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पूर्व एडीजी व एसपी पर धोखाधड़ी का मुकदमा, हाईकोर्ट के आदेश पर सदर कोतवाली में दर्ज हुआ मामला


🗒 मंगलवार, जनवरी 14 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश के पूर्व एडीजी ला-एडं-आर्डर बृजलाल व एसपी गाजीपुर मनोज कुमार सहित पांच पुलिस अधिकारियों पर सदर कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश अराजपत्रित पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र ङ्क्षसह यादव के द्वारा दाखिल किए गए कोर्ट आफ कंटेम्प्ट पर दिया है। नौ वर्ष पुराने मामले में दर्ज हुए इस मुकदमे को लेकर जिला पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।  बृजेंद्र सिंह यादव का आरोप है कि अराजपत्रित पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन नाम से पुलिस कर्मियों का संगठन बनाकर विभागीय भ्रष्टाचार के खिलाफ लडऩे से नाराज अधिकारी प्रताडि़त करते थे। इसके खिलाफ गुहार लगाई गई लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था। इस पर उन्होंने तत्कालीन एडीजी ला-एंड-आर्डर बृजलाल, एसपी मनोज कुमार, एसपीआरए शकील अहमद, आरआइ रामबहादुर ङ्क्षसह व जमानियां कोतवाली के इंस्पेक्टर योगेंद्र प्रसाद शुक्ल के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट निशांत देव के यहां वाद दाखिल किया। इस पर  कोर्ट ने उक्त पांचों अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पांचों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में वाद दाखिल किए। वहां से राहत नहीं मिली तो इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट भी गए लेकिन वहां भी खारिज हो गया। फिर भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हो रहा था। इस पर बृजेंद्र ङ्क्षसह यादव ने हाईकोर्ट में कोर्ट आफ कंटेंम्प्ट किया था। इस पर हाईकोर्ट ने उक्त पाचों अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया।बृजेंद्र सिंह यादव के मुताबिक पुलिस के उच्चाधिकारियों द्वारा 22 जुलाई 1961 में दि कमेटी फार द वेलफेयर आफ द फैमलीज आफ द मेम्बर्स आफ द पुलिस फोर्स इन यूपी (लखनऊ) नामक संस्था पंजीकृत कराई गई। इसमें पुलिस के उच्चाधिकारियों ने अपनी-अपनी पत्नियों को पदाधिकारी बनाया। फिर पुलिस कर्मियों के वेतन से 25 रुपये प्रति कर्मचारी प्रतिमाह अवैध कटौती समिति के नाम से करने लगे, जबकि पुलिस कर्मचारी इस समिति के सदस्य भी नहीं थे। इस कटौती की राशि प्रति वर्ष तकरीबन 10.5 करोड़ रुपये होती रही। पांच वर्ष बाद समिति अपंजीकृत हो गई फिर भी अपंजीकृत संस्था के नाम से अवैध कटौती जारी रही।

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