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लखनऊ ट्रॉमा में ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए भटकते रहे परिजन, नवजात की मौत


🗒 रविवार, जून 23 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

केजीएमयू में डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने नवजात की जान ले ली। ट्रॉमा सेंटर में परिजन घंटों गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन नवजात को एनआइसीयू भेज दिया गया। इस दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट हटा लिया गया तो उसकी सांस उखड़ने लगी। परिजन दौड़कर कैजुअल्टी पहुंचे, मगर ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिला।अमेठी के फुर्सतगंज निवासी पूर्णिमा (25) के नवजात बच्चे को सांस लेने में तकलीफ थी। पति पवन व पूर्णिमा करीब 12 बजे उसको लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। फरियाद के बाद बच्चे को कैजुअल्टी में लिया गया। ऑक्सीजन मास्क तो लगा दिया गया, लेकिन इलाज शुरू नहीं हुआ। हालत नाजुक देख दो बजे कैजुअल्टी के स्टाफ ने बच्चे को एनआइसीयू ले जाने को कहा। इस दौरान ऑक्सीजन मास्क हटा दिया गया। बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के ही परिजन बच्चे को लेकर चौथे तल पर एनआइसीयू जाने लगे, तभी उसकी सांसें उखड़ने लगी। वे बच्चे को लेकर फिर कैजुअल्टी भागे। मगर ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिला। वार्ड ब्वॉय नेसिलिंडर ढूढ़ने में 25 मिनट खपा दिए। दोबारा एनआइसीयू ले जाते वक्त नवजात की मौत हो गई।ट्रॉमा सेंटर के सभी वार्डो में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन सिस्टम है। ऐसे में मरीजों के बेड से हटते वक्त ऑक्सीजन मॉस्क हटा लिया जाता है। शिफ्टिंग के लिए मरीजों के सिलिंडर लगाने पड़ते हैं। यहां इमरजेंसी में भी सिलिंडर व्यवस्था ध्वस्त है।बाराबंकी से ट्रॉमा सेंटर में एंबुलेंस में आए बच्चे के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिला। वह डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस में कैद रहा। बाद में बेड खाली न होने का हवाला देकर उसे लौटा दिया गया। गुड़िया नामक महिला के बच्चे को सांस लेने में दिक्कत थी। एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलिंडर फिक्स था। नीरज कैजुअल्टी में स्टाफ से ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए फरियाद करता रहा। मगर, बच्चे को एंबुलेंस से कैजुअल्टी तक ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं दिया गया।बच्चे की मौत पर परिजनों ने हंगामा किया। पवन व पूर्णिमा का आरोप था कि ट्रॉमा में समय पर इलाज नहीं मिला। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत करने की बात कही।

लखनऊ ट्रॉमा में ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए भटकते रहे परिजन, नवजात की मौत

क्या कहते हैं जिम्मेदार ?

  • प्रवक्ता केजीएमयू डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक, घटना की जानकारी नहीं है। यदि शिकायत मिलती है, तो जांच कराई जाएगी। दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  • ऑक्सीजन इंचार्ज डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि मैं दिल्ली में हूं, घटना की जानकारी नहीं है। ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी नहीं है। विभागों से जो भी डिमांड भेजी जाती है, वह आपूर्ति कर दी जाती है। सेंटर में 25 से 30 सिलेंडर रोज भेजे जाते हैं। स्टाफ की जिम्मेदारी है सिलिंडर देना।

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