राम नगरी अयोध्‍या में छह दिसंबर को लेकर पुलिस की निगरानी और बढ़ गई

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राम नगरी अयोध्‍या में छह दिसंबर को लेकर पुलिस की निगरानी और बढ़ गई


🗒 बुधवार, दिसंबर 04 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

राम नगरी अयोध्‍या में छह दिसंबर को लेकर पुलिस की निगरानी और बढ़ गई है। ढांचा ध्वंस के बाद से यह तिथि रामनगरी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी गई है। अयोध्या विवाद पर आए फैसला को लेकर दोनों समुदाय के सहयोग ने सुरक्षा तंत्र को काफी राहत पहुंचाई, लेकिन रामनगरी की शांति में कोई खलल न उत्पन्न कर सके, इसके लिए पुलिस प्रशासन एलर्ट है। अयोध्या और फैजाबाद नगर सहित पूरे जिले में पुलिस को लगातार गश्त पर रहने का निर्देश दिया गया है। शांति कमेटी की बैठकों में दोनों समुदाय के लोगों का आभार व्यक्त करने के साथ ही पुलिस आने वाले पर्वों को संपन्न कराने के लिए सहयोग की अपील कर रही है।एसएसपी आशीष तिवारी ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अयोध्या की शांति को भंग करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाए। सीओ अयोध्या अमर सिंह निगरानी की कमान संभाल रहे हैं। बुधवार को सीओ सिटी अरविंद चौरसिया व नगर कोतवाल नितीश श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस फोर्स ने रूटमार्च किया। बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन पर जाकर सुरक्षा व्यवस्था देखी। दोनों स्थानों पर चेकिंग की गई। सुरक्षा को लेकर यात्रियों को जागरूक भी किया गया। संदिग्धों के दिखाई पड़ते ही तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई। सिविल लाइंस इलाके में सीओ सिटी ने वाहन चेकिंग अभियान चलाया। होटल, ढाबे व धर्मशालाओं में जाकर प्रबंधकों से संपर्क कर सचेत किया। चौक में अतिक्रमण हटाया गया। कैंट में शांति कमेटी की बैठक को संबोधित किया।सुप्रीम फैसले के साथ अस्मिता पर आघात की कुंठा से उबरी रामनगरी छह दिसंबर 1992 के ध्वंस की स्मृति से भी उबरती दिख रही है। ध्वंस की घटना के बाद से प्रत्येक वर्ष छह दिसंबर को जहां एक पक्ष शौर्य दिवस मनाता रहा है, वहीं मस्जिद के दावेदार गम का इजहार करते रहे हैं पर इस बार परिदृश्य बदल गया है। सुप्रीम फैसला आने के बाद रामलला के भव्य मंदिर निर्माण की बाट जोह रही विहिप ने पहले ही एलान कर दिया है कि अब शौर्य दिवस की कोई जरूरत नहीं रह गई है। निर्णय आने के बाद मंदिर निर्माण ही सबसे बड़े शौर्य का पर्याय होगा। ध्वंस की बरसी शुक्रवार को है। 

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