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हाथरस-अब राजनीति नहीं लोकनीति चाहिए


🗒 बुधवार, सितंबर 30 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
हाथरस-अब राजनीति नहीं लोकनीति चाहिए

हाथरस की बहन को न्याय मिले निर्णय नहीं

उ०प्र०
बलात्कार सिर्फ़ एक शब्द नहीं है यह वह ज्वालामुखी है जिसमें पीड़िता अपने सभी स्वप्न के साथ जिंदा ही जल कर खाक कर दी जाती है। अगर किस्मत से बच भी जाये तो यह हमारा क्रूर और दकियानूसी समाज उस बच्ची या बहन को जीते जी मार डालता है। यह है एक लड़की की महाबर्बादी का पर्याय पर विडम्बना है कि आज तक इस जघन्य पाप की जघन्य सजा आसानी से नहीं मिल पाती। आपको पता ही होगा कि निर्भया की माताजी को 6-7 साल बाद न्याय मिल सका। आखिर! न्याय की प्रक्रिया क्यों इतनी जटिल और देरी की है? यह सचमुच असहनीय है। यह बात वही जान सकता है जो कोर्ट कचहरी को रोज भुगत रहा है। कोर्ट में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जज के नाक के नीचे बैठे तथाकथित बिना लॉ की एलएलबी, एलएलएम डिग्री पास अयोग्य पेशकार जी जो किसी की गरीबी देखे बिना हर तारीख लगवाने के उससे सौ पांच सौ रूपये खींच लिया करते हैं। सबको पता होता है कि यह हो रहा है पर सब चलने दिया जा रहा है। एक गरीब डरते-डरते अपनी शिकायत लिखाने थाने पहुंच जाये तो उसकी एफआईआर तक आसानी से नहीं लिखी जा सकती। और तो और जिन गरीबों के वोटों से गांव के प्रधान व छुटपुट नेता जीतते है वो भी उस गरीब की नहीं सुनते। चुनाव के समय में सौ सौ करोड़ में विधायक अदला-बदली हो जाती है पर जो गरीब उन्हें वहां तक पहुंचाता है उसे सिर्फ़ राशन के गेहूं चावल और बेरोजगारी के हंटर से खुद के दर्द को सताये हुए संतोष करना पड़ता है। कहते हैं आत्मनिर्भर बन जाओ। डायरेक्ट कहो ना कि हम नौकरी नहीं दे सकते आप अपने पुश्तैनी काम में जुट जाओ। मुझे तो उस वक्त रोना आता है जब पांच गावों में कोई एक ने पास से हवाई जहाज देखा हो यात्रा तो दूर की बात है। आजादी से लेकर आज तक गरीब तो गरीब ही रहा। कोई ऐसी योजना नहीं जो गरीब के जीवन स्तर को उन्नत कर दे। क्या हवाई जहाज अमीरों की ही बपौती रहेगें। क्यों नहीं बनाते ऐसी योजनाएं कि गरीब भी हवाई जहाज में बैठने के सपने को पूरा कर सके। आप लोग दुनिया भर की जनगणना करवाते हो क्या कभी दिल नहीं करता कि बेरोजगारों की गणना करवा ली जाये कि किस घर में कितने बेरोजगार हैं और उन्हें कैसे रोजगार मुहैया करवाया जा सके। क्यों नहीं सार्वजनिक करवाते हर जिले के लंफगों गुंडों की तस्वीरें? मैं तो साफ कहती हूं हाथरस की बहन के साथ जिसने भी यह बरबरता की है, पहले उन दरिंदों उन दोषियों के साथ वो हो जो उन्होंने उस बहन के साथ किया और फिर इन सब नरपिशाचों के फांसी के वीडियो जनता में सार्वजनिक किये जायें। जिससे इन बलात्कारी नस्ल के कीड़ों के मन में भय पनपे और यह हृदयविदारक घटनाओं पर विराम लगे। जब इन अपराधिक घटना की बात आती है तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में हर दो घंटे में बलात्कार का एक मामला दर्ज हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2018 में बलात्कार के 4,322 मामले दर्ज किए गए थे। राज्य में महिलाओं के खिलाफ 59,445 अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें रोजाना 62 मामले सामने आए हैं। यह 2017 में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जब कुल 56,011 अपराध दर्ज किए गए थे। फिलहाल एनसीआरबी ने 2018 के बाद कोई भी अपराध का आंकड़ा नहीं जारी किया। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा तीन साल में जारी किए आंकड़ों में अपराध कम होना बताया गया है। सोचने की बात है जब हम धोती से जींस पर आ सकते हैं। सब कुछ डिजिटल हो रहा है तो वोटिंग को भी ऑनलाइन कर दिया जाये जिससे सरकारी खजाना बेरोजगारों पर खर्च हो सके। हमें हमारी न्यायव्यवस्था को ठीक करने पर जोर देना होगा। दीवानी खेती के मुकदमे पीढी दर पीढ़ी चलते हैं। इन सब पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। जब तक देश का युवा योग्य नहीं बनेगा, हम क्या बड़ी उम्मीदें कर सकते हैं। देश के कुछ राक्षस इस कोरोना महामारी में बलात्कार कर रहे हैं जबकि कोरोना में दुनिया नेक मदद के कामों में लगी है। इसका कारण सिर्फ़ इतना है कि हमें बेहद कड़े कदम उठाने ही होगें।जब तक बलात्कारियों में खौफ़ नहीं होगा यह घटनायें रूकने वाली नहीं है। बलात्कारियों की जबर्दस्त कुटाई और फांसी के वीडियो जब तक वायरल नहीं किये जायेगें तब तक यह नरपिशाच सुधरने वाले नहीं है और जो लोग इसमें जाति धर्म पार्टी मीडिया ग्रुपों को बीच में लाते हैं वह सर्वथा गलत है। बलात्कारी सिर्फ़ अपराधी होता है और यही उसकी बदजात होती है। वह न जाति का होता न देश का और न ही देश की गौरवशाली संस्कृति का, वह कानून का अपराधी है जिसकी सजा सिर्फ़ सरेआम फांसी निश्चित होनी चाहिए। हां मीडिया की गलती यह है कि वह किसी लड़की के साथ हुई दरिंदगी , की खबर को उसकी जाति के साथ जोड़कर दिखाता है तो सभ्य समाज के लिए शर्मसार होने के अलावा कुछ नहीं बचता है। लड़की किस जाति की है, यह बताने से अपराध का दायरा बड़ा या छोटा नहीं हो जाता है। निश्चित ही इस तरह की ओछी मानसिकता समाज में द्वेष बढ़ाने की सोची-समझी राजनीति या रणनीति के अलावा कुछ नहीं है।इसी प्रकार बलात्कार चाहे गांव की किसी लड़की के साथ हुआ हो या फिर मुम्बई में कोई फिल्म निर्देशक किसी अभिनेत्री के साथ बलात्कार करता है, कानून की नजर में तो दोनों ही एक जैसे अपराध हैं, लेकिन हमारे कुछ नेता, कथित बुद्धिजीवी एवं अवार्ड वापसी गैंग, मोमबत्ती, तखती गैंग के लोग अकसर बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की भी ‘श्रेणी’ बदल कर राजनीति करने से बाज नहीं आते हैं। यही वजह है कहीं बलात्कार की शिकार लड़की के पक्ष में कोई नेता खड़ा नहीं दिखाई देता है तो वहीं अगर पीड़ित लड़की किसी जाति विशेष से आती है,तो हमारे नेता ‘बाल की खाल निकालना’ शुरू कर देते हैं और पीड़ित पक्ष के साथ खड़े होने का ड्रामा करके सियासी रोटियां सेंकने में जुट जाते हैं। उन्नाव के विधायक रहे कुलदीप सेंगर, तथा बाबा रामरहीम के अमानवीय कृत्य को कौन भूल सकता है, जिसकी सजा अब वह काट रहे हैं। इससे यह साबित हो जाता है कि कोई कुछ भी न्याय होकर रहता है पर दुखद है रसूखदारों को फांसी नहीं हो पाती। इसी सोच के चलते हाथरस में जबर्दस्त प्रदर्शन हुए हैं कि 14 सितंबर का वह काला दिन जब हाथरस के चंदपा कोतवाली क्षेत्र के गांव बूलगढ़ी की इस बहन के साथ उसी के गांव के कुछ लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। दरिंदों ने गैंगरेप के बाद हैवानियत की पराकाष्ठा देखो कि पीड़िता की जीभ तक काट दी और रीढ़ की हड्डी भी तोड़ दी थी। हैवानियत के बाद 15 दिन तक लड़की सिर्फ इशारे से ही अपना दर्द समझाती रही। 15 दिनों के इलाज के बाद 28 सितंबर को इस बहन ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था, जिसके बाद हाथरस में माहौल बेहद तनावपूर्ण है तो सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष में आरोप- प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्ष ने तो कानून-व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार तर को घेर लिया है, जबकि सभी आरोपी जेल के अंदर हैं।कहीं हाथरस की 19 वर्षीय बिटिया को भुला न दिया जाए और उसे सही और तुरत न्याय मिल सके। हम तो कहते हैं कि उन लड़कियों के पक्ष में तथाकथित नेताओं को ऐसी ही बुलंद आवाज उठना चाहिए जो किसी वर्ग विशेष से नहीं आती हैं, आपतो याद ही होगा देश की होनहार अमेरिका में पढ़ने वाली सुदीक्षा जिसकी बुलंदशहर शहर में छेड़खानी से बचने के दौरान सड़क हादसे में मौत हो या फिर उससे पूर्व गाजियाबाद में भांजी को छेड़खानी से बचाने के दौरान पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या को लोग भूल नहीं पाए हैं। पूर्वी यूपी के भदोही जिले में गत दिनों लापता हुई एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की का शव नदी के किनारे मिला। नाबालिग लड़की के परिजनों का आरोप है कि गांव के पास के ही ईंट भट्टा संचालक ने उसके साथ दरिंदगी की और फिर तेजाब डाल कर उसकी हत्या कर दी। ऐसी घटनाओं से अखबार हमेशा पटे रहते हैं। उत्तर प्रदेश में योगी जी की निसंदेह बेहतरीन सरकार है पर विडम्बना है कि यहां बेटियों के साथ अपराध का ग्राफ कम होने का नाम ही नहीं लेता है। जनराय तो यहां तक कहती है कि नेट पर मौजूद अश्लील साईट्स और सरस सलिल जैसी अश्लील पत्र पत्रिकाओं पर पूरी तरह बेन लगा देना चाहिए और फिल्मों में भी जो बलात्कार के सीन होते हैं वह केवल सांकेतिक दिखायें जाये नाकि किसी लडकी की अस्मिता को भंग करें। जब तक हम इन सब चीजों को दुरस्त नहीं करेगें। इतनी जल्दी सुझार आना सम्भव नहीं है। क्योंकि आज हर हाथ में मोबाइल फोन है और बलात्कारी सोच के कीड़े अश्लील सामग्री देखकर वही सब पाने की इच्छा से बलात्कार को अंजाम देते हैं और इसलिये यह मामले रूकने का नाम नहीं लेते। हमें एक सभ्य और उन्नत समाज बनाना है तो हमें राजनीत को ठीक करना पडेगा, वोट के लालच में राजनीति में हमारी संसद में वॉलीवुड के लोग आकर बैठ जाते हैं, खिलाड़ी आकर बैठ जाते हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है सिर्फ मोटा वेतन भत्ता कमाना मात्र उद्देश्य है। जब भारत सरकार महान समाज सेवकों पद्मश्री पद्मविभूषण से सम्मानित करता है तो वह सोसल वर्कर संसद के अधिकारी क्यों नहीं? पर कूटनीति यह है कि जिस हीरो हीरोइन से ज्यादा वोट मिले उसे चुनाव में खड़ा कर दो चाहे जनता को लाभ हो या नहीं बस हम जीतना चाहिये। आज कालेजों में राजनीत है छात्रनेता, कोर्ट कचहरी में चुनाव होते हैं। कुछ ऐसा बचा है क्या जहां राजनीति न हो। जब हर जगह राजनीति ही होगी तो लोकनीति जनता की राय कहां पानी भरने जायेगी। हमें गहरे पानी उतर सोचना होगा कि राजनीति विनाश को जन्म दे रही है, आपसी प्यार सौहार्द खत्म कर रही है, हमें नेक मकसद से सुन्दर सभ्य समाज के लिए लोकनीति को अपने जेहन में अपने मन मस्तिष्क और दिल में स्वीकारना होगा वरना यह राजनीति हम मनुष्यों से हमारी मनुष्यता ही मानवता ही छीन लेगी और बिना मानवता के हमे पशुवत बनने से फिर कोई नहीं रोक पायेगा क्योंकि यह रोज होती दरिंदगी हमें खबर दे रही है कि हम मानवों का पतन किस तरह होगा?

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