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तबादला होते ही छोड़नी होगी कुर्सी; होंगे स्वत: कार्यमुक्त


🗒 बुधवार, जून 15 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
तबादला होते ही छोड़नी होगी कुर्सी; होंगे स्वत: कार्यमुक्त

लखनऊ । तबादला होने पर भी नई तैनाती के पद पर कार्यभार ग्रहण करने में आनाकानी और टालमटोल नहीं चलेगा। स्थानांतरित कार्मिक यदि तय समय में नई तैनाती के पद पर कार्यभार नहीं ग्रहण करते हैं तो उन्हें स्वत: कार्यमुक्त माना जाएगा।तबादला होने के बाद भी कुर्सी पर जमे रहने वाले कार्मिकों या स्थानांतरित कार्मिकों को उनके नियंत्रक प्राधिकारियों द्वारा कार्यमुक्त न किये जाने की समस्या से निपटने के लिए शासन ने वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए निर्धारित वार्षिक स्थानांतरण नीति में यह व्यवस्था की है।उत्तर प्रदेश की वार्षिक स्थानांतरण नीति के बारे में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से बुधवार को सभी विभागों को शासनादेश जारी कर दिया गया है। शासनादेश में कहा गया है कि स्थानांतरण आदेशों में कार्मिकों को कार्यमुक्त करने की तारीख के संबंध में यह निर्देश अंकित किया जाना चाहिए कि वे आदेश जारी होने की तारीख से अमुक तिथि व एक सप्ताह के अंदर प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बिना नए पद पर कार्यभार ग्रहण कर लें।संबंधित प्राधिकारी भी स्थानांतरित कार्मिकों को इसके अनुसार तत्काल कार्यमुक्त कर दें। स्थानांतरित कार्मिकों को निर्धारित समय में कार्यमुक्त न करना अनुशासनहीनता मानी जाएगी। जो अधिकारी स्थानांतरण आदेशों का पालन न करते हुए संबंधित कार्मिक को कार्यमुक्त नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाएगी।स्थानांतरण नीति के अनुसार समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों के जिले में तीन वर्ष तथा मंडल में सात वर्ष पूरे होने पर तबादले होंगे। तबादले में अवधि के निर्धारण के लिए कटआफ डेट 31 मार्च होगी। विभागाध्यक्ष व मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती को स्थानांतरण के लिए निर्धारित अवधि में नहीं गिना जाएगा।मंडलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम अवधि तीन वर्ष होगी और इसके लिए सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के तबादले पहले किए जाएंगे। समूह 'ख' और 'ग' के कार्मिकों के तबादले यथासंभव मेरिट आधारित आनलाइन ट्रांसफर सिस्टम से किए जाएंगे।प्रोन्नति व सीधी भर्ती की नवनियुक्ति के आधार पर की जाने वाली तैनातियों को तबादले के लिए निर्धारित प्रतिशत की सीमा में नहीं गिना जाएगा। गौरतलब है कि समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों के तबादले संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत और समूह 'ग' व 'घ' के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत कुल कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा तक किये जा सकेंगे।स्थानांतरण सत्र की अवधि बीतने यानी 30 जून के बाद समूह 'क' के कार्मिकों के तबादले विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री के अनुमोदन से होंगे। समूह 'ख', 'ग' व 'घ' के कार्मिकों के तबादले विभागीय मंत्री की मंजूरी से किये जा सकेंगे।मंदित बच्चों के माता-पिता की तैनाती अधिकृत सरकारी चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर उनके विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर की जाएगी, जहां चिकित्सक की समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो।दो वर्ष में सेवानिवृत्त होने वाले समूह 'ग' के कार्मिकों को उनके गृह जिले और समूह 'क' व 'ख' के कार्मिकों को उनके गृह जिले को छोड़ते हुए इच्छित जिले में तैनात करने पर यथासंभव विचार किया जाएगा।

आकांक्षी जिलों, बुंदेलखंड में बिना प्रतिस्थानी के आये कार्यमुक्त नहीं होंगे कार्मिक : प्रदेश के आठ आकांक्षी जिलों-चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती और बहराइच तथा बुंदेलखंड के सभी सात जिलों-झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट व महोबा में तैनात कार्मिकों को उनके नियंत्रक प्राधिकारी तब तक कार्यमुक्त नहीं करेंगे जब तक कि उनके प्रतिस्थानी ने कार्यभार न ग्रहण कर लिया हो।