सुजीत पाण्डेय लखनऊ और आलोक सिंह गौतमबुद्धनगर के बने पहले पुलिस कमिश्नर

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सुजीत पाण्डेय लखनऊ और आलोक सिंह गौतमबुद्धनगर के बने पहले पुलिस कमिश्नर


🗒 सोमवार, जनवरी 13 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
सुजीत पाण्डेय लखनऊ और आलोक सिंह गौतमबुद्धनगर के बने पहले पुलिस कमिश्नर

उत्तर प्रदेश की सरकार की कैबिनेट बैठक में लखनऊ और गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में पुलिस कमिश्नर प्रणाली का प्रस्ताव पास हो गया है। लोक भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर मुहर लग गई है।लखनऊ में एडीजी सुजीत पांडेय और गौतमबुद्धनगर में एडीजी आलोक सिंह पहले पुलिस कमिश्नर होंगे। सुजीत पाण्डेय फिलहाल एडीजी जोन प्रयागराज के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह लखनऊ में पुलिस महानिरीक्षक तथा एसएसपी के पद पर भी रहे हैं। कमिश्नर बनाए गए सुजीत पांडेय का लखनऊ से पुराना नाता रहा है। वह लखनऊ के एसएसपी के साथ ही आईजी जोन लखनऊ भी रह चुके हैं। ऐसे में वह लखनऊ की पुलिसिंग से वाकिफ है। सुजीत पाण्डेय मूल से भागलपुर बिहार के निवासी हैं। 1994  बैच के आईपीएस अधिकारी सुजीत पाण्डेय सात वर्ष तक सीबीआई में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। इस दौरान उन्होंने मुम्बई के 26 नवंबर के बम ब्लास्ट में नदंडी ग्राम समेत अन्य जगह की कमान संभाली थी। वह उत्तर प्रदेश के एक दर्जन जिलों में बतौर एसपी, एसएसपी तथा डीआईजी के पद पर भी तैनात रहे हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश एसटीएफ में भी सेवा दे चुके हैं।मेरठ में आईजी जोन के पद पर तैनात आलोक सिंह को गौतमबुद्धनगर के पुलिस कमिश्नर की कमान मिली है। उनका हाल ही में एडीजी रैंक पर प्रमोशन हुआ है। आलोक सिंह वर्तमान में मेरठ में एडीजी/आइजी के पद पर तैनात हैं और उनका जन्‍म स्‍थान अलीगढ़ है। आलोक सिंह 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।पुलिस कमिश्नर बनाए जाने के बाद आलोक सिंह ने बताया कि इससे पुलिस व्यवस्था में सुधार होगा। साथ ही पीड़ितों को न्याय में देरी नहीं होगी। उन्‍होंने बताया कि नई व्यवस्था में काफी नए प्रयोग किए जाएंगे, साइबर अपराध से लेकर लेकर पुलिस शांति भंग के मामले में भी आरोपितों को सीधे जेल भेजा जाएगा। आलोक सिंह का कार्यकाल मेरठ में भी काफी चर्चाओं में रहा। उन्होंने नकली पेट्रोल प्रकरण में अहम भूमिका निभाई। जिसमें शासन स्तर तक जांच बैठे गई थी। इसमें उच्च अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। इस मामले में 11 लोगों को जेल भेजा गया था जबकि दो इस्पेक्टर नप गए।उसके अलावा पांच आईपीएस अफसरों पर एडीजी आलोक सिंह की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई। इन अफसरों पर मेरठ में कप्तान की तैनाती के लिए व्हाट्सएप चैटिंग पर 80 लाख की बोली लगाई गई थी। जांच रिपोर्ट के बाद ही शासन ने कार्रवाई करते हुए नोएडा के एसएसपी के निलंबन का आदेश जारी किया था। आलोक सिंह भ्रष्‍टाचार के खिलाफ सख्‍त कदम उठाने के लिए जाने जाते हैं। नोएडा और गाजियाबाद में भ्रष्टचार के लिप्‍त पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई थी, करीब छह पुलिसकर्मियों को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भिजवा चुके हैं।

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