यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

किसान को खेत की जुताई करने में मिला प्राचीन दुर्लभ सिक्कों से भरा घड़ा


🗒 सोमवार, जुलाई 25 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
किसान को खेत की जुताई करने में मिला प्राचीन दुर्लभ सिक्कों से भरा घड़ा

कन्नौज, । जलालाबाद में एक किसान को खेत की जुताई करने के दौरान खजाना मिलने की जानकारी पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। खेत में प्राचीन दुर्लभ सिक्कों से  भरा घड़ा मिला, जिसे देखने के लिए ग्रामीणों की होड़ लग गई। राजकीय पुरातत्व संग्रहालय की टीम भी पहुंची और मटकी समेत सिक्के कब्जे में ले लिये। पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम अब सिक्कों की जांच करके कालखंड का पता लगाएगी और उन्हें संग्रहालय में रखा जाएगा।जलालाबाद ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत तेरारागी के मजरा मूसरि गांव में आनंद कुमार जाटव अपने खेत की ट्रैक्टर से जोताई करा रहे थे। इसी दौरान खेत में एक घड़ा ट्रैक्टर के कल्टीवेटर से टकराई। इसपर आनंद ने ट्रैक्टर को रोक दिया और खेत के अंदर मिट्टी से घड़ा बाहर निकाल लिया तो उसमें से कुछ सिक्के निकले। पहले तो खेत में गड़ा खजाना मिलने पर उसे घर में रख लिया लेकिन ट्रैक्टर चालक ने गांव में लोगों को खजाना मिलने की जानकारी दी।इसपर खजाना देखने की जिज्ञासा बढ़ गई और कई लोग उसके घर पहुंंच गए। पहले तो सोने की मोहरें होने का संदेह हुआ लेकिन जब घिसकर जांचा तो सभी सिक्के तांबा मिश्रित धातु के मिले। लोगों की सूचना पर राजकीय पुरातत्व संग्रहालय के अध्यक्ष दीपक कुमार अपनी टीम को लेकर मूसरि गांव पहुंंच गए। उन्होंने किसान से सभी सिक्के व मटकी ले ली।बताया गया है कि मटकी में 100 से अधिक सिक्के हैं, जिनमें कई आकृतियां बनीं हुईं हैं। आकृतियों और कालखंड का फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सिक्के प्राचीन हैं, जिनकी कार्बन टेस्टिंग से कालखंड का पता चलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि जहां खेत है, वहां करीब 60 साल पहले कच्चे मकान बने थे। पुराने समय में तांबे के सिक्के प्रचलन में थे, तभी किसी ने मटकी में सिक्के रखकर गाड़ दिए होंगे।