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डॉक्टरों का फर्जीवाड़ा छिपाने को बनाया शॉर्टकट प्लान


🗒 शुक्रवार, जून 26 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

शासन ने डॉक्टरों के प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए हैं। ऐसे में केजीएमयू के कुलसचिव ने विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर संबंधित प्रमाण पत्रों का ब्योरा मांगा है। संस्थान में कई डॉक्टरों में फर्जीवाड़ा खुलने के भय से हड़कंप मच गया। लिहाजा, विरोध के सुर उठने लगे। यह देखकर 24 घंटे बाद सरकारी आदेश को पूरा करने के लिए शॉर्टकट प्लान बना डाला गया। इसमें कई दस्तावेजों को जांच से बाहर कर दिया गया।चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेष सचिव मार्कंडेय शाही ने 22 जून को सभी डॉक्टरों के प्रमाण पत्रों के जांच के आदेश दिए हैं। 23 जून को केजीएमयू के कुलसचिव ने सभी विभागाध्यक्ष, चिकित्सा संकाय, दंत संकाय, नर्सिंग संकाय को प्रमाण पत्रों के जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें शिक्षक की तैनाती वाले विभाग का नाम, शिक्षक का नाम, वर्तमान पदनाम, मार्कशीट, सर्टीफिकेट, डिग्री, एमसीआइ-डीआइसी सर्टीफिकेट, अनुभव प्रमाणपत्र, नियुक्ति पत्र, कार्यभार ग्रहण करने का चार्ज सर्टीफिकेट समेत अन्य दस्तावेज तलब किए थे। आदेश पहुंचते ही फर्जीवाड़ा के खुलासा होने पर सीनियर डॉक्टरों ने विरोध तेज कर दिया। कारण, कई वरिष्ठ शिक्षकों के पास नियुक्ति पत्र, चार्ज सर्टीफिकेट ही नहीं हैं। जुगाड़ के जरिए नौकरी के साथ-प्रमोशन भी होते चलेे गए। लिहाजा, पोल खुलने के भय से डॉक्टर बगावत पर उतर आए।24 घंटे बाद ही 24 जून को कुलसचिव ने दूसरा आदेश जारी कर दिया। इसमें सिर्फ एमसीआइ का प्रमाण पत्र व डिग्री की जांच का ही आदेश दिया। इसको लेकर संस्थान के एक डॉक्टर ने शासन से शिकायत की है। उनका कहना है कि फर्जीवाड़ा पर पर्दा डालने के लिए शॉर्टकट नया प्रोफॉर्मा जारी किया गया है। सौ के करीब डॉक्टरों के प्रमाणपत्रों पर उठे सवाल केजीएमयू में 550 के करीब डॉक्टरों के पद हैं। वहीं, 450 की तैनाती है। इसमें वर्ष 2015-16 में करीब सौ डॉक्टरों के अनुभव प्रमाणपत्रों को लेकर सवाल उठाए गए थे। तत्कालीन कुलपित ने सभी डॉक्टरों को मेल भेज कर जवाब मांगा।इसमें संबंधित प्रमाण पत्र एमसीआइ के मानकों के अनुरूप खरे नहीं पाए गए। इसके बाद बवाल बढऩे पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वहीं विभिन्न अनुभव दर्शाकर नियमों को दरकिनार कर प्रोफेसर बनाने की शिकायतें हुईं। इसमें एमसीआइ ने मामले को संज्ञान लिया। साथ ही मई 2009 को केजीएमयू के अफसरों को पत्र भेजकर जवाब-तलब किया गया। मगर, कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में दर्जनों डॉक्टरों के प्रमाण पत्र सवालों के घेरे में हैं।कुलसचिव से संबंधित मामले पर जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ शिक्षकों के सुझाव पर प्रमाणपत्रों के जांच संबंधी आदेश में बदलाव किया गया है। - डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू 

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