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पीएफआइ को विदेशों से हो रही फंडिंग पर सख्ती, ईडी का उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में 26 जगह छापा


🗒 गुरुवार, दिसंबर 03 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
पीएफआइ को विदेशों से हो रही फंडिंग पर सख्ती, ईडी का उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में 26 जगह छापा

लखनऊ,  हाथरस कांड के साथ ही देश में अन्य संदिग्ध गतिविधियों में पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) की सक्रियता पर शिंकजा कसा जा रहा है। पीएपआई को विदेशों से हो रही फंडिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, आगरा व शामली के अलावा देश के अन्य राज्य में इनके 26 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है। पीएफआइ के देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के मामले में यह कार्रवाई की जा रही है।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया को विदेशों से हो रही लगातार फंडिंग के मामले में लखनऊ और बाराबंकी के साथ प्रदेश में आगरा व शामली में एक साथ छापा मारा है। इनके साथ ही पीएफआइ के दिल्ली, कर्नाटक व महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में इनके कुल 26 ठिकानों पर छापा मारा गया है। कार्रवाई का उद्देश्य कई मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के संबंध में साक्ष्य एकत्र करना था, जो कि पीएफआई और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ जांच की जा रही है।बाराबंकी में कुर्सी थाना क्षेत्र के अगासड़ गांव के राशिद के घर प्रवर्तन विभाग की टीम ने दबिश दी। यहां पर छापेमारी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को फंडिंग को लेकर है। इसी थाना के बहरौली के नदीम को लखनऊ पुलिस ने दिसंबर 2019 में गिरफ्तार किया था। नदीम पीएफआई का कोषाध्यक्ष बताया जाता है। लखनऊ में भी कैसरबाग तथा लालबाग क्षेत्र में छापा मारा गया है।बाराबंकी में प्रवर्तन विभाग की टीम चार लग्जरी गाड़ियों से कुर्सी थाना के अगासंड के मुबस्सिर के घर पहुंची। महिला पुलिस कर्मियों के साथ पहुंची टीम ने करीब तीन घंटे तक घर का कोना-कोना खंगाला। अत्याधुनिक मशीनों से लैस टीम ने घर में जमीन, दीवार, छत, पानी की टंकी सहित हर जगह तलाशी ली। कोई आपत्तिजनक वस्तु उनके हाथ नहीं लगी। टीम ने परिवारजन के बयान दर्ज किए और मुबस्सिर के बैंक एकाउंट की पासबुक भी देखकर विवरण नोट किया। कार्रवाई के दौरान मुबस्सिर घर में नहीं था। मुबस्सिर शाहजहांपुर में पीएफआई शाखा से जुड़ा था और वाहन चलाने और भोजन पकाने में बहुत कुशल बताया जाता है। कुर्सी थाना के गांव में कई युवकों का पीएफआइ से जुड़ा होना बताया जाता है। दिसंबर 2019 को लखनऊ में हुए दंगा में भी पीएफआइ की संलिप्तता की बात सामने आई थी। इसमें ग्राम गौरहार मजरे बहरौली के नदीम को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार किया था। नदीम पीएफआइ का कोषाध्यक्ष बताया जाता है। अब अगासंड में टीम की छापेमारी के बाद नेटवर्क की क्षेत्र में सक्रियता की आशंका को बल मिला है। डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक, ने बताया कि बाराबंकी प्रवर्तन विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता हुई है। उनके स्तर से बहुत स्पष्ट और पूर्ण कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन प्रकरण पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़ा ही बताया जा रहा है। देर शाम तक विवरण उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।ईडी ने इनके अलावा जिन ठिकानों पर छापा मारा है उनमें भारत के पॉपुलर फ्रंट के चेयरमैन ओ एम अब्दुल सलाम और केरल के प्रदेश अध्यक्ष नसरुद्दीन एलारोम के ठिकाने भी हैं। इनके साथ ही तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में खोज की जा रही है। इन सभी जगह पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे जा रहे हैं। पीएफआइ का गठन 2006 में केरल में हुआ था और इसका मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी में है। ऐसा आरोप है कि इन फंडों का इस्तेमाल पीएफआई के सहयोगी संगठनों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों और अन्य स्थानों पर विरोधी सीएए विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने के लिए किया था। ईडी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भी भेजी थी।सीएए तथा एनआरसी के विरोध के दौरान पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) की अतिरिक्त सक्रियता पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं। इसी दौरान हाथरस कांड पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने उनका फंडिंग नेटवर्क पर आ गया। ईडी ने मथुरा में पुलिस की गिरफ्त में आए पीएफआई से जुड़े चारों लोगों से पूछताछ भी की थी। यह लोग दिल्ली से हाथरस जाते समय वाहनों की चेकिंग के समय पकड़े गए थे। मथुरा के मांट थाने में सिद्दीक निवासी मलप्पुरम (केरल), अतीकुर्रहमान निवासी मुजफ्फरनगर, आलम निवासी रामपुर और मसूद निवासी बहराइच के विरुद्ध आईपीसी की धारा 153 ए, 295 ए व 124 ए के अलावा गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 17 व 14 तथा आईटी एक्ट की धारा 65, 72 व 76 के तहत मुकदमा भी ईडी का हथियार बनेगा।हाथरस की घटना के बाद जस्टिस फार हाथरस विक्टम अभियान चलाया गया। इससे पहले मॉब लिंचिंग व मजदूरों के पलायन के मुद्दे पर लोगों को भड़काने और कश्मीर में अलगाववादी तत्वों के समर्थन में आंदोलन करने में भी इसका इस्तेमाल किया गया था। इससे पहले तीन तलाक, अनुच्छेद-370 की समाप्ति और एनआरसी के नाम पर आंदोलनों में भी पीएफआई ने संगठित तरीके से अभियान चलाया था। ईडी यह पता कर रही है कि इस वेबसाइट के माध्यम से अब तक कितना फंड जुटाया गया है। यह भी पता किया जा रहा है कि फंड का इस्तेमाल कहां किया गया है किन-किन के खाते में भेजा गया है।पीएफआई की देश भर में आंदोलनों के लिए आनन-फानन में फंड जुटाने शैली ही उनको जांच के घेरे में लाई है। अब अनैतिक तरीके से जुटाए गए फंड की रकम जब्त भी की जा सकती है। ईडी विदेशों से अघोषित वित्तीय सहायता लेने वालों पर बेहद गंभीर है। अब ऐसे सभी स्रोतों का पता लगाया जा रहा है, जहां से फंडिंग की गई है। ईडी की टीमें 'कार्ड डॉट को' नामक उस वेबसाइट की भी जांच कर रहे हैं, जिसके जरिए धन जुटाने का प्रयास किया गया। इस वेबसाइट के माध्यम से राष्ट्र विरोधी दुष्प्रचार भी किए जाते रहे हैं।

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