राजधानी मे ट्रांसपोर्टर के साथी पर 50 लाख रुपये हड़पने और धमकी का मुकदमा दर्ज

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राजधानी मे ट्रांसपोर्टर के साथी पर 50 लाख रुपये हड़पने और धमकी का मुकदमा दर्ज


🗒 शुक्रवार, अक्टूबर 09 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
राजधानी मे ट्रांसपोर्टर के साथी पर 50 लाख रुपये हड़पने और धमकी का मुकदमा दर्ज

लखनऊ, राजधानी के नाका क्षेत्र के पान दरीबा में गोली मारकर पत्नी मधु की हत्या के बाद आत्महत्या करने वाले ट्रांसपोर्टर अनुरूप सिंह के मामले में नया मोड़ आया है। अनुरूप सिंह के बेटे ने उनके दोस्त धर्मेंद्र यादव पर आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी और 50 लाख रुपये हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। बता दें, 26 अगस्त को देर रात ट्रांसपोर्टर अनुरूप सिंह ने पत्नी मधु की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को गोली मार ली थी। अनुरूप की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि पत्नी की इलाज के दौरान ट्रामा सेंटर में मौत हुई थी।मामले में शुक्रवार को कनाडा में रहने वाले अनुरूप के बेटे आदित्य सिंह ने पिता के दोस्त धर्मेंद्र यादव पर मुकदमा दर्ज कराया है। आदित्य का आरोप है कि एक साल पहले नई दिल्ली के मालवीयनगर निवासी धर्मेंद्र ने पिता से व्यवसाय के सिलसिले में 50 लाख रुपये उधार लिए थे। उसने एक साल बाद देने के लिए कहा था। पर उन्होंने तय समय पर भी रुपये नहीं लौटाए। पिता के द्वारा रुपये मांगने पर वह टाल मटोल करने लगे। दबाव बनाने पर 44 लाख रुपये का चेक दिया। वह बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने पर पिता ने धर्मेद्र के खिलाफ एनआइएक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था। फिर लॉकडाउन के दौरान पिता आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। उनका व्यवसाय चौपट हो गया था। इसके कारण उन्होंने मां को गोली मारी और फिर खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। इंस्पेक्टर नाका सुजीत दुबे ने बताया कि पहले छोटे बेटे की तहरीर पर अनुरूप के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसमें फाइनल रिपोर्ट लग गई थी। अब आदित्य ने धर्मेद्र के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। मामले की जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्यवाही होगीआदित्य ने बताया कि धर्मेंद्र पिता से मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने के साथ ही लगातार उन्हें धमकी दे रहा था। इससे पिता बहुत अधिक परेशान और तनाव में थे। पिता और मां दोनों की मौत का जिम्मेदार धर्मेंद्र ही है। धर्मेंद्र के कारण मेरा पूरा घर बर्बाद हो गया।आदित्य ने बताया कि घटना के बाद से आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए परिवारीजन थाने के चक्कर काट रहे थे पर सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद जिलाधिकारी और अन्य आलाधिकारियों से गुहार की गई। अधिकारियों के आदेश के बाद भी पुलिस ने पहले जांच के नाम पर टरकाया। इसके बाद मुकदमा दर्ज किया।

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