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मुख्य सचिव का जिलाधिकारियों को COVID-19 की स्थिति का आकलन करने के बाद नाइट कर्फ्यू लगाने का निर्देश


🗒 सोमवार, नवंबर 30 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
मुख्य सचिव का जिलाधिकारियों को COVID-19 की स्थिति का आकलन करने के बाद नाइट कर्फ्यू लगाने का निर्देश

लखनऊ, कोरोना वायरस संक्रमण के एक बार फिर बढ़ते प्रसार को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार बेहद सक्रिय हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने जिलाधिकारियों को  कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति का आंकलन करके जिलों में नाइट कर्फ्यू लगाने का निदेश जारी कर दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में कोविड प्रोटोकाल का काफी सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसी बीच लगातार बढ़ते मामलों को देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी से तत्काल ही नया प्लान बनाने का निर्देश दिया । इसके तहत मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को जिले में कोरोना की स्थिति का गहन आकलन करने के बाद अपने स्तर से जिलों में नाइट कर्फ्यू लगाने का निर्देश दिया है।उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के एक बार फिर बढ़ते प्रसार को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसमें कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए जिला प्रशासन को स्थानीय प्रतिबंध लागू करने को अधिकार दिया गया है। अगर मामला गंभीर हो रहा है तो इसमें रात्रि कर्फ्यू भी शामिल है। गाइडलाइन एक दिसंबर से अग्रिम आदेश तक राज्य में लागू रहेगी। कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए मुख्य सचिव की ओर से नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए जिलाधकारी स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करते हुए रात्रि कर्फ्यू भी घोषित कर सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर शारीरिक दूरी का पालन कराने के लिए धारा 144 लगाने का भी निर्देश दिया गया है।मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने कोरोना की गाइड लाइन जारी करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश को कोरोना के खिलाफ महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। यहां कोरोना के सक्रिय केस में निरंतर कमी आ रही है, लेकिन पिछले कुछ सप्ताह में राज्य के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय केस में वृद्धि होने के भी संकेत मिले हैं। त्यौहार के सीजन के साïथ ही ठंड और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने में लापरवाही की वजह से कुछ क्षेत्रों में कोरोना के संक्रमण बढऩे के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में पूरी सावधानी बरतने की जरुरत है।मुख्य सचिव ने कहा कि कंटेनमेंट जोन की कार्य योजना को और सख्ती से लागू करने और निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। इसके लिए स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस और नगरीय निकाय प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों का आंकलन करके कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन कराने तथा स्थानीय स्तर पर कुछ प्रतिबंध लगाने के लिए उत्तरदायित्व देने की आवश्यकता है। लिहाजा परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जिला तथा पुलिस प्रशासन निर्णय ले सकेंगे। वैसे तो केंद्र सरकार की अनुमति के बगैर प्रदेश में कहीं लॉक डाउन नहीं लगाया जा सकेगा, लेकिन कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए स्थानीय प्रतिबंध लागू किया जा सकेगा। इसमें रात्रि कफ्र्यू भी शामिल है।मुख्य सचिव ने कहा कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुपालन को लेकर लोगों को प्रोत्साहित करने, मास्क पहनने, स्वच्छता और सामाजिक दूरी के मानकों का सख्ती से पालन कराएं।  इसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर मास्क नहीं पहनने वाले व्यक्तियों पर निर्धारित जुर्माना भी वसूला जाए। भीड़भाड़ वाले स्थानों जैसे मार्केट, साप्ताहिक बाजार, सार्वजनिक परिवहन में सामाजिक दूरी का अनुपालन कराया जाए। हवाई जहाज, ट्रेन और मेट्रो रेल में यात्रियों को नियंत्रित करने के लिए पूर्व में निर्गत एसओपी का सख्ती से अनुपालन किया जाए। बस, नाव अथवा यातायात के अन्य साधनों के विषय में भी कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराया जाए। कंटेनमेंट जोन के भीतर और बाहर चिकित्सीय आपातकालीन सुविधाओं, आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति के अतिरिक्त अन्य किसी प्रकार के आवागमन को प्रतिबंधित रखा जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि सॢवलांस टीम को प्रत्येक मकान की सघन निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना की टेस्टिंग के निर्देश भी दिए गए हैं। गाइडलाइन में पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों के संपर्क में आए सभी व्यक्तियों की सूची (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) तैयार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके संक्रमित के चिन्हांकन, ट्रेसिंग, क्वॉरेंटाइन तथा 14 दिनों तक निरंतर अनुश्रवण की कार्यवाही की जाएगी। अब किसी के भी पॉजिटिव मिलने पर 72 घंटे के अंदर ही 80 प्रतिशत संपर्क चिन्हित करने को कहा गया है। इसके अलावा कोविड-19 मरीजों को तत्काल आइसोलेट करते हुए उपचार शुरू किया जाएगा। जरुरत के हिसाब से हॉस्पिटल में भर्ती कर उपचार के साथ सतत निगरानी भी की जाए। इस गाइड लाइन में कंटेनमेंट के बाहर विभिन्न गतिविधियों की छूट दी गई है। किसी भी बंद स्थान (हाल/कमरे) की निर्धारित क्षमता का 50 प्रतिशत किंतु एक समय में अधिकतम 100 व्यक्तियों तक ही फेस शामिल होने की इजाजत होगी। इस दौरान मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा. थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजर और हैंड वॉश रखना होगा। वहीं खुले स्थान/मैदान के 40 प्रतिशत क्षेत्रफल से कम क्षमता तक ही व्यक्तियों के लिए अनुमन्य होगा। कार्यालयों में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। ऐसे शहर जहां कोविड-19 की पॉजिटिविटी दर 10 प्रतिशत से अधिक है, वहां एक ही समय पर कर्मचारियों की संख्या को कम रखने पर निर्णय लिया जा सकेगा।राज्य के बाहर से या राज्य के अंदर लोगों और वस्तुओं के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। सभी प्रकार के जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 200 की धारा 51 से 60 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत र्कारवाई की जाएगी।  शासन ने सोमवार को कोविड-19 को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। पिछली गाइडलाइन के मुकाबले इस गाइडलाइन में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। शादी, ब्याह जैसे कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए जो सीमा तय की गई थी, उसे फिलहाल बरकरार रखा गया है। यानी हाल में क्षमता का 50 फीसद और अधिकतम 100 लोगों को ही शामिल किया जाएगा। खुले मैदान या लॉन में क्षमता का 40 प्रतिशत ही लोगों को एक समय में शामिल होने की अनुमति होगी। मसलन किसी खुले लॉन की कुल क्षमता दो हज़ार है तो वहां 800 लोग एकत्र हो सकते हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभी कुछ दिन पहले ही कोरोना प्रोटोकॉल को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि कहीं से भी पुलिस द्वारा दुव्र्यवहार की खबर आई तो संबंधित पुलिस कॢमयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शादी समारोह केवल सूचना देकर और कोविड प्रोटोकॉल और गाइडलाइन के निर्देशों का पालन करते हुए किया जा सकता है। इसके लिए जो संख्या निर्धारित की गई है, उसमें बैंड-बाजा या अन्य कर्मचारी शामिल नहीं माने जाएंगे। शादियों में बैंड बजाने और डीजे बजाने से रोकने वाले पुलिस कॢमयों पर कर्कवाई करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए हैं।

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