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लखनऊ नगर निगम में बदतर कूड़ा प्रबंधन और सीवरेज योजना पर पार्षदों का गुस्सा फूटा


🗒 सोमवार, अक्टूबर 12 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
लखनऊ नगर निगम में बदतर कूड़ा प्रबंधन और सीवरेज योजना पर पार्षदों का गुस्सा फूटा

लखनऊ, शहर में डाली जा रही सीवर लाइन में मानकों की अनदेखी और मनमाने तरह से सड़कों की खोदाई का मुद्दा नगर निगम सदन के अधिवेशन मे छाया रहा है। एक साल 23 दिन के बाद हुए सामान्य सदन में पार्षदों ने जनसमस्याओं को लेकर अधिकारियों को घेरा। करीब आठ घंटे चले सदन के दौरान भाजपा पार्षद आपस में ही भिड़ते दिखे तो नाराज भाजपा के एक पार्षद सदन छोड़कर ही चल गए। सदन ने हर वार्ड में विकास निधि की तीसरी किश्त (32 लाख) जारी करने पर सहमति दे दी। हालांकि सदन खत्म होने पर विपक्षी पार्षदों ने महापौर संयुक्ता भाटिया पर बातें न सुने जाने का आरोप लगाते हुए उन्हें पटल पर आकर घेर लिया। विरोध के बीच महापौर कक्ष से बाहर निकल गईं तो विपक्षी पार्षद धरने पर बैठ गए और महापौर मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे तो भाजपा पार्षद महापौर जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। माहौल तनाव पूर्ण होने से पहले ही कुछ वरिष्ठ पार्षदों ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामले को शांत किया।कोरम पूरा न होने से सदन की कार्यवाही आधा घंटा लेट सुबह पौने 11 बजे से शुरू हुई। पहले सीवरेज योजना का मामला उठा। सदन में जलनिगम के अभियंताओं को भी बुलाया गया। आलमबाग से जुड़े वार्ड में चल रही सीवर लाइन डालने के कार्य में पार्षदों ने नाराजगी जताई। पार्षद राजेंद्र सिंह गप्पू, श्रवण नायक, सुधीर मिश्रा, रेखा भटनागर ने कहा कि घटिया तरह से काम हो रहा है। सीवर लाइन कम इंच की डाली जा रही है। पीले ईंट और सिर्फ बालू का ही उपयोग हो रहा है। जलनिगम ने शाहजहांपुर के जिस ठेकेदार को काम दिया है, उसमे काम छोटे-छोटे ठेकेदारों को बेच दिया है। रात में सड़कों की खोदाई की जा रही है और इसकी जानकारी नगर निगम को भी नहीं दी जा रही है। लोगों का चलना मुश्किल हो गया और तमाम लोग गिरकर चोट खा चुके हैं। पार्षद यहां तक ही चुप नहीं बैठे और कहा कि जल निगम के अभियंता शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं और खोदी गई सड़कों को घटिया तरह से बनाया जा रहा है। महापौर ने कहाकि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी तो नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि अगर घटिया काम हो रहा है तो नगर निगम की टीम बनाकर जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट शासन को भेजा जाएगा। उधर, जलनिगम के अधिशासी अभियंता अजीत सिंह ने पटल पर आकर सफाई दिया कि सड़कों की खुदाई और उसे बनाने का काम जलनिगम शासनादेश के तरह कर रहा है और अगर मानकों की अनदेखी होने की किसी की शिकायत है तो उसकी जांच कराई जाएगी। पार्षद इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए।भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान और सपा पार्षद दल के नेता सै. यावर हुसैन रेशू ने स्मार्ट सिटी और अमृत योजना के तहत डाली जा रही सीवर लाइन का मामला उठाया। चौहान का कहना था कि हजरतगंज व उससे जुड़े इलाकों में उन जगहों पर सीवर लाइन डाली जा रही है, जहां पहले से सीवर लाइन है, लेकिन सप्रू मार्ग और शाहनजफ रोड पर सीवर लाइन नहीं है, वहां सीवर लाइन नहीं पड़ रही है। यह पैसे की बर्बादी हो रही है। लालकुआं वार्ड के पार्षद सुशील तिवारी 'पम्मीÓ ने भी सीवर समस्या का मुद्दा उठाया।पटरी से उतर चुके शहर के कूड़ा प्रबंधन को लेकर पार्षदों की नाराजगी दिखी। भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान, सुशील तिवारी पम्मी, राम कृष्ण यादव, दिलीप श्रीवास्तव, रजनीश गुप्ता, भृगुनाथ शुक्ला, कांग्रेस पार्षद ममता चौधरी, अमित चौधरी, सपा पार्षद सै.यावर हुसैन रेशू, राज कुमार सिंह राजा, शैलेंद्र सिंह बल्लू समेत अन्य ने उठाया और कहा कि कंपनी घर घर से कूड़ा उठाने में विफल है, लिहाजा चीनी कंपनी से अनुबंध खत्म किया जाए। महापौर ने कहा कि वह शासन को इस संबंध में पत्र लिखेंगी। इसी तरह दिलीप श्रीवास्तव ने 110 चैंपियंस और चार कूड़ा प्रबंधन विशेषज्ञ की तैनाती का मामला उठाया लेकिन शोर शराबे के बीच उनका सवाल दबकर रह गया।डेेंगू समेत मच्छरजनित बीमारियां बढऩे के बाद भी शहर में फागिंग और एंटी लार्वा अभियान न चलने पर नाराजगी जताई गई। पार्षदों का कहना था कि उनके इलाके में फागिंग मशीन नहीं आ रही है, जबकि इस पर लाखों का खर्च हो रहा है। नगर आयुक्त ने सदन को आश्वस्त किया कि फागिंग की नियमित समीक्षा होगी और एंटी लार्वा अभियान के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जाएगा।शासनादेश 2001 को अंगीकृत किया गया,जिसमे राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के गठन पर नगरीय निकाय की सीमा के भीतर पढऩे वाले औद्योगिक क्षेत्रों की रखरखाव का जिक्र है। इसमे औद्योगिक क्षेत्रों से वसूले जाने वाले कर का साठ प्रतिशत बजट औद्योगिक क्षेत्रों में खर्च होगी और चालीस प्रतिशत रकम औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर निकाय क्षेत्र में होगी। दरअसल अभी तक नगर निगम औद्योगिक क्षेत्रों से भवन कर तो वसूलता था लेकिन वहां कोई विकास नहीं कराता था और इसे लेकर औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोग लगातार शिकायत करते थे। अब नगर निगम ने पुराने शासनादेश को अंगीकृत किया है।जिसका शक था, आखिरकार वही हुआ। नगर निगम की जमीन को एक प्रापर्टी डीलर को देने की साजिश तब विफल हो गई, जब नगर निगम सदन में विपक्षी पार्षदों ने मामले को पकड़ लिया। जमीन देने पर भाजपा पार्षदों की सहमति दिखी तो महापौर की भी सहमति दिख रही थी। सदन में इंदिरा प्रियदर्शनी वार्ड के पार्षद राम कुमार वर्मा की तरफ से दिए गए प्रस्ताव को चर्चा के लिए लाया गया लेकिन एक गड़बड़ी यह हो गई कि उसकी आख्या रिपोर्ट नहीं लगी थी। आख्या रिपोर्ट में 11 व 13 नंबर तो था लेकिन बारह नंबर की आख्या नहीं थी और बारह नंबर पर ही जमीन को देने का प्रस्ताव का जिक्र था। सपा पार्षद दल के नेता सै. यावर हुसैन रेशू, शैलेंद्र सिंह बल्लू, कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी और अमित चौधरी ने इस मामले को उठाया तो प्रस्ताव देने वाले भाजपा पार्षद राम कुमार वर्मा से उनकी बहस हो गई। विपक्ष और भाजपा पार्षदों के बीच तकरार होने लगी। विपक्षी पार्षदों का कहना था कि जब प्रापर्टी डीलर की तरफ से कोई प्रस्ताव जमीन एक्सचेंज नहीं आया है तो उसे सदन में कैसे लाया गया। महापौर भी सफाई देती रहीं। अपर नगर आयुक्त डा. अर्चना द्विवेदी ने पटल पर आकर सफाई दी कि बिना अभिलेखों के प्रस्ताव आया था और नगर निगम के बदले जिस जमीन को देने का जिक्र है, उसमे कई खसरा नंबर की जमीन का मामला अदालत में लंबित है। शोर शराबे के बीच प्रस्ताव को स्थगित का नगर आयुक्त को जांच के लिए अधिकृत कर दिया गया।दरअसल इंदिर प्रियदर्शनी वार्ड के चांदन गांव स्थित नगर निगम की जमीन खसरा नंबर 139, 140, 141, 143, 143/2, 144, 145, 155 और 159 में दर्ज है और 3270 वर्गमीटर इसका क्षेत्रफल है। वार्ड के पार्षद रामकुमार वर्मा की तरफ से नगर निगम की जमीन को एक्सचेंज में देने का प्रस्ताव आया था। पार्षद का कहना थान्होंने इसके बदले सड़क से लगी जमीन प्रॉपर्टी डीलर से मांगी है, जिससे वहां सामुदायिक केंद्र या स्टेडियम बन सके। दैनिक जागरण ने दो दिन पहले ही इस साजिश से पर्दा हटाया था।सदन में कुछ पार्षदों ने नगर निगम की जमीनों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। पार्षदों का कहना था कि शिकायत के बाद भी केसरी खेड़ा, हैदरगंज और अमौसी गांव में जमीनों पर कब्जा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। तहसीलदार सविता शुक्ला ने सदन को बताया कि अदालत में कई मामले लंबित होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है और कुछ कब्जों को हटाने का अभियान लगाया गया है। उनका कहना था कि पुरानी आबादी में यह कब्जे हैं और कोरोना काल में कार्रवाई करना उचित नहीं था। हालांकि नगर आयुक्त ने सदन को आश्वासन दिया कि वह जांच कमेटी बनाकर अवैध कब्जों पर कार्रवाई करेंगे।सदन में भाजपा पार्षद आपस में ही भिड़ते दिखे। भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान और भाजपा पार्षद दल के उपनेता रामकृष्ण यादव के बीच बहस हो गई। अपने उपनेता की बात से असहमत चौहान ने कहा कि सदन की गरिमा को गिराया जा रहा है। सर्कस बना दिया गया है सदन को। इसके बाद पार्षद मोंटी ने अवैध पार्किंग का मुद्दा उठाया तो फिर उप नेता रामकृष्ण खड़े हुए मोंटी ने उन्हें भी बैठने को कहा तो बहस हो गई और मोंटी सदन छोड़कर चले गए। लालजी टंडन की प्रतिमा लगाने की मांग और सदन में हुए निर्णय का पालन न होने पर नामित पार्षद अनुराग मिश्र ने मामला उठाया तो भाजपा पार्षद दिलीप श्रीवास्तव ने आपत्ति जताई। इसे लेकर दोनों पक्षों में बहस हो गई।भवन कर में घपला करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। भाजपा पार्षद सुनीता सिंघल ने शहर भर में भवन कर में बड़े पैमाने पर की गई कमी का जिक्र करते हुए उसके साक्ष्य भी दिए। उनका कहना था कि ट्रांसपोर्टनगर में भवन कर में घपला करने वालों का सिर्फ तबादला किया है, जो दिखावे की कार्रवाई है और गलत करने वाले नई जगह पर भी गलत काम कर नगर निगम को नुकसान पहुंचाएंगे।

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