मासूम को सकुशल लाने के लिए दबाव में थी पुलिस, पल-पल काम आया संयम

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मासूम को सकुशल लाने के लिए दबाव में थी पुलिस, पल-पल काम आया संयम


🗒 रविवार, जुलाई 26 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
मासूम को सकुशल लाने के लिए दबाव में थी पुलिस, पल-पल काम आया संयम

कानपुर अपहरण कांड में अपयश का कलंक झेल रही उत्तर प्रदेश पुलिस के सामने गोंडा के अपहरण से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी, लेकिन पुलिस ने सूझबूझ और कुशलता से काम लिया और धैर्य व संयम के साथ बच्चे को नुकसान पहुंचे बिना ऑपरेशन पूरा कर लिया। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां पल-पल की खबर ले रहे थे, वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी चौकन्ने थे। यह सम्मिलित प्रयास आखिर रंग लाया और महज चार घंटे में ही मासूम वापस लौट चुका था।गोंडा में शुक्रवार की दोपहर अपहृत हुए मासूम को सकुशल बरामद करने का पुलिस पर खासा दबाव था, जबकि बीती रात 12 बजे तक गिरोह का कोई ठोस सुराग नहीं लग सका था। एसटीएफ और गोंडा पुलिस की साझा टीमें संदेह के घेरे में आए 50 लोगों से पूछताछ कर चुकी थीं। एक तरफ बच्चे को हर हाल में सकुशल बरामद करने का प्रेशर और दूसरी ओर तेजी से भाग रहा समय। पुलिस के पास बस संयम ही एक हथियार था। आखिरकार रात 12:05 बजे एसटीएफ को उस ऑल्टो कार की पुुख्ता जानकारी मिल गई, जिससे गोंडा के करनैलगंज क्षेत्र निवासी बीड़ी व्यवसायी हरि कुमार गुप्ता के आठ वर्षीय पौत्र नमो को अगवा किया गया था। यह भी तय हो गया था कि करनैलगंज में ही करीब चार किलोमीटर के दायरे में अपहृत बालक को रखा गया है। तब पुलिस ने बाइकों से पूरे इलाके को घेर लिया और शनिवार सुबह करीब 4:10 बजे वह घड़ी आई, जब ऑपरेशन पूरा हुआ।एसटीएफ और गोंडा पुलिस के लिए इस ऑपरेशन में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से लेकर फील्ड इंटेलीजेंस दोनों काम आईं। फिरौती की रकम के लिए जिस नंबर से कॉल की गई थी, वह करीब एक साल से बंद था और 10 दिन पहले ही दोबारा एक्टीवेट हुआ था। करीब 150 नंबर की छानबीन के दौरान इस नंबर के यूजर तक एसटीएफ पहुंचने में कामयाब रही। सिम बेचने वाले दुकानदार से पूछताछ के बाद पुलिस उस शख्स तक पहुंची, जो इस नंबर का इस्तेमाल कर रहा था। अब तक रात के करीब नौ बज चुके थे। पता चला कि युवक ने वह नंबर तो कुछ दिन पहले ही अपनी बहन को दिया था। पड़ताल और आगे बढ़ी तो युवक की बहन से एक शख्स के मिलने आने की बात तस्दीक हुई। यह भी पता चला कि वह शख्स ऑल्टो कार से आता था।अपहरण कांड की छानबीन मेें जुटी पुलिस के पास अब तक वारदात में इस्तेमाल हुई यूपी 43 नंबर की ऑल्टो कार के इस्तेमाल का ही सुराग था। कुछ फुटेज भी मिले थे। अब एक बार फिर ऑल्टो का जिक्र आते ही पुलिस की आंखों में उम्मीद की चमक जागी। पूछताछ में सामने आया कि ऑल्टो से आने वाला शख्स आरोपित राजा पांडेय था और युवती ने वह नंबर उसे ही दिया था। पुलिस को आखिरकार रात करीब 12 बजे पहला ठोस सुराग मिल चुका था। वह गिरोह को पहचान चुकी थी। फिर बड़े संयम के साथ अगले चार घंटों तक पुलिस ने करनैलगंज क्षेत्र के करीब चार किलोमीटर के क्षेत्र को घेरना शुरू किया। मोटरसाइकिलों पर सवार पुलिसकर्मी पहले चप्पे-चप्पे पर लगा दिए गए। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद शनिवार तड़के करीब 4:10 बजे अपहृत बालक को एक कमरे से सकुशल बरामद करने में सफलता हाथ लगी। एडीजी कानून-व्यवस्थ प्रशांत कुमार ने कहा कि जब यह पता चला कि गिरोह नया है, तो चुनौती काफी बढ़ गई थी। अधीनस्थों को बार-बार यही हिदायत थी कि चाहे कुछ हो जाए, बच्चे को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। बच्चे को सकुशल बरामद कर पुलिस ने अपनी कार्यकुशलता का प्रमाण दिया है। शासन ने अपहृत बालक को सकुशल बरामद करने वाली एसटीएफ व गोंडा पुलिस की टीमों को एक-एक लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की है।

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