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अब दलितों को लुभाने के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश में बनाया बड़ा समीकरण


🗒 शनिवार, दिसंबर 08 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

बहराइच की सांसद सावित्रीबाई फुले ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देकर उत्तर प्रदेश की दलित सियासत में फिर उबाल ला दिया है। सावित्रीबाई ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अब दलितों को लुभाने के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश में बनाया बड़ा समीकरण

सावित्रीबाई फुले के इन आरोपों को बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी भी बल दे रही हैं लेकिन, भाजपा दलित मतदाताओं को मुट्ठी में करने के लिए बड़ा समीकरण तैयार कर रही है। गैर जाटव दलितों को अपना बनाने में अब तो भाजपा कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।बसपा प्रमुख मायावती जाटव बिरादरी की हैं और बहुजन समाज पार्टी में इस जमात को खास तरजीह मिलती है। उत्तर प्रदेश में करीब 25 फीसद दलित मतदाता हैं। इनमें 12 फीसद जाटव और शेष अन्य उपजातियां हैं। अप्रैल में हुए दलितों के देश व्यापी आंदोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के विरोध में सावित्री बाई फुले सबसे आगे थी लेकिन, इटावा के सांसद अशोक दोहरे, नगीना के सांसद डॉ. यशवंत और राबर्ट्सगंज के सांसद छोटेलाल खरवार भी उसी कतार में थे। इनमें ज्यादातर जाटव ही हैं। भाजपा को तभी यह बात खटक गई थी। भाजपा ने हालांकि 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी आरक्षित सीटों पर टिकट बंटवारे में ज्यादातर गैर जाटव दलितों को महत्व दिया। सांसदों के विद्रोह के बाद से ही पार्टी ने खुलकर गैर जाटव दलितों में मजबूत पकड़ के लिए अभियान शुरू किया। संगठन में जाटवों के अलावा खटिक, पासी, धोबी, धानुक, खरवार, कोरी, बाल्मिकी को प्राथमिकता देनी शुरू की। विभिन्न आयोगों में भी गैर जाटवों को खूब पद मिले। यहां तक कि जिन दलित अफसरों पर बहुजन समाज पार्टी हुकूमत का ठप्पा लगा था, उन्हें भी हाल में महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी गई।बीते दिनों भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किये तो दलितों की ज्यादातर उप जातियों को प्रदेश भर से जुटाया गया। हर सम्मेलन में दलित नेताओं ने कोरी समाज से आने वाले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाने का उदाहरण दिया। अनुसूचित जाति आयोग, उप्र का चेयरमैन कोरी समाज के बृजलाल और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन धानुक समाज के रामशंकर कठेरिया को बनाया गया है। इनके भी नाम गिनाए गए।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने मायावती पर टिप्पणी की थी। इसके बाद बसपा ने मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की लेकिन, तब भी भाजपा ने दलितों के बीच मजबूत पकड़ बनाई। बौद्ध धर्म प्रचारकों से गहरा रिश्ता बनाया। डॉ. आंबेडकर के करीबी रहे बौद्ध धर्म गुरु डॉ. धम्मवीरियो के नेतृत्व में 2016 में 40 धर्मगुरुओं की मंडली उत्तर प्रदेश में तीन माह तक दलित बहुल इलाकों में भाजपा के लिए माहौल बनाती रही। अब फिर से भाजपा के आयोजनों में बौद्ध धर्म गुरुओं की सक्रियता देखी जा रही है।भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा का राष्ट्रीय नेतृत्व कौशांबी के सांसद विनोद सोनकर के हाथों में है जबकि उत्तर प्रदेश की कमान मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर संभाल रहे हैं। दोनों गैर जाटव हैं। प्रदेश में भाजपा के दलित सांसदों में भी सबसे बड़ी संख्या पासी समाज की है। 17 में सिर्फ दो ही जाटव हैं। 

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