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किशोर न्याय बोर्ड में साबित नहीं कर पाई पुलिस


🗒 सोमवार, अक्टूबर 25 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
किशोर न्याय बोर्ड में साबित नहीं कर पाई पुलिस

कानपुर देहात,  बिकरू कांड में अमर दुबे की पत्नी पर फर्जी अभिलेख लगाकर लिए सिम के प्रयोग के मुकदमे में सोमवार को नया मोड़ सामने आया। किशोर न्याय बोर्ड में हुई बहस के दौरान वादी व विवेचक इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय बचाव पक्ष के सवालों पर साबित नहीं कर सके कि अमर की पत्नी सिम का प्रयोग कर रही थी। इंस्पेक्टर ने बयान में स्वीकार किया कि सिम आरोपित की मां के नाम दर्ज है। मोबाइल की काल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) के अवलोकन न करने की बात भी स्वीकार की। बोर्ड ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुनवाई की अगली तिथि 12 नवंबर तय की है।सोमवार को सुनवाई के दौरान इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय और अमर दुबे की पत्नी को पेश किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता शिवाकांत ने बताया कि इंस्पेक्टर ने मोबाइल सीडीआर व काल लोकेशन का अवलोकन न करने की बात स्वीकार है। बिना सीडीआर का अवलोकन किए कहना कि सिम अमर दुबे की पत्नी ने प्रयोग किया, न्याय संगत नहीं है। सीडीआर का अवलोकन किए बिना यह कैसे कहा जा सकता है कि अमर की पत्नी ही सिम का इस्तेमाल कर रही थी या बिकरू कांड के दिन घटनास्थल पर सिम का प्रयोग किया गया और उससे आरोपितों से बातचीत की गई। विवेचक के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं था।गौरतलब है कि चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 को विकास दुबे व उसके साथियों ने दबिश देने गई पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी थी। जिसमें आठ पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने अमर की पत्नी पर फर्जी दस्तावेज लगाकर सिम लेने का मुकदमा दर्ज कराया था। दरअसल, एसआइटी ने बिकरू कांड की जांच की थी। एसआइटी की संस्तुति पर चौबेपुर थाने में फर्जी दस्तावेज पर सिम का मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि अमर की पत्नी जिस सिम का प्रयोग कर रही थी, वो उसके नाम पर नहीं है। हालांकि, बाद में जांच के दौरान सामने आया कि सिम उसकी मां के नाम पर है। अमर दुबे की पत्नी को आरोप पत्र पढ़ने के लिए बचाव पक्ष ने जेल में लैपटाप उपलब्ध कराने के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायालय पाक्सो में प्रार्थना पत्र दिया था। अधिवक्ता शिवाकांत ने बताया कि न्यायालय की ओर से जेल प्रशासन को लैपटाप उपलब्ध कराने को पत्र भेजा गया था। जवाब में जेल प्रशासन ने कारागार की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रख लैपटाप उपलब्ध कराने में असमर्थता जाहिर की गई है।

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