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ताजमहल के 22 कमरों को खोलने की मांग


🗒 रविवार, मई 08 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
ताजमहल के 22 कमरों को खोलने की मांग

लखनऊ, । वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कारिडोर के प्रांगण में ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे तथा वीडियोग्राफी के विरोध के बीच अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी के नेता ने आगरा के ताजमहल के 22 कमरों को खोले जाने की मांग की है। भाजपा नेता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की और कोर्ट से मांग की है कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश दे कि आगरा के ताजमहल के 22 कमरों को खोला जाए, ताकि पता लगाया जा सके कि वहां हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं या नहीं।हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल कर ताजमहल के इतिहास का सच सामने लाने की मांग की गई है। कहा गया है कि इसके तथ्यों की जानकारी के लिए एक कमेटी का गठन किया जाए। साथ ही ताजमहल के 22 बंद कमरों को खोलकर जांच कराई जाए क्योंकि कईयों का मानना है कि यह वास्तव में भगवान शंकर का मंदिर था जिसे तोड़कर ताजमहल बनाया गया।यह याचिका हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में शनिवार को दाखिल की गई। रजिस्ट्री से पास होने के बाद इसकी सुनवाई संबधित पीठ के सामने होगी। याचिका में 1951 और 1958 में बने कानूनों जिनसे ताजमहल, फतेहपुर सीकरी का किला व आगरा के लाल किले को ऐतिहासिक इमारत घोषित किया गया था, को संविधान के प्रविधानों के विरुद्ध घोषित किए जाने की भी मांग की गई है। याचिका अयोध्या निवासी डा रजनीश सिंह ने अपने अधिवक्ताओं राम प्रकाश शुक्ला एवं रुद्र विक्रम सिंह के जरिये दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा राज्य सरकार को विपक्षी पक्षकार बनाया गया है।याचिका में इतिहासकार पीएन ओक की किताब ताजमहल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय है जिसका निर्माण 1212 एडी में राजा परमार्दी देव द्वारा कराया गया था। बाद में जयपुर के महाराजा मानसिंह ने इसका संरक्षण किया। यह भी कहा गया है कि मुगल शासक शाहजहां ने मानसिंह से इस महल को हड़प लिया था।याचिका में अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस के वहां जाने व उन्हें उनके भगवा वस्त्रों के कारण रोके जाने संबंधी हालिया विवाद का भी जिक्र किया गया है। याचिका में कहा गया है कि कमेटी के गहन अध्ययन से ताजमहल के संबंध में उठ रहे सभी विवाद शांत हो जाएंगे और यह देश के सांप्रदायिक सौहार्द के लिए भी अच्छा होगा।अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी डा. रजनीश सिंह ने कहा कि वह लम्बे समय से सूचना के अधिकार अधिनियम के जरिए 2020 से ताजमहल के 22 बंद कमरों के बारे में तथ्यों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अब हमने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका दायर कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आगरा में ताजमहल के अंदर कमरे खोलने का निर्देश देने की मांग की है।उन्होंने इससे पहले 2020 में केन्द्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय में एक आरटीआई दायर कर कमरों के बारे में जानकारी मांगी थी। आरटीआई के जवाब में संस्कृति मंत्रालय ने केन्द्रीय सूचना आयोग को सूचित किया कि इन कमरों को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था।। इन बंद कमरों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।इस याचिका में कहा गया है कि ताजमहल की चार मंजिला इमारत के ऊपरी और निचले हिस्से में 22 स्थायी रूप से बंद कमरों में शिव का मंदिर है। उनकी याचिका पर हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई होनी बाकी है। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में वकील रुद्र विक्रम सिंह प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। डा. रजनीश सिंह ने कहा कि ताजमहल से जुड़ा एक पुराना विवाद है। उन्होंने कहा कि ताज महल परिसर के भीतर के 22 कमरे बंद रहते हैं और किसी को भी इनके अंदर जाने की इजाजत नहीं है।ऐसा माना जाता है कि इन कमरों में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। उन्होंने कहा कि मैंने तो हाई कोर्ट में तथ्यों का पता लगाने के लिए याचिका दायर की है। मेरा मानना है कि लम्बे समय से बंद पड़े इन 22 कमरों को खोलने और सभी विवादों को विराम देने में कोई हर्ज नहीं है। इसके साथ ही भाजपा नेता ने कोर्ट से राज्य सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की है जो इन कमरों की जांच करेगी और वहां हिंदू देवी-देवताओं मूर्तियों या धर्मग्रंथों से संबंधित सबूत जुटाएगी।अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया कि कई हिंदू समूह दावा कर रहे हैं कि ताजमहल एक पुराना शिव मंदिर है जिसे तेजो महालय के नाम से जाना जाता था और इसका समर्थन कई इतिहासकारों ने भी किया है। ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल का नाम शाहजहां की पत्नी मुमताज महल के नाम पर रखा गया था, हालांकि कई पुस्तकों में शाहजहां की पत्नी का नाम मुमताज-उल-जमानी बताया गया था।इतिहास की कई किताबों में यह है कि 1212 ईस्वी में, राजा परमर्दी देव ने तेजो महालय मंदिर महल (वर्तमान में ताजमहल) का निर्माण किया था। मंदिर बाद में जयपुर के तत्कालीन महाराजा राजा मान सिंह को विरासत में मिला था। उसके बाद संपत्ति राजा जय सिंह ने संभाली। इसके बाद शाहजहां ने 1632 में उस पर कब्जा कर लिया गया था और बाद में इसे पत्नी के लिए एक स्मारक में बदल दिया गया था।