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जीआरपी के सिपाही की हत्या के मामले में पूर्व सांसद उमाकांत समेत 7 दोषी करार


🗒 शनिवार, अगस्त 06 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
जीआरपी के सिपाही की हत्या के मामले में पूर्व सांसद उमाकांत समेत 7 दोषी करार

जौनपुर, । चार फरवरी 1995 को शाहगंज रेलवे स्टेशन पर जीआरपी के सिपाही की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट शरद कुमार त्रिपाठी ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव, उनके चालक राजकुमार, गनर बच्चूलाल, पीआरडी जवान धर्मराज, महेंद्र, सूबेदार व सभाजीत को हत्या के प्रयास समेत दस धाराओं में दोषी करार दिया। सजा के प्रश्न पर सुनवाई सोमवार को होगी।तत्कालीन कांस्टेबल रघुनाथ सिंह ने जीआरपी शाहगंज में घटना की एफआइआर दर्ज कराई थी। कहा था कि चार फरवरी 1995 को दोपहर ढाई बजे जीआरपी चौकी पर एक व्यक्ति ने पहुंचकर सूचना दी कि स्टेशन मास्टर कार्यालय के पास प्लेटफार्म नंबर एक पर बेंच पर बैठने को लेकर कुछ लोग विवाद कर रहे हैं। वहां पहुंचा तो दो व्यक्ति आपस में विवाद कर रहे थे। एक ने खुद को तत्कालीन विधायक उमाकांत यादव का चालक राजकुमार बताया। समझाने पर उसने वादी को थप्पड़ मार दिया और कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे पड़ी बीच में आने की। वादी ने अन्य सिपाहियों को बुलाया।इस दौरान दोनों को जीआरपी चौकी लाया गया। इस दौरान राजकुमार के साथियों ने भागकर उमाकांत यादव को सूचना दी। थोड़ी देर में उमाकांत यादव रिवाल्वर लेकर, उनका गनर बच्चूलाल स्टेनगन (कार्बाइन) तथा उमाकांत के पीआरडी जवान सूबेदार, धर्मराज, महेंद्र व सभाजीत राइफल लेकर तथा अन्य आरोपित बंदूक व देसी तमंचा लेकर वहां पहुंचे। इस दौरान उमाकांत ने ललकारा मारो एक भी बचने न पाए और सभी अंधाधुंध फायरिंग करने लगे। प्लेटफार्म पर भगदड़ मच गई।फायरिंग में कांस्टेबल अजय सिंह की मौत हो गई तथा आरक्षी लल्लन सिंह, रेलवे कर्मचारी वाटसन निर्मल लाल तथा एक यात्री भरत लाल गंभीर रूप से घायल हो गए।फायरिंग से चौकी के दरवाजे व शीशे टूट गए। आरोपितों ने राजकुमार को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ा लिया। इसके बाद चौकी के मालखाने को लूटने का प्रयास किया। पुलिसकर्मी रघुनाथ सिंह व लालमणि सिंह ने सरकारी रायफल से फायरिंग किया तब उमाकांत और अन्य आरोपित राजकुमार को अपने साथ लेकर भाग गए। घायलों का मेडिकल कराया गया। जीआरपी पुलिस द्वारा प्रारंभ में विवेचना की गई। इसके बाद विवेचना सीबीसीआइडी द्वारा शुरू की गई और विवेचक ने उमाकांत यादव, बच्चूलाल, सूबेदार, धर्मराज, महेंद्र, सभाजीत व राजकुमार के खिलाफ हत्या एवं हत्या के प्रयास सहित दस धाराओं में आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया।अभियोजन पक्ष से सीबीसीआइडी के सरकारी वकील मृत्युंजय सिंह एवं यहां के सरकारी वकील लाल बहादुर पाल व अनिल सिंह कप्तान ने अभियोजन पक्ष से पैरवी की। 19 गवाह पेश किए गए। गवाह पुलिसकर्मी लल्लन सिंह आरोपितों के भय से पक्षद्रोही घोषित हुआ। पुलिसकर्मी रघुनाथ सिंह व लालमणि सिंह ने घटना का समर्थन किया। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के संबंध में गवार ने बयान दिया कि दोषियों के पास से बरामद हथियारों से गोली चलना प्रमाणित हुआ है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस एवं समस्त साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद उमाकांत व अन्य आरोपितों को हत्या ,हत्या के प्रयास व अन्य धाराओं में दोषी करार दिया है।

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