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झांसी मेडिकल कॉलेज में मरीज के कटे पैर को बना दिया तकिया, हंगामा


🗒 रविवार, मार्च 11 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

भारत की स्वतंत्र में अहम योगदान करने वाली रानी लक्ष्मीबाई के झांसी में कल संवेदनहीनता को तार-तार कर दिया गया। मामला यहां के रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का है, जहां पर एक मरीज का कटा पैर उसके सिरहाने पर तकिया के रूप में रखा गया है। इसके बाद जब कुछ तीमारदारों ने इस मंजर को देखा तो वहां पर हंगामा हो गया।

झांसी मेडिकल कॉलेज में मरीज के कटे पैर को बना दिया तकिया, हंगामा

जब तीमारदारों ने वहां देखा कि ऑपरेशन के बाद मरीज का पैर उसके सिरहाने पर तकिए के रूप में रखा है तो उन लोगों ने इस अमानवीयता का फोटो सोशल मीडिया और निजी चैनलों पर वायरल कर दिया। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में कंसल्टेंट ऑन कॉल डॉ.प्रवीन सरावली को चार्जशीट जारी करने का आदेश दिया है, जबकि इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर डॉ.एमपी सिंह, सीनियर रेजीडेंट डॉ.आलोक अग्रवाल, सिस्टर इंचार्ज दीपा नारंग व नर्स शशि श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने झांसी के पूर्व प्राचार्य डॉ.नरेंद्र सेंगर की अध्यक्षता में चार सीनियर डॉक्टरों को शामिल कर जांच समिति गठित कर दी है। समिति से दो दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.केके गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पीडि़त परिवार मरीज को लेकर निजी अस्पताल चला गया।

लहचूरा के ग्राम इटायल निवासी घनश्याम राजपूत स्कूल बस में क्लीनर है। कल सुबह वह बच्चों को स्कूल छोडऩे जा रहा था। ग्राम बम्हौरी के आगे चालक से अनियंत्रित होकर बस पलट गयी। बस के नीचे दबने से घनश्याम के दोनों पैर कुचल गये और चार छात्राओं को मामूली चोटें आईं। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्राओं को क्लीनर समेत मऊरानीपुर के स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर क्लीनर को मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यहां कुछ लोगों ने देखा कि मरीज का कटा पैर सिरहाने पर तकिया की तरह लगा हुआ है। इसके बाद वहां हंगामा हो गया। 

घायल व्यक्ति का बहनोई जानकी प्रसाद जब अस्पताल पहुंचा तो यह देख वह घबरा गया। उसने डॉक्टरों से कई बार पैर हटाने के लिए कहा, लेकिन पैर नहीं हटाया गया। आखिर में उसने स्वयं ही पैर हटाकर अलग रखा। जानकी प्रसाद ने इस संबंध में बताया कि हम जब हॉस्पिटल पहुंचे, तो मरीज के सिर के नीचे उसका ही पैर रखा हुआ था लगभग दो घंटे तक ये पैर रखा रहा। जब हमने तकिया लाकर दिया तब उन्होंने पैर को हटाया।

वॉर्ड में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि मरीज को उसकी मां व पत्नी लेकर आयी थी। उन्होंने पैर को सिरहाने पर रखा था। कर्मचारियों ने उनसे कटा पैर हटाने को कहा, पर उन्होंने ऐसा नहीं करने दिया। बताया कि मेडिकल कॉलेज लाने के दौरान निजी अस्पताल के किसी कर्मचारी ने उनसे कह दिया था कि पैर जुड़ जायेगा, इसलिए वह कर्मचारियों को पैर हटाने नहीं दे रही थीं। शाम के समय अन्य परिवारीजन के सहयोग से वे मरीज को निजी अस्पातल ले गयीं। उन्होंने कर्मचारियों को कटा पैर नहीं दिया।

मेडिकल कालेज की छवि को धूमिल करने का प्रयास

मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. साधना कौशिक ने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने जानबूझकर मरीज का कटा हुआ पैर उसके सिर के नीचे रखकर फोटो खींचकर वायरल कर मेडिकल कालेज की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। 

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