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लखनऊ के पारा कोतवाली के पूर्व इंस्पेक्टर रणजीत सिंह भदौरिया पर साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज


🗒 सोमवार, फरवरी 22 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
लखनऊ के पारा कोतवाली के पूर्व इंस्पेक्टर रणजीत सिंह भदौरिया पर साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज

लखनऊ, । राजधानी की पारा कोतवाली में वर्ष 2019 तैनात रहे इंस्पेक्टर रणजीत सिंह भदौरिया के खिलाफ सीबीसीआइडी (क्राइम ब्‍यूरो क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) ने एफआइआर दर्ज कराई है। रणजीत पर श्याम रावत नाम के युवक की हत्या के एक मामले में आरोपितों को बचाने और साक्ष्य मिटाने का आरोप है। इस मामले की विवेचना सीबीसीआइडी कर रही थी। छानबीन में इंस्पेक्टर की भूमिका उजागर होने के बाद रविवार को पारा कोतवाली में विवेचक आजाद सिंह केसरी ने एफआइआर दर्ज कराई। रणजीत वर्तमान में प्रतापगढ़ के लालगंज थाने में तैनात हैं।आरोप है कि हत्या के इस मामले की विवचेना तत्कालीन इंस्पेक्टर रणजीत सिंह भदौरिया कर रहे थे। इस मामले में भपटामऊ निवासी विपिन व अन्य के खिलाफ नामजद एफआइआर दर्ज थी। पीड़ि‍त परिवार ने विवेचना में गड़बड़ी का आरोप लगाकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। इसके बाद प्रकरण की विवेचना सीबीसीआइडी को सौंपी गई। छानबीन के दौरान सामने आया कि इस अपराध में भपटापमऊ निवासी राहुल, विपिन, पूनम और ढेढेमऊ मलिहाबाद निवासी सूरज शामिल थे। पड़ताल में पता चला कि इंस्पेक्टर ने विवेचना शुरू करने के बाद घटनास्थल से मिले ईंट, चप्पल, मोबाइल फोन, सीसी फुटेज और सीडीआर साक्ष्य के तौर पर एकत्र नहीं किए। यही नहीं, इंस्पेक्टर ने जो साक्ष्य एकत्र किए भी, उन्हें अभिलेखों में अंकित नहीं किया। साथ ही साक्ष्यों को नष्ट भी कर दिया। इंस्पेक्टर ने मामले को संदिग्ध बताकर लीपापोती कर दी और वरिष्ठ अधिकारियों को इससे अवगत नहीं कराया। खास बात यह है कि इंस्पेक्टर ने नामित आरोपितों को एक सप्ताह तक बिना लिखा-पढ़ी के नियम विरुद्ध हिरासत में भी रखा। विवेचक ने इंस्पेक्टर के इस कृत्य को अपराध की श्रेणी में पाते हुए एक फरवरी को पारा कोतवाली में एफआइआर दर्ज करने की तहरीर दी थी। पुलिस ने भी 20 दिन तक इस मामले को दबाए रखा। दबाव पड़ने पर रविवार को एफआइआर दर्ज की।भपटामऊ निवासी श्याम रावत 30 अप्रैल 2019 की देर रात घर से निकला था। देर रात परमेश्वर के घर के पास श्याम घायल मिला था। इसकी जानकारी परिवारजन को उसके दोस्त राहुल ने दी थी। श्याम की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। श्याम के भाई राज ने विनीत, राहुल और परमेश्वर पर घर से बुलाकर ले जाकर हत्या करने का आरोप लगाया था। श्याम के दोनों पैर, सिर, नाक व कान में चोट आई थी। एफआइआर के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इस पर पीडि़त परिवार ने सीबीसीआइडी से न्याय की गुहार लगाई थी।

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