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बेटे का चेहरा देखने को तीन घंटे भटकते रहे माता-पिता


🗒 शुक्रवार, अप्रैल 12 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

एरा विवि में छठी मंजिल से गिरकर मरे छात्र के पिता का आरोप है कि विवि प्रबंधन के लोगों ने उन्हें गुमराह किया। हर आधे घंटे में अपनी और बेटे की अलग-अलग लोकेशन बताकर परेशान करते रहे। इस कारण तीन घंटे तक ट्रॉमा, एरा और मेडिकल चौकी के बीच परिवारीजन दौड़ते रहे। छात्र के पिता धर्मेंद्र और चाचा मोनू ने बताया कि विवि प्रबंधन से एक स्टाफ ने उन्हें करीब 10:15 बजे सूचना दी थी। सूचना मिलते ही परिवारीजन घर से चल दिए। प्रबंधन ने बताया कि सुधीर का इलाज एरा हॉस्पिटल की इमरजेंसी में चल रहा है। 

बेटे का चेहरा देखने को तीन घंटे भटकते रहे माता-पिता

परिवारीजन जब वहां पहुंचे तो कोई नहीं मिला। कहा गया कि ट्रॉमा सेंटर जाओ। ट्रॉमा पहुंचे तो बताया गया कि सुधीर की मौत हो गई है। केजीएमयू चौकी पहुचें, वहां पंचनामा भरा जाएगा। शव पोस्टमार्टम हाउस के लिए भेजा जा चुका है। केजीएमयू चौकी पहुंचे तो वहां से फिर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। पिता ने बताया कि  वे दोपहर करीब एक बजे तक वे इधर से उधर चक्कर काटते रहे पर विवि प्रबंधन अथवा पुलिस का कोई ऐसा अधिकारी कर्मचारी उन्हें नहीं मिला जो यह बता सके कि बेटे की कैसे मौत हुई है। उसका शव कहां है। एक बजे के बाद परिवारीजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो उन्हें पता चला कि शव का पोस्टमार्टम हो रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शव उनके सिपुर्द किया जाएगा। एरा प्रबंधन ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। घटना की जानकारी पर मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे तो उन्हें घटनास्थल पर जाने से रोक दिया गया। प्रबंधन ने उन्हें घटनास्थल तक नहीं जाने दिया। प्रबंधन के इस रवैये पर कई सवाल खड़े होते हैं। आखिरकार, क्या वजह थी जो मीडियाकर्मियों को उन्होंने अंदर नहीं जाने दिया। सीओ चौक ने बताया कि जिस फ्लोर से छात्र गिरा है, उसके आस पास सीसी कैमरा भी नहीं लगा था। जबकि, अन्य स्थानों पर सीसी कैमरे लगे हैं। छात्र सुधीर पाल के साथियों ने बताया कि सूचना के बावजूद प्रबंधन के लोगों को मौके पर पहुंचने पर करीब 15 मिनट लग गए। इस बीच सुधीर छठे तल से गिरने के बाद घायलावस्था में करीब 15 मिनट तक फर्श पर पड़ा तड़पता रहा। इस बीच अगर उसे तत्काल इमरजेंसी ले जाकर इलाज कराया जाता तो वह बच सकता था। 

एरा चिकित्सा विवि के कुलपति अब्बास अली मेहदी ने बताया कि कॉलेज की प्रिंसिपल व प्रोफेसर और अन्य छात्रों से बात करने पर पता चला कि एक माह से छात्र सुधीर के व्यवहार में परिवर्तन था। पहले वह पढ़ाई में काफी अच्छा था। रोजाना अपने असाइनमेंट पूरा करके दिखाता था। इस दौरान दो-तीन दिन के अंतराल में असाइनमेंट दिखाता था। रोजाना वह आगे बैठता था।गुरुवार को पीछे बैठा था। सुबह नौ बजे से दस बजे की क्लास समाप्त होते ही वह बाहर निकला और छठे तल की खिड़की खोलकर बाहर छज्जे पर पहुंचा। वहां से छलांग लगाकर आत्महत्या की है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए डॉ. मस्तान सिंह के नेतृत्व में डॉ. पीके शर्मा, नर्सिंग प्रिंसिपल डॉ. कुमकुम श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल रीना भोवाल, एडिशनल कंट्रोलर दिलशाद रिजवी सहित पांच सदस्यीय इंटरनल कमेटी बनाई गई है। कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर जल्द से जल्द देगी। 

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