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पुलिस को चकमा देकर ड्रग माफिया का कोर्ट में सरेंडर


🗒 शनिवार, सितंबर 12 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
पुलिस को चकमा देकर ड्रग माफिया का कोर्ट में सरेंडर

युवाओं को ड्रग एडिक्ट बनाकर शहर को 'उड़ता पंजाब' बनाने की कोशिश कर रहे गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार करके पुलिस ने कामयाबी तो हासिल कर ली लेकिन सरगना को पकड़ने में नाकाम रही। ड्रग माफिया बच्चा ने शुक्रवार को पुलिस को चकमा देकर अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस से बचने के लिए वह वकील की वेशभूषा में कोर्ट पहुंचा था। न्यायालय ने सरेंडर अर्जी स्वीकार करते हुए उसे जेल भेज दिया, एक दिन पहले उसके भाई ने सरेंडर किया था।काकादेव शास्त्री नगर निवासी ड्रग माफिया और हिस्ट्रीशीटर सुशील शर्मा उर्फ बच्चा शुक्रवार की दोपहर वकील की वेशभूषा में अधिवक्ताओं के साथ कोर्ट पहुंचा। इससे पहले उसकी ओर से कोर्ट में सरेंडर अर्जी दी गई। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिलीप अवस्थी ने बताया कि न्यायालय ने मादक पदार्थ अधिनियम के तहत आत्म समर्पण स्वीकार करते हुए बच्चा को जेल भेज दिया। इस मामले में बजरिया पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले नौ सितंबर को बच्चा के भाई राजकुमार शर्मा उर्फ बउआ ने भी कोर्ट में सरेंडर किया था, उसे भी न्यायालय ने जेल भेज दिया।सुशील शर्मा उर्फ बच्चा को ड्रग्स के काले कारोबार का डॉन बनाने में पुलिस की अहम भूमिका है। उसे मुखबिर बताकर उसके हर जरायम पेशे को पुलिस अभयदान देती रही। पांच वर्ष पहले बच्चा से दोस्ती के चलते काकादेव के पूर्व थाना प्रभारी उदय प्रताप ने उसके एक विरोधी को तस्कर बताकर जेल भी भेजा था। गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में भी पुलिस की भूमिका संदिग्ध मिली, जिसके बाद अधिकारियों ने काकादेव थाने व शास्त्रीनगर चौकी में रहे पुराने प्रभारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। सीओ सीसामऊ त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि उदय पर आरोप लगा था कि उसने फजलगंज के शख्स को सुशील के कहने पर मादक पदार्थों का सप्लायर बताकर जेल भेजा था।सुशील उर्फ बच्चा पुलिस का मुखबिर बनकर दूसरे अपराधियों को पकड़वाता था। दूसरे जिलों की पुलिस भी मदद लेती थी। इसी वजह से तमाम थानेदारों और एसओजी प्रभारियों से उसकी नजदीकी थी। जांच में सामने आया है कि ये थानेदार आरोपित के पकड़े जाने पर पैरवी करते थे। मार्च में सीसामऊ में दुष्कर्म पीडि़ता ने सुशील के खिलाफ धमकी देने व बलवे की धाराओं में मुकदमा लिखाया, तब एक इंस्पेक्टर ने उसे अपना सबसे बढिय़ा मुखबिर बताकर मुकदमा न लिखने के लिए दबाव बनाया था।विकास दुबे की तरह ही सुशील के भी भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं से करीबी रिश्तों का पता लगा है। सुशील खुद अपनी गाडिय़ों पर भाजपा का झंडा लगाकर चलता था। तीन दिन पूर्व जब पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा तो उससे चंद घंटे पहले ही रात करीब 10 बजे सुशील बोलेरो गाड़ी से भाई के साथ निकला था। उस गाड़ी में भी भाजपा का झंडा लगा था। कानपुर से वह सीधे प्रतापगढ़ स्थित अपने गांव गया था, पुलिस वहां पहुंची थी तो वहां से वह पहले ही फरार हो गया था।

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