भाजपा सरकार की गलत नीतियों से यूपी में किसान बेहाल - अखिलेश यादव

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भाजपा सरकार की गलत नीतियों से यूपी में किसान बेहाल - अखिलेश यादव


🗒 शनिवार, अक्टूबर 31 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
भाजपा सरकार की गलत नीतियों से यूपी में किसान बेहाल - अखिलेश यादव

लखनऊ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की गलत नीतियों के चलते किसान बेहाल हैं। जमाखोर मालामाल हो रहे हैं। बिचौलिये और बड़े व्यापारियों के सरकारी तंत्र से मिलीभगत की वजह से किसान अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं कृषि उपज की उत्पादन लागत का डेढ़ गुना देने के अपने वादे को भूल चुकी है।सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि किसानों को इस वर्ष धान की फसल से बहुत उम्मीद थी। सही न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल जाता तो उनके बेटे-बेटी की शादी हो जाती। घरों की मरम्मत हो जाती। किसान का दुर्भाग्य उसे 1888 रुपये घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य तो मिला नहीं, उल्टे 800 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच धान बेचना पड़ा। धान खरीद केंद्रों में अव्यवस्था और लूट का राज कायम है।सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि किसान और छोटे दुकानदार बर्बाद हो रहे हैं। दो चार पूंजीपतियों का पूरे कारोबार पर कब्जा होता जा रहा है। भाजपा सरकार जो नया कृषि विधेयक लाई है, उससे खेत पर किसान का मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा। उसकी खेती कारपोरेट की शर्तों पर होगी। कृषि अर्थव्यवस्था के प्रति भाजपा सरकार की लगातार उपेक्षा का ही फल है कि देश की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इन विद्यालयों में 14-15 वर्षों से कार्यरत लगभग दो हजार कर्मचारियों की आजीविका पर संकट छाया हुआ है। अखिलेश यादव ने इन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में करीब 14-15 वर्षों से अल्प वेतनमान पर कार्यरत लगभग दो हजार कर्मचारियों, वार्डेन तथा फुलटाइम व पार्टटाइम शिक्षकों को अब बालकों के निश्शुल्क शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का हवाला देकर निकाले जाने के आदेश हुए हैं। अधिकतर कर्मचारियों की उम्र 50 वर्ष के ऊपर है, जिससे उनकी आजीविका और जीवन दोनों खतरे में पड़ गया है। इनका जिला चयन समिति ने चयन किया था और प्रतिवर्ष उनका संविदा विस्तार होता रहा है।

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