यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

जालसाजी के आरोप में हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश के चार साथी गिरफ्तार, नौकरी के लिए ठगे थे लाखों रुपये


🗒 गुरुवार, सितंबर 03 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
जालसाजी के आरोप में हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश के चार साथी गिरफ्तार, नौकरी के लिए ठगे थे लाखों रुपये

गोरखपुर के उरुवा थाने के हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश यादव की राजधानी के वृंदावन कॉलोनी ने हुई हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने गुरुवार को दुर्गेश के चार साथियों को भी गिरफ्तार किया है। डीसीपी पूर्वी चारु निगम के मुताबिक दुर्गेश के साथियों के पास से बड़ी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपितों ने दुर्गेश के साथ मिलकर सैकड़ों लोगों से लाखों रुपये लिए थे। पुलिस को आरोपितों के पास से पीडब्ल्यूडी, भू-विभाग, शिक्षा, रेलवे और सचिवालय समेत अन्य विभागों से संबंधित जाली दस्तावेज मिले हैं।डीसीपी ने बताया कि एटा जिले के सिंह फंफादू निजोर निवासी मानवेन्द्र सिंह व सोमेंद्र कुमार तथा किशनपुर, गोला घाट गोरखपुर निवासी संजीत कुमार और तिलौरा सहजनवां निवासी अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया है। चारों आरोपितों के खिलाफ पीजीआइ थाने में जालसाजी व दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने समेत विभिन्न धाराओं में एफआइआर दर्ज की गई है। आरोपितों के पास से विभिन्न विभागों के फर्जी मुहर और नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र व अन्य कागजात बरामद किए गए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि पलक और मनीष ने दुर्गेश को सचिवालय में क्लर्क व कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरीं के लिए रुपये दिए थे। इस दौरान दुर्गेश ने अन्य लोगों की नौकरी लगवाने की बात भी कही थी। इस पर पलक और मनीष ने कुछ युवकों को इसकी जानकारी दी और उनसे रुपये लेकर दुर्गेश को दे दिए थे। पलक का कहना है कि उसने अपने व पांच अन्य लोगों की नौकरी के लिए दुर्गेश को 27 लाख रुपये दिए थे। इनमे पांच लाख रुपये बैंक से स्थानांतरित किए गए थे और शेष 20 लाख रुपये नगद दिए थे। पलक और मनीष ने पुलिस को बताया कि दुर्गेश से उनकी मुलाकात वर्ष 2017 में हुई थी। रुपये लेने के बाद से वह लगातार उन्हें टरका रहा था।सात माह पहले दुर्गेश की तलाश के दौरान पलक और मनीष की मुलाकात हुई थी। दोनों ने एक-दूसरे से पूरी बात बताई थी और तय किया था कि जिसे भी दुर्गेश पहले मिलेगा वह सूचित करेगा। इसी क्रम में दोनों बुधवार को दुर्गेश की तलाश करते करते वृंदावन कॉलोनी पहुंच गए थे और वारदात को अंजाम दिया था। साथी की गाड़ी लेकर आया था दुर्गेश, लगा था सचिवालय पास एसीपी कैंट बीनू सिंह ने बताया कि दुर्गेश अपने साथी गोला गोरखपुर निवासी राजेन्द्र प्रसाद की कार से लखनऊ आया था। कार पर सचिवालय का पास लगा था। यह पता लगाया जा रहा है कि वह पास किसके नाम पर जारी है। पुलिस को शक है कि सचिवालय का पास फर्जी है। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए पुलिस ने सचिवालय के अधिकारियों से संपर्क किया है। पुलिस का कहना है राजेन्द्र प्रसाद के खिलाफ राजधानी के विकासनगर थाने में जालसाजी की एफआइआर दर्ज है। पुलिस राजेन्द्र का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है।

लखनऊ से अन्य समाचार व लेख

» यूपी में कोरोना के 2,170 नए रोगी मिले, स्वस्थ हुए 2,253

» लखनऊ में शादी के दूसरे दिन फंदे से लटका मिला युवक का शव

» लखनऊ में पॉल‍िटेक्‍न‍िक के पास बाइक में लगी आग, बाल-बाल बचे जीजा साली

» लखनऊ में कल से 48 घंटे नहीं बिकेगी शराब, दुकान खुली तो रद होगा लाइसेंस

» धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले करनी होगी घोषणा

 

नवीन समाचार व लेख

» व्यापारियों ने अफसरों से छीने दस्तावेज,हंगामा

» यूपी में कोरोना के 2,170 नए रोगी मिले, स्वस्थ हुए 2,253

» बलिया में मां-बेटी हत्याकांड की जांच को अहिरौली गांव पहुंचे डीआइजी, तीन नामजद आरोपित हिरासत में

» वैक्सीन के साथ और तेज होगी कोरोना डिप्लोमेसी, कोई भी देश वैक्सीन बनाये उसे भारत की लेनी होगी मदद

» कन्नौज में विवाहिता को बंधक बनाकर किया सामूहिक दुष्कर्म