कल के लिए सोचिए अगर आज आप अच्छा सोचेंगे तो कल अपने आप मजबूत हो जाएगा इसी प्रकार सरकार को भी हम विन्रमता पूर्वक कहना चाहेंगे राष्ट्र की जनता की ओर से जो बीत गया सो बीत गया उसकी दुहाई देना या उसके परिपेक्ष में अपना टाइम अपनी उर्जा को समाप्त करना उचित नहीं है या नही हो सकता, उचित है भी नहीं कारण भी नहीं है आप सब सचेत हो जाइए आप सचेत होने का प्रयत्न कीजिए मजबूत अर्थव्यवस्था पर निगाहें डालिए आने वाले वर्तमान को मजबूत कीजिए भारत का भविष्य अपने आप उज्जवल हो जाएगा भारत की अर्थव्यवस्था को जितनी मजबूती से स्वतः आप और हम देखना चाहते है समझते हैं वहां पहुंच जाएगी इसके लिए आप सभी बुद्धिजीवियों राजनीतिक हस्तियों  सरकारों का  भविष्य  के प्रति ऐसा सकारात्मक  चिंतन  मोदी जी के सपने को साकार  करेगा होगा 5 हजार करोड़ ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का सपना पूरा होगा लेकिन इसके लिए आप सभी को अपनी बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णयों से वर्तमान से लड़ने की ताकत को और मजबूत करना होगा साहस के साथ वर्तमान समय का मजबूत सदुपयोग करके भविष्य की ओर बढ़ा जा सकता है ना कि पिछले भी बीते हुए समय में अपनी उर्जा नष्ट करके।

 

पशुपतिनाथ त्रिपाठी

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