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किडनी कांड में फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल की कोआर्डिनेटर गिरफ्तार


🗒 बुधवार, जून 12 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

किडनी कांड में गठित नई एसआइटी ने फरीदाबाद के फोर्टिस हॉस्पिटल की कोआर्डिनेटर सोनिका डबास को भी गिरफ्तार कर लिया है। नामी अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ल के बाद इस बड़ी गिरफ्तारी से अंग प्रत्यारोपण करने वाले अस्पतालों में हलचल मच गई है। अब तक पुलिस किडनी कांड में 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।एसआइटी के प्रभारी एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि फोर्टिस अस्पताल में तीरथ पाल और अरुण कुमार नाम से किडनी ट्रांसप्लांट की फाइलें मिली थीं। दस्तावेजों के सत्यापन में सामने आया कि डोनर और रिसीवर दोनों के पते फर्जी हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार शाम दिल्ली से बयान देने कानपुर पहुंची सोनिका पर मंगलवार शाम साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। सोनिका ने ही डोनर प्रोवाइडर, डोनर और मरीज के साथ मिलकर घालमेल किया था। सोनिका ने तीरथपाल वाला केस तो करा दिया, लेकिन अरुण कुमार वाली फाइल पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि इसी बीच मुकदमा दर्ज हो चुका था।

किडनी कांड में फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल की कोआर्डिनेटर गिरफ्तार

अपोलो किडनी कांड का मुख्य आरोपित जयपुर निवासी शैलेष सक्सेना इस किडनी कांड में भी जेल गया है। वह डोनर उपलब्ध कराता था। शैलेष के अपोलो में नौकरी करने के दौरान ही सोनिका उसके संपर्क में आई थी। जब भी किडनी या लिवर ट्रांसप्लांट का केस आता था तो वह शैलेष के माध्यम से सौदेबाजी करती थी।अंग प्रत्यारोपण करने वाले अस्पताल की मेडिकल कमेटी में डोनर और मरीज की फाइल तैयार कराना कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी होती है। यही किडनी व लीवर ट्रांसप्लांट संबंधी पूरी प्रक्रिया के दौरान लीगल दस्तावेजों के साथ मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि फोर्टिस अस्पताल की कोआर्डिनेटर सोनिका ने एक किडनी ट्रांसप्लांट कराई है और दूसरी की तैयारी में थी। पर्याप्त सबूतों के आधार पर ही गिरफ्तारी की गई है।किडनी कांड में आरोपित दिल्ली के डॉ. दीपक शुक्ल की ओर से मंगलवार को जनपद न्यायाधीश की अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई। यहां से जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश एससीएसटी न्यायालय पहुंची। विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रियाज ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 13 जून की तारीख तय की है। जमानत अर्जी में अपील की गई है कि डॉ. दीपक शुक्ल वर्ष 1975 से चिकित्सा एवं सामान्य फिजीशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। पुलिस ने फर्जी मुकदमा बनाकर गिरफ्तारी की है। इससे उनके सम्मान को क्षति हुई है। अप्रत्याशित गिरफ्तारी से वह अवसाद में हैं। बचाव में दलील देते हुए कहा कि उनका किसी भी डोनर या मरीज से कोई वास्ता नहीं है और न ही किसी मरीज की बीएचटी (बेड हेड टिकट) पर नाम दर्ज है। किसी प्रकार की सर्जरी या इलाज का भी उल्लेख नहीं किया गया है।उन्होंने खुद को वरिष्ठ नागरिक बताते हुए खुद पर लगाए मुकदमे को पूरी तरह निराधार और झूठा बताया। अन्य दलीलों के साथ बचाव में तर्क दिया कि अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धारा 18, 19 और 20 में कार्रवाई की गई है, लेकिन इसमें पुलिस विवेचना नहीं कर सकती। मात्र राज्य अथवा केंद्र सरकार के अधिकृत अधिकारी द्वारा परिवाद पर ही संज्ञान लिया जा सकता है। लिहाजा उक्त धाराओं का कोई अपराध उन पर नहीं बनता है। अधिवक्ता चिन्मय पाठक ने बताया कि इस मामले में अभियुक्त गौरव मिश्रा और राजकुमार राव की उच्च न्यायालय से जमानत स्वीकृत हो चुकी है। गुरुवार को डॉ. दीपक की जमानत पर बहस होगी। 

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