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अय्याश बाबा के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में से हटेगा 'विश्वविद्यालय' शब्द, HC का आदेश


🗒 गुरुवार, फरवरी 08 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

दिल्ली में रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में से 'विश्वविद्यालय' शब्द हटाया जाए। वहीं, हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को यह भी आदेश दिया है कि वह कानून में दायरे में रहकर युवतियों से दुष्कर्म के आरोपी बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को तलाशने के लिए जरूरी कदम उठाएं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी। बता दें कि पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में 'विश्वविद्यालय' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई थी। 

अय्याश बाबा के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में से हटेगा 'विश्वविद्यालय' शब्द, HC का आदेश

वहीं, मंगलवार को हुई सुनवाई में अमर्यादित तर्क देने पर हाई कोर्ट ने आरोपी बाबा विरेंद्र देव दीक्षित के वकील अनमोल कोंकर्णी को जमकर फटकार लगाई थी। वकील द्वारा 'नारी नर्क का द्वार है' जैसा तर्क देने से नाराज कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने वकील को डांटते हुए कहा था- 'चुप रहिए, जरा जबान संभाल कर बोलिए। ये कोर्ट है, आपकी आध्यात्मिक क्लास नहीं जहां प्रवचन दे रहे हैं। आप कौन से युग में रहते हैं।'

वहीं, बाबा के वकील के कुतर्क पर कोर्ट के भीतर जमकर हंगामा हुआ और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद व अन्य पक्षों के वकीलों ने भी विरोध शुरू कर दिया था। जिस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने वकील व बड़ी संख्या में मौजूद वीरेंद्र के समर्थकों को कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया था।

पीठ ने वीरेंद्र देव दीक्षित के केंद्रों पर विश्वविद्यालय लिखे होने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उधर, सीबीआइ ने पीठ को जानकारी दी कि वीरेंद्र देव के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया है। वीरेंद्र के केंद्रों का गलत पता बताया गया है। इस पर कोर्ट ने आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के वकील को दो दिन के भीतर सही पता बताने का निर्देश दिया था।यहां यह भी बता दें कि 4 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने बाबा वीरेंद्र देव के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज किए थे। बाबा का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। दिल्ली पुलिस ने एक युवती की शिकायत पर दुष्कर्म का केस दर्ज किया था। पीड़िता ने कहा था कि बाबा ने साल 2000 में उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था।

युवती ने यह भी आरोप लगाया था कि आश्रम में रहने वाली तमाम लड़कियों के साथ इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया जाता है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आश्रमों पर छापेमारी के बाद लगभग 50 नाबालिग और करीब 200 महिलाओं को मुक्त कराया है। इसके बाद पुलिस ने बाबा के देशभर में स्थित कई आश्रमों पर छापेमारी की थी।

ढोंगी बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित पर यौन शोषण के आरोप भी लगे हैं। दिल्ली में एक एनजीओ की शिकायत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए एक स्पेशल टीम बनाई थी, जिसमें दिल्ली पुलिस और महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद को शामिल किया गया था।

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