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खनन की काली कमाई मे गायत्री प्रजापति के बाद बढ़ेंगी अखिलेश यादव की मुश्किलें


🗒 गुरुवार, जुलाई 11 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेडऩे वाली नरेंद्र मोदी सरकार के निर्देश पर सीबीआइ ने चीनी मिल घोटाले में छापेमारी के बाद कल समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हुए करोड़ों के खनन घोटाले में कार्रवाई शुरू की है। इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश के आला अफसरों में खलबली मच गई।इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर लंबे समय से खनन घोटाले की कडिय़ां खंगाल रही सीबीआइ ने पहली बार समाजवादी पार्टी सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति पर शिकंजा कसा है। आइएएस अधिकारी बी.चंद्रकला के बाद सूबे के पांच और आइएएस के नाम भी खनन घोटाले के केस का हिस्सा बन चुके हैं। सीबीआइ जिस तेजी से खनन की काली कमाई की कडिय़ां खंगाल रही है, उससे जल्द पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं।उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव ने अपनी ही सरकार में ई-टेंडर की नीति लागू कराई थी। इस मामले में जांच एजेंसी की पड़ताल में यह भी सामने आया था कि अखिलेश यादव ने खुद खनन मंत्री के रूप में 14 पट्टों के आवंटन को स्वीकृति दी थी, जिनमें 13 पट्टों का आवंटन एक ही दिन में हुआ था। अखिलेश यादव के बाद खनन मंत्री बने गायत्री प्रसाद प्रजापति ने आठ पट्टों के आवंटन को स्वीकृति दी थी। पूर्व मंत्री गायत्री वर्तमान में दुष्कर्म के मामले में जेल में हैं।सीबीआइ ने खनन घोटाले में पहला केस इस वर्ष की शुरुआत में ही दो जनवरी को 2008 बैच की आइएएस अधिकारी बी.चंद्रकला व समाजवादी पार्टी से एमएलसी रमेश मिश्रा समेत 11 नामजद आरोपितों के खिलाफ दर्ज किया था। इसके बाद बी.चद्रकला समेत अन्य आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में हाथ लगे दस्तावेजों के जरिये अपनी पड़ताल को बढ़ाया। अब सीबीआइ ने दो और केस दर्ज किये हैं, जिनमें पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के अलावा आइएसस अधिकारी अभय सिंह, संतोष कुमार, विवेक, देवी शरण उपाध्याय व जीवेश नंदन भी नामजद आरोपित हैं।सीबीआइ ने पूर्व में सपा सरकार के शुरुआती दौर में खनन विभाग के सचिव रहे जीवेश नंदन से पूछताछ भी की थी। पूरे मामले में खनन विभाग के कई अधिकारियों पर भी जांच एजेंसी का शिकंजा कसेगा। दस्तावेजों में नियमों को दरकिनार कर किये गये खेल की परतें खुलती जा रही हैं।

खनन की काली कमाई मे गायत्री प्रजापति के बाद बढ़ेंगी अखिलेश यादव की मुश्किलें

उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने वाली भाजपा अपने नारे पर केंद्रित हो गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जहां केंद्र की सीबीआइ और ईडी जैसी संस्थाओं के चाबुक चल रहे हैं वहीं राज्य की सतर्कता अधिष्ठान, ईओडब्ल्यू और एसआइटी जैसी जांच एजेंसियों को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुली छूट दी है। योगी आदित्यनाथ ने सख्त संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के सभी लंबित मामलों की जांच और मुकदमा चलाने में तेजी लाई जाए। भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुहिम शुरू की है। प्रदेश की भाजपा सरकार के करीब ढाई वर्ष होने को हैं और अब 2022 में फिर अगले विधानसभा चुनाव की चुनौती भी खड़ी है। मुख्यमंत्री जल्द ही राज्य की सभी जांच एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे। वह इस सिलसिले में पहले भी बैठक कर चुके हैं। चीनी मिलों की बिक्री, गोमती रिवर फ्रंट घोटाला, भर्ती परीक्षा समेत पिछली सरकारों में हुए कई भ्रष्टाचारों की जांच सीबीआइ कर रही है लेकिन, अभी कई घोटालों की जांच राज्य सरकार के पास है।सतर्कता अधिष्ठान बसपा शासन में स्मारक घोटाले की जांच एक जनवरी, 2014 से ही कर रहा है। अभी तक यह जांच किसी नतीजे पर नहीं है। स्मारक घोटाले की फाइलें फिर से खुलेंगी। सतर्कता अधिष्ठान में भ्रष्ट अफसरों से लेकर आय से अधिक संपत्ति समेत करीब 400 मामले लंबित हैं। इनमें अभियोजन की स्वीकृति के लिए विधिक परामर्श भी तेजी से लिये जा रहे हैं। इसी तरह ईओडब्ल्यू को भी भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की अनुमति दी जा रही है। ईओडब्ल्यू ने भी करीब डेढ़ सौ मामलों में अभियोजन की स्वीकृति मांगी है। तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त डा. प्रभात कुमार ने भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच की और अफसरों को दोषी पाया। उन अफसरों को वृहद दंड देने के लिए भी प्रक्रिया शुरू की गई है।समाजवादी पार्टी सरकार में उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक, राज्य सहकारी ग्राम विकास बैंक समेत कई सहकारी संस्थाओं में हुई भर्तियों की जांच एसआइटी को दी गई है। इस मामले में सहकारिता के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है लेकिन, अभी एसआइटी अपनी जांच में किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इस पर भी मुख्यमंत्री कार्यालय की नजर है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से लेकर पिकप भवन अग्निकांड को गंभीरता से लिया है। ढाई वर्ष के भीतर हुई सभी गड़बडिय़ों की जांच किसी न किसी एजेंसी को दी गई है। अब इन जांचों में भी तेजी आएगी। योगी ने इन जांचों की मानीटरिंग के लिए अपने कार्यालय को विशेष रूप से हिदायत दी है। 

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