परिषदीय विद्यालय में 22 साल बाद खुला फर्जीवाड़ा, प्रधानाध्यापिका समेत तीन बर्खास्त

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परिषदीय विद्यालय में 22 साल बाद खुला फर्जीवाड़ा, प्रधानाध्यापिका समेत तीन बर्खास्त


🗒 शुक्रवार, जुलाई 02 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
परिषदीय विद्यालय में 22 साल बाद खुला फर्जीवाड़ा, प्रधानाध्यापिका समेत तीन बर्खास्त

हरदोई,। फर्जीवाड़ा में परिषदीय विद्यालय की एक प्रधानाध्यापिका समेत तीन को बर्खास्त कर दिया गया है। प्रधानाध्यापिका ने 22 साल पहले फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल की थी, जबकि शिक्षिका ने नियुक्ति पाने के लिए दूसरे के अभिलेख लगाए थे। एक अन्य शिक्षक ने फर्जी टीईटी का अंक पत्र लगाया था। तीनों की बर्खास्तगी के साथ ही संबंधित बीईओ को उनके विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।भरावन विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय दखिलौल की प्रधानाध्यापिका मुन्नी रानी की नियुक्ति 30 नवंबर 1999 को हुई थी। मुस्लिम वर्ग की मुन्नी रानी ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र लगाया था।कोटे से ही उन्होंने पदोन्नति भी हासिल की। जांच में मुन्नी रानी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। बिलग्राम विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय सांपखेड़ा में शिक्षिका बनी अंकिता वर्मा की 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पांच दिसंबर 2020 को नियुक्ति हुई थी। उनके अभिलेखों की जांच कराई गई तो पता चला कि उसी नाम, पिता के नाम और जन्म दिन पर अंकिता वर्मा नाम की बाराबंकी जिले में शिक्षिका हैं। अंकिता वर्मा ने उसी के अभिलेखों को दिखाकर खुद नौकरी पा ली थी। जबकि सांडी विकास खंड के विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय चिल्हौर के सहायक अध्यापक धमेंद्र कुमार की 21 सितंबर 2015 को नियुक्ति हुई थी।धमेंद्र कुमार ने नियुक्ति के समय लगाए गए टीईटी अंक पत्र में 85 अंक बताए थे, लेकिन जब आनलाइन सत्यापन कराया गया तो उसमें मात्र 69 अंक ही निकले। बीएसए हेमंतराव ने बताया कि मुन्नी रानी और धमेंद्र कुमार के अभिलेखों में गड़बड़ी मिलने पर उनका वेतन पहले  से ही रोक दिया गया था। अंकिता वर्मा का वेतन जारी ही नहीं हो पाया था। तीनों को अलग अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए गए लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, जिस पर तीनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उनके विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जाएगी और जो भी वेतन लिया है उसकी भू-राजस्व की भांति वसूली होगी।