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लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी यहां ऑक्सीजन की कमी की शिकायत


🗒 गुरुवार, अगस्त 08 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

जनपथ स्थित विकास भवन सचिवालय में बैठने वाले एक अधिकारी को जब लोकभवन में मुख्यमंत्री कार्यालय का अनुभाग अधिकारी बनाया गया तो वह उत्साह से भर गए। भारी खर्च और आधुनिक तकनीक से बनी राज्य सरकार की इस सर्वोच्च इमारत में बैठने का गौरव, लेकिन कुछ ही समय में यह उत्साह काफूर भी हो गया। सांस की ऐसी दिक्कत बढ़ी कि इन्हेलर का प्रयोग करना पड़ गया। किसी तरह तबादला लेकर बापू भवन पहुंचे तो जान में जान आई। अब उन्हें कार्यालय में इमरजेंसी के तौर पर इन्हेलर नहीं लेना पड़ता है।यह समस्या केवल एक अनुभाग अधिकारी की नहीं है। लोकभवन में बैठने वाले ज्यादातर अधिकारी-कर्मचारी यहां ऑक्सीजन की कमी की शिकायत कर रहे हैं। वे बताते हैं कि लोकभवन में मुख्य द्वार के अलावा ऊपर से नीचे तक न कोई खिड़की खुली है और न ही कहीं से हवा आने-जाने की व्यवस्था है। नतीजा यह कि दो घंटे में यहां बैठे लोगों का दम घुटने लगता है। सचिवालय संघ ने इसकी शिकायत सचिवालय प्रशासन विभाग से की, जिस पर जांच समिति गठित हुई। समिति ने पिछले दिनों लोकभवन का दौरा कर तय किया कि भवन में ऑक्सीजन की मात्रा वैज्ञानिक तरीके से जांची जाएगी, लेकिन फिलहाल इस जांच पर बात अटक गई है।लोकभवन में ऑक्सीजन की जांच के लिए गठित समिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नामित किए गए भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आइआइटीआर) के चीफ साइंटिस्ट डॉ.एससी बर्मन कहते हैं कि लोकभवन में ऑक्सीजन कम है या नहीं, यह इमारत में उपकरण द्वारा जांच करने के बाद ही बताया जा सकता है, जबकि जांच समिति के अध्यक्ष व राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश शुक्ल के मुताबिक अब किसी जांच की जरूरत नहीं है। वह ऑक्सीजन की कमी की शिकायत को ही निराधार मान रहे हैं। उनका कहना है कि एनेक्सी और अन्य सचिवालय भवनों में कार्मिक खुले गलियारों वाले माहौल में काम करने के अभ्यस्त हो चुके हैं, इसलिए लोकभवन के बंद वातावरण में उन्हें समस्या हो रही है।राजकीय निर्माण निगम की ओर से लोकभवन की देखरेख करने वाले अधिशासी अभियंता एके मिश्र का दावा है कि लोकभवन के एसी प्लांट के साथ ऑक्सीजन मिक्सिंग प्लांट भी लगा है। इससे एसी की ठंडी हवा के साथ कमरों में ऑक्सीजन भी पहुंच रही है, इसलिए भवन में ऑक्सीजन का स्तर कम होना मुमकिन नहीं है।सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र का कहना है कि हवा में ऑक्सीजन की मात्रा 21 फीसद से कम होने पर कार्मिकों को तुरंत और सीधा नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन लगातार ऐसे माहौल में बैठने से मस्तिष्क, लिवर व किडनी की क्षमता कम हो रही है, जिससे कार्मिकों की उम्र घट रही है। मेट्रो स्टेशन की तरह मिश्र ने लोकभवन में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मांग की है।

लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी यहां ऑक्सीजन की कमी की शिकायत

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