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लखनऊ के गोमतीनगर मे डिजिटल इंडिया की फर्जी वेबसाइट के जरिये ठगे 11 करोड़


🗒 मंगलवार, जुलाई 24 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 दिल्ली में पांच साल पहले सीबीआइ अधिकारी बनकर ठगी करने वाले शातिर सुधांशु शुक्ला ने अब सरकारी योजनाओं व प्रधानमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को अपना निशाना बनाया और उनके करोड़ों रुपये हड़प लिए। यह बड़ा मामला एसटीएफ ने पकड़ा है। ई-ग्राम डिजिटल नाम से फर्जी वेबसाइट पर केंद्र सरकार की योजना डिजिटल इंडिया का लोगो व प्रधानमंत्री के वीडियो मैसेज अपलोड कर 11 करोड़ की जालसाजी की गई। मास्टर माइंड सुधांशु वेबसाइट के जरिये लोगों को अपने कंपनी की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर ठगता था।

लखनऊ के गोमतीनगर मे डिजिटल इंडिया की फर्जी वेबसाइट के जरिये ठगे 11 करोड़

एसीएफ व वाराणसी पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे लखनऊ के गोमतीनगर से गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद आरोपित का दाखिला वाराणसी के रोहडिय़ा थाने में कराया गया है। जहां मामले में पहले से धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज थी। सुधांशु के अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। गिरोह फर्जी नाम-पतों पर लिए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने बताया कि मूलरूप से प्रतापगढ़ निवासी सुधांशु शुक्ला दिल्ली के रोहणी में रहता है। वह फर्जी वेबसाइट व कंपनी का संचालक है। पूछताछ में सुधांशु ने स्वीकार किया कि लोगों को प्रभावित करने के लिए उसने ई-ग्राम डिजिटल नाम से वेबसाइट बनाने के बाद उस पर डिजिटल इंडिया का लोगो लगाने के साथ ही प्रधानमंत्री के कई वीडियो संदेश अपलोड कर दिए थे। 

एएसपी डॉ.त्रिवेणी सिंह ने बताया कि सुधांशु अब तक करीब 1600 लोगों को अपनी कंपनी की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर ठग चुका है। फ्रेंचाइजी के लिए संपर्क करने वाले व्यक्ति से वह तीन से सात हजार रुपये वसूल लेता था। आरोपित ठगी की रकम अपने दो निजी बैंकों के खातों में जमा कराई थी। वह टोल फ्री व पीआरआइ लाइन की सुविधा लेकर कॉल सेंटर चलाता था और उसके जरिये लोगों को अपने जाल में फंसाता था। वर्ष 2013 में दिल्ली पुलिस ने सुधांशु को सीबीआइ अधिकारी बनकर रेड डालने के आरोप में पकड़ा था। तब उसके पास से फर्जी आइकार्ड व वायरलेस उपकरण भी बरामद हुआ था। इस मामले में वह जमानत पर बाहर था।आरोपित लोगों को अपने व्यवसाय में आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम व माइक्रो एटीएम जैसी मशीनों का प्रयोग करने पर उन्हें भी बैंकिंग जैसी सुविधाएं देने की सुविधा हो जाएगी। इस प्रकार मशीन के नाम पर भी एडवांस रकम लेकर हड़प ली जाती थी।

ई-ग्राम डिजिटल के नाम से बनी वेबसाइट को स्विटजरलैंड के एक वेब सर्वर पर होस्ट किया गया है, जिसमें मालिक का पता दर्ज नहीं है और संपर्क के लिए विदेशी नंबर दिया गया है। वेबसाइट पर कई सरकारी विभागों के लिंक भी उपलब्ध कराए गए, ताकि लोगों का विश्वास हो जाए कि यह डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा है।  

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