बच्चों में लग रहा कोल्ड डायरिया का डंक, लखनऊ में 300 से अधिक बीमार

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बच्चों में लग रहा कोल्ड डायरिया का डंक, लखनऊ में 300 से अधिक बीमार


🗒 रविवार, जनवरी 10 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
बच्चों में लग रहा कोल्ड डायरिया का डंक, लखनऊ में 300 से अधिक बीमार

लखनऊ, जनवरी महीने की शुरुआत से ही लखनऊ में कोल्ड डायरिया के मरीज बढ़ने लगे हैं। ठंड अधिक लगने की वजह से उल्टी दस्त और पेट में दर्द की शिकायतों के साथ बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कोल्ड डायरिया को वायरल डायरिया के नाम से भी जाना जाता है। एक हफ्ते के दौरान अब तक 300 से अधिक बच्चे कोल्ड डायरिया से बीमार पड़े हैं। अकेले सिविल और बलरामपुर अस्पताल में रोजाना तीन दर्जन से भी अधिक मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अधिक गंभीर बच्चों को डायरिया वार्ड में भर्ती भी किया जा रहा है। सिविल अस्पताल के डायरिया वार्ड में कई बच्चे भर्ती किए गए हैं। बालू अड्डा निवासी साढे़ पांच वर्षीय सुमित को सीने में जकड़न बढ़ने के बाद 31 दिसंबर को सिविल अस्पताल के डायरिया वार्ड में भर्ती किया गया है। इसी तरह मलिहाबाद निवासी आठ महीने के तेजस शर्मा को उल्टी दस्त (डायरिया) की शिकायत होने के बाद आठ जनवरी को यहां भर्ती किया गया। वहीं, कैसरबाग निवासी सात साल के मोहम्मद हुसैन को गुर्दे में दर्द होने पर सात जनवरी को भर्ती कराया गया। गोमती नगर निवासी सात साल के शिवा निषाद भी बुखार उल्टी और दस्त की समस्याओं के चलते आठ जनवरी से यहां भर्ती हैं। इसी तरह बलरामपुर के डायरिया वार्ड में भी करीब सात आठ बच्चे भर्ती किए गए हैं। अन्य बच्चों का घर से ही इलाज किया जा रहा है।उल्टी-दस्त होना, बुखार होना, चक्कर आना, बार-बार और कम मात्रा में पेशाब होना, पेट में ऐंठन, सीने में जकड़न होना। रोते-रोते बच्चे की आंख लाल पड़ जाना व जलन होना, नाक से पानी गिरना। कभी-कभी पानी की अधिक कमी से गुर्दे में भी दर्द हो सकता है।सिविल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संजय जैन कहते हैं कि इन दिनों यहां पंद्रह बीस डायरिया पीड़ित बच्चे रोज पहुंच रहे हैं। बार-बार उल्टी और दस्त के चलते शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस डायरिया में दवाएं बहुत असर नहीं करतीं। इसलिए ओआरएस का घोल पिलाते रहें, लेकिन ध्यान रखें कि यदि छोटा पाउच है तो उसे एक ही बार में 200 मिली पानी में घोल लें। बड़ा पाउच है तो एक लीटर पानी में एक ही बार में घोल लें। कुछ लोग थोड़ा-थोड़ा घोल कर पिलाते हैं। इससे बच्चे की तबीयत और भी खराब हो सकती है। इसलिए घोलना एक साथ है। फिर उसे बोतल में रखकर उसमें से थोड़ा-थोड़ा अगले 24 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर उसे झूठा ना होने दें। बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रमेश मणि त्रिपाठी कहते हैं कि रोजाना 15-18 डायरिया पीड़ित बच्चे यहां आ रहे हैं। दो वर्ष से नीचे के बच्चे में यह बीमारी ज्यादा होती है। हालांकि, 10 वर्ष तक के बच्चे भी ग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों को ठंड नहीं लगने दें। सिर से लेकर कान तक शरीर को गर्म कपड़े से कवर रखें। पीने में उसे गुनगुना पानी ही दें। दाल, दलिया, खिचड़ी व मौसमी फल खिलाएं।

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