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पूर्व IPS अफसर अमिताभ ठाकुर ने CAT लखनऊ बेंच में दी चुनौती


🗒 मंगलवार, मई 11 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
पूर्व IPS अफसर अमिताभ ठाकुर ने CAT लखनऊ बेंच में दी चुनौती

लखनऊ,। उत्तर प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के जबरिया सेवानिवृत करने के फैसले को पूर्व आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने केंद्रीय केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की लखनऊ बेंच में चुनौती दी है। उन्हेंं केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के क्रम में प्रदेश सरकार ने 23 मार्च 2021 को अनिवार्य सेवानिवृति दी थी।समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोलने के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में कालीदास मार्ग पर धरना देने वाले अमिताभ ठाकुर ने अब योगी आदित्यनाथ सरकार के फैसले का विरोध कर दिया है।जबरिया सेवानिवृत पूर्व आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने अनिवार्य सेवानिवृति को कैट लखनऊ बेंच में चुनौती दी है। उन्हेंं गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश शासन ने 23 मार्च 2021 को अनिवार्य सेवानिवृति दी थी। अभी उनका कार्यकाल वर्ष 2028 तक है। अमिताभ ने अपनी याचिका में कहा कि भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश शासन के आदेश पूरी तरह गलत हैं और मात्र उनके प्रति व्यक्तिगत तथा व्यवस्थाजन्य विद्वेष तथा पूर्वाग्रह के कारण पारित है। जिससे उनका पूरा परिवार प्रभावित हुआ है। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि यूपी शासन ने बिना कारण व आधार के मनमाने ढंग से उनका नाम चुन कर उन्हेंं सेवा से निकाले जाने की संस्तुति की, जिसे भारत सरकार ने अनुमोदित कर दिया। जब उन्होंने इस आदेश से संबंधित अभिलेख मांगे तो दोनों सरकार ने उन्हेंं अभिलेख देने से मना कर दिया गया।अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार से अभिलेख देने से मना करने से यह साबित हो जाता है कि दोनों सरकार के आदेश गलत हैं और इस प्रकरण के तथ्य छिपाना चाहती हैं। अत: उन्होंने इस आदेश को खारिज करते हुए उन्हेंं सेवा में वापस लिए जाने तथा उन्हेंं इस अवधि के समस्त सेवा लाभ दिए जाने की प्रार्थना की है।अमिताभ ठाकुर ने इससे पहले भी कहा था कि उन्हेंं किसी गंभीर अनियमितता के आरोप में नहीं बल्कि राजनीतिक व अन्य कारणों से सेवा से बाहर किया गया है। उन्हेंं जबरदस्ती दागी अधिकारी बताकर यह कार्रवाई की गई है, जबकि वह पूरी निष्ठा एवं लगन से अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। शासन के अफसरों ने उन्हेंं प्रताडि़त करने तथा उनका प्रमोशन रोके रखने के लिए जानबूझकर उन जांचों को भी लंबित रखा, जिनमें जांच अधिकारियों ने उन्हेंं दोषी नहीं पाया था।

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