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सीएम योगी आदित्यनाथ कई विभागों के कामकाज से खफा


🗒 शुक्रवार, अगस्त 09 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और शुचिता पर जोर दिया है, लेकिन कई विभाग उनकी कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं। कुछ विभागों के रवैये से योगी खफा हैं। तबादलों से लेकर कामकाज की वह अब नए सिरे से समीक्षा कर रहे हैं। हाल में कई विभागों में हुए तबादलों को निरस्त कर उन्होंने साफ कर दिया कि अब मंत्रियों की मनमानी नहीं चलेगी।मुख्यमंत्री की निगाह मंत्रियों के कामकाज पर टिकी है। स्टांप एवं निबंधन विभाग में उप निबंधक से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के करीब 350 तबादले गुरुवार को निरस्त कर दिये गए। इन तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंची थी। इनमें 30 जून से लेकर एक अगस्त के बीच करीब 60 उप निबंधकों के भी तबादले किये गए थे। इन तबादलों के चलते विभागीय मंत्री की भी शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची। मुख्यमंत्री ने इन तबादलों को निरस्त कर स्पष्ट कर दिया कि चाहे कोई भी हो, लेकिन अनियमित तरीके से कामकाज करेगा तो उस पर अंकुश लगाया जाएगा।स्टांप एवं निबंधन विभाग कोई अकेला विभाग नहीं है जहां हुए तबादलों को मुख्यमंत्री के निर्देश पर निरस्त किया गया। कई जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के भी तबादले निरस्त किये गए। ये तबादले उस समय कर दिये गए थे जब स्कूल चलो अभियान चल रहा था। जाहिर है कि यह व्यवस्थागत खामी थी जिसका असर अभियान पर पड़ना स्वाभाविक था। हद तो तब हो गई जब स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ और सीएमएस के तबादले किये गए और शाम को मुख्यमंत्री कार्यालय ने आदेश जारी कर इन पर रोक लगा दी। ये तबादले उस समय किया गया था जब संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा था। मुख्यमंत्री ने इस पर भी नाराजगी जतायी थी।मुख्यमंत्री तक कुछ अफसरों की भी शिकायत पहुंची है। ये अफसर मंत्रियों से साठ-गांठ कर नियमों की अनदेखी कर फाइलों का निस्तारण कर रहे हैं। ऐसे अफसरों पर अभिसूचना तंत्र के साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय की भी नजर है। कई विभागों के कामकाज की ऑडिट कराने से लेकर वह अपने स्तर पर छानबीन भी करा रहे हैं।मुख्यमंत्री की मंशा है कि थाना, ब्लाक, तहसील और जिलों में काम काज पारदर्शी तरीके से हो। इसके लिए उन्होंने मंडलायुक्तों को विशेष रूप से जवाबदेह बनाया है। अभी हाल में बुलंदशहर के एसएसपी एन कोलांची शिकायत पर निलंबित किये गये थे। गुरुवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलों में डीएम और एसएसपी की दफ्तर में मौजूदगी और कामकाज की समीक्षा की गयी। करीब एक दर्जन डीएम और आधा दर्जन एसएसपी कसौटी पर खरा नहीं पाये गये। उन सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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