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केजीएमयू के ट्रॉमा में जबरन कोरोना मरीज भर्ती कराने पर शासन ने तलब की रिपोर्ट


🗒 मंगलवार, अप्रैल 14 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

केजीएमयू में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ने पर शासन खफा है। ट्रॉमा सेंटर में कोरोना पीड़ित को जबरन भर्ती कराए जाने पर शासन ने रिपोर्ट तलब की है। जिस पर कुलपति ने जांच कमेटी गठित कर दी है।  ट्रामा सेंटर में शनिवार दोपहर करीब तीन बजे नजीराबाद के नया गांव मोहल्ला निवासी 64 वर्षीय मरीज को लाया गया। डायबिटीज से पीड़ित मरीज को बुखार, खांसी और सांस फूलने की दिक्कत थी। ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टरों ने बुजुर्ग को कोरोना संदिग्ध मानते हुए संस्थान के फीवर क्लीनिक में दिखाने का सुझाव दिया। मगर, मरीज के परिवारजन ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर से ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करने को लेकर अड़ गए। उन्होंने संस्थान के ही समुदाय विशेष के शिक्षक को फोन कर दिया। चर्चा है कि इसके बाद समुदाय विशेष के शिक्षक व ट्रॉमा कैजुअल्टी इंचार्ज जैसे सीनियर ने जूनियर डॉक्टरों पर दबाव डाल संदिग्ध मरीज को भर्ती करवा दिया। सोमवार को बुजुर्ग में कोराना वायरस की पुष्टि होने पर सनसनी फैल गई। ऐसे में डॉक्टर, नर्स, कर्मचारी मिलाकर 65 लोगों को क्वारंटाइन किया गया।शनिवार को कोरोना पीडि़त बुजुर्ग ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जबकि संदिग्ध मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग व्यवस्था थी। इसके बावजूद सीनियर डॉक्टर की करतूत पर केजीएमयू प्रशासन खामोश रहा। सोमवार को नौ बजे मीडिया ग्रुप पर मरीज की जांच रिपोर्ट भी जारी कर दी गई। मगर, ट्रॉमा सेंटर में पॉजिटिव मरीज की भर्ती का मामला दबाए रखा। शाम तक घटना के तूल पकडऩे मामला सामने आया।कुलपति प्रो. एमएल बी भट्ट के मुताबिक शासन ने रिपोर्ट तलब की है। मामले की जांच कमेटी बना दी गई है। इसके अध्यक्ष प्रो वीसी डॉ. जीपी सिंह हैं। वहीं सदस्य डीन मेडिसिन डॉ. विनीता दास, चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा व ट्रॉमा सीएमएस डॉ. संतोष कुमार हैं। कमेटी से जल्द जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। बुधवार से पूरे मामले की जांच शुरू होगी। साथ ही सीनियर डॉक्टर व अन्य के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।उल्लेखनीय है कि फोन पर जूनियरों पर दबाव डालने वाले समुदाय विशेष के डॉक्टर स्वयं कोरोना टीम में शामिल हैैं। इसके बावजूद ट्रॉमा सेंटर में आम मरीजों के बीच बिना सुरक्षा उपकरण ड््यूटी कर रहे चिकित्सकों से भर्ती कराना सवालों के घेरे में है। वहीं मरीज का सऊदी यात्रा को छिपाना और तब्लीगी कनेक्शन पर भी गहरी आशंका जताई जा रही है।मरीज के परिजनों व मरीज को भर्ती कराने वालों पर एपेडमिक एक्ट के तहत कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच परिवारजन ने इलाज में लापरवाही के आरोप की भी शिकायत की है। चर्चा है कि यह कानूनी दांव-पेच का एक हिस्सा है। यह शिकायत एक रणनीति के तहत कराई गई है, ताकि जांच को भी गुमराह किया जा सके।

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